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सत्य की बहुस्तरीयता ही बाबा नागार्जुन की कविता की धुरी है
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सत्य की बहुस्तरीयता ही बाबा नागार्जुन की कविता की धुरी है

बाबा नागार्जुन का जन्मदिन: लोकतंत्र और कविता के रिश्ते पर गहरी पड़ताल। जानें कैसे नागार्जुन ने कविता में बुर्जुआ लोकतंत्र की आलोचना, मानवाधिकार विमर्श...

Diversity in Sahitya Akademi साहित्य अकादमी में डायवर्सिटी
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साहित्य अकादमी में डाइवर्सिटी ! ढूंढते रह जाओगे

साहित्य अकादमी में डाइवर्सिटी ! अपने जन्मकाल से ही साहित्य अकादमी सवर्णों द्वारा परिचालित होती रही है, जिनके स्व-वर्णवादी सोच के चलते इसमें विविधता...

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