हॉर्मुज़ स्ट्रेट की नाकेबंदी: रणनीति या विफलता?

  • Donald Trump की कूटनीति पर सवाल
  • अमेरिकी सेना में असंतोष और समय से पहले रिटायरमेंट का बढ़ता चलन
  • Iran की शर्तें और वार्ता से इनकार
  • Benjamin Netanyahu पर अंतरराष्ट्रीय दबाव
  • अमेरिकी घरेलू राजनीति में बढ़ता विरोध और ध्रुवीकरण
  • Hillary Clinton और अन्य नेताओं की आलोचना
  • वैश्विक प्रतिक्रिया: China, Russia और यूरोप का रुख
  • युद्ध, कूटनीति और अंतरराष्ट्रीय कानून के सवाल

क्या अमेरिका की वैश्विक नेतृत्व क्षमता कमजोर पड़ रही है?

The Hormuz Crisis and Trump's Diplomacy: War, Pressure, and Deepening Rifts Within the American Power Structure

ईरान पर हॉर्मोज स्ट्रेट की नाकेबंदी करने के बाद अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप बैकफुट पर आते दिखाई पड़ रहे हैं और वार्ता फिर से शुरू करने की कोशिश कर रहे हैं। ईरान को वार्ता की मेज पर लाने के लिए ट्रंप लगातार कोशिशों में लगे हुए हैं।

अमलेन्दु उपाध्याय

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और अमेरिका को एक और बड़ा झटका मिल रहा है, क्योंकि वहां की अंदरूनी राजनीति इस मामले को लेकर इतनी गर्म हो गई है कि उसका असर सेना पर भी दिखाई पड़ रहा है।

रिपोर्ट्स के अनुसार, सेना के तमाम बड़े अधिकारी वॉलंटरी रिटायरमेंट ले रहे हैं, यानी सेवा निवृत्ति ले रहे हैं और सेना को छोड़ रहे हैं। इसका कारण यह है कि सेना की सलाह के बिना अमेरिका को इस युद्ध में झोंका जा रहा है। इससे पहले अमेरिका के सेना प्रमुख को निकाल दिया गया और कई बड़े अधिकारियों को बर्खास्त कर दिया गया।

सेना में यह बगावत की स्थिति अमेरिका में दिखाई पड़ रही है, जो डोनाल्ड ट्रंप के लिए एक बड़ा झटका है। डेमोक्रेटिक पार्टी के लोग, नेता और सांसद संसद के भीतर और बाहर ट्रंप का विरोध कर रहे हैं। इजरायल के प्रधानमंत्री नेतन्याहू भी अंतरराष्ट्रीय मोर्चों पर और अपने देश में घिरे हुए हैं।

ईरान के खिलाफ छेड़े गए अमेरिका और इजरायल के इस युद्ध ने इन दोनों देशों को दुनिया भर में अलग-थलग कर दिया है। अपने देश में भी इनके दोनों नेताओं को अपने लोगों के विरोध का सामना करना पड़ रहा है।

हॉर्मोज स्ट्रेट की नाकेबंदी का कोई असर दिखाई नहीं पड़ रहा है, क्योंकि अमेरिका न तो ईरान से सामान ले जा रहे जहाजों को रोक पाया और न ही चीन के जहाजों को रोक पाया। इस पर सवाल उठ रहे हैं कि यह नाकेबंदी किसको रोकने के लिए की गई है।

अमेरिकी सेना से आ रही रिपोर्ट्स के अनुसार, ट्रंप चाहते हैं कि फिर से युद्ध विराम हो और इस्लामाबाद में दोनों देशों के प्रतिनिधिमंडल बैठें। हालांकि, वह यह भी कह रहे हैं कि ऐसा ईरान के अनुरोध पर किया जा रहा है। ईरान अनुरोध करने की बात तो छोड़ दीजिए, वह लगातार दोबारा वार्ता की मेज पर बैठने से इंकार कर रहा है और साफ तौर पर कह रहा है कि अगर इन्हीं शर्तों के साथ अमेरिका दोबारा बैठता है तो कोई फायदा नहीं है।

ईरान की तरफ से अभी भी इस बात की कोई पुष्टि नहीं हुई है कि वह दूसरे दौर की वार्ता में हिस्सा लेगा या नहीं। हालांकि, उनके विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने साफ तौर पर कहा कि कूटनीति हमेशा चलती रहती है और कूटनीतिक प्रयास चलते रहेंगे। लेकिन ईरान ने यह भी साफ कह दिया है कि हॉर्मोज स्ट्रेट की नाकेबंदी और इजरायल के लेबनान पर हमले सीज फायर का सीधा-सीधा उल्लंघन और अंतरराष्ट्रीय कानूनों का उल्लंघन हैं। इसलिए जब तक यह जारी रहेंगे, तब तक वे वार्ता पर कैसे जाएं।

आईआरआईबी (इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान ब्रॉडकास्टिंग) के सरकारी टेलीविजन चैनल ने देर रात एक ट्वीट किया, जिसमें कहा गया कि "5,200 न्यूक्लियर बम वाले देश ने 10,000 किमी दूर दूसरे देश पर हमला किया जिसके पास कोई न्यूक्लियर हथियार नहीं है और जो आईएईए का मेंबर है, उसके एलिमेंट्री स्कूल और रेलवे पुलों पर बमबारी की। क्या ऐसे देश के साथ लॉजिकल बातचीत हो सकती है?" यह सवाल उठाया गया है कि ऐसे देश से कैसे बात की जा सकती है जो एक नॉन-न्यूक्लियर देश पर हमला कर रहा है, जिसके पास परमाणु हथियार नहीं हैं और जो आईएईए का मेंबर है। आईएईए अपनी रिपोर्ट में बता चुका है कि ईरान के पास परमाणु बम नहीं है।

ईरान का कहना है कि उनके पास परमाणु बम नहीं है और वे बनाएंगे भी नहीं, यह उनकी आधिकारिक नीति है। उनका इस्लामिक गणराज्य होने के कारण नरसंहारक अस्त्र उनके पास नहीं होने चाहिए।

ट्रंप के एक नजदीकी, सीनेटर लिंडसे ग्राहम ने कहा है कि ईरान के साथ समझौता करने के लिए सीज फायर को एक बार फिर बढ़ाने के बारे में चल रही अटकलें और अफवाहें बेबुनियाद साबित होंगी। उनके अनुसार, राष्ट्रपति ट्रंप का रुख साफ है और उन्हें डर है कि ईरानी वही पुराना खेल खेलेंगे जो वे हमेशा खेलते आए हैं, यानी छोटी-मोटी रियायतें देकर मामले को बेवजह लंबा खींचना।

लिंडसे ग्राहम के अनुसार, राष्ट्रपति ट्रंप के लिए मुख्य शर्तें ये हैं:

* यूरेनियम संवर्धन पूरी तरह बंद हो।

* लगभग 900 पाउंड अत्यधिक संवर्धित यूरेनियम पर अमेरिका का नियंत्रण हो।

* हॉर्मोज स्ट्रेट बिना किसी ईरानी दखल के खुला रहे।

* ईरान को अपना लंबी दूरी का बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम और परमाणु हथियार बनाने की कोई भी कोशिश बंद करनी चाहिए।

ईरान इन शर्तों को अपनी संप्रभुता पर सीधा हमला मानता है और इन्हें स्वीकार नहीं करेगा। ये शर्तें तब भी थीं जब युद्ध नहीं हुआ था, और अब युद्ध में मात देने के बाद ईरान कैसे इन शर्तों को स्वीकार करेगा, यह बचकाना लगता है।

हिलेरी क्लिंटन, पूर्व राष्ट्रपति पद की उम्मीदवार, ने एमएस नाउ टीवी चैनल पर कहा कि यह चौंकाने वाली बात है कि ट्रंप ने कहा कि उन्हें किसी ने नहीं बताया था कि ईरान हॉर्मोज स्ट्रेट को बंद कर सकता है। उन्होंने कहा कि जितने भी वॉर गेम्स में उन्होंने हिस्सा लिया, उनमें सबसे पहले यही मानकर चला जाता था कि ईरान ऐसा ही करेगा। उन्होंने कहा कि अब अमेरिका ऐसी स्थिति में है जहां वह कमजोर पड़ गया है और उसने वह बढ़त और पहल खो दी है जो उसके पास थी।

हिलेरी क्लिंटन के अनुसार, ट्रंप या तो बेवकूफ हैं या झूठ बोल रहे हैं। डिफेंस एक्सपर्ट्स ने भी कहा था कि ट्रंप को अंदाजा ही नहीं है। इससे मालूम पड़ता है कि ट्रंप मूर्ख भी हैं और धूर्त भी।

जंग शुरू होने से पहले ही ईरान ने 6 घंटे के लिए हॉर्मोज स्ट्रेट को बंद करके उसकी प्रैक्टिस की थी और कहा था कि वे इसे टेस्ट कर रहे हैं। ट्रंप को तभी भी पता नहीं लगा पाया कि ईरान ऐसा कर सकता है। ट्रंप साल भर से धमकी दे रहे थे, जबकि ईरान अपनी पूरी तैयारी कर रहा था। ट्रंप को अपनी स्ट्रेटजी के बारे में भी नहीं पता था और न ही उस देश की स्ट्रेटजी के बारे में जिस पर वे हमला करने जा रहे थे।

इजरायल के साथ मिलकर युद्ध में जाने के बावजूद, दोनों देशों ने आपस में स्ट्रेटजी शेयर नहीं की। नेतन्याहू अपनी कैबिनेट की बैठक में मोसाद पर नाराज हुए क्योंकि मोसाद ने जानकारी दी थी कि हमला करने पर वहां अंदर से विद्रोह हो जाएगा और जनता उनके समर्थन में आ जाएगी, लेकिन इसका उल्टा हुआ। इसका मतलब है कि मोसाद ने भी सही जानकारी नहीं दी।

चीन और रूस की एंट्री हो रही है, और तमाम देश अमेरिका से नाराज होते चले आ रहे हैं। जॉर्जिया मेलोनी, इटली की प्रधानमंत्री, ट्रंप से नाराज हैं और ट्रंप ने मेलोनी के ऊपर भद्दी टिप्पणी की, जिसके जवाब में इटली का विपक्ष पूरा उनके साथ खड़ा हो गया और ट्रंप को उल्टा सीधा जवाब दिया जा रहा है।

इटली में विपक्ष के नेता ने ट्रंप के ऊपर गुस्सा उतारा और कहा कि वे अपने देश की प्रधानमंत्री के साथ खड़े हैं। यह सब दिखा रहा है कि इस लड़ाई में अमेरिका की हार और नुकसान की बौखलाहट में डोनाल्ड ट्रंप क्या कुछ कर रहे हैं। उनके बयान अजीबोगरीब आ रहे हैं, एक के बाद एक बेवकूफी भरे फैसले ले रहे हैं, और उन फैसलों से फिर वह बैकफुट पर जा रहे हैं। पूरी दुनिया में उनका मजाक उड़ाया जा रहा है।

नीदरलैंड के ईरान दूतावास ने भी कुछ टिप्पणी की है।

इटली की नेता विपक्ष, एली शाइनी, ने इटली की संसद में भाषण दिया और कहा कि "सुनो ट्रंप, भले ही हम राजनीतिक विरोधी हों, लेकिन हम इटली के लोग अपने देश पर होने वाले किसी भी हमले को स्वीकार नहीं करेंगे, खासकर तुम्हारी गंदी जुबान से।"

यह बात तब शुरू हुई जब ट्रंप ने पोप के ऊपर टिप्पणी की, जिसका मेलोनी ने विरोध किया। उन्होंने कहा कि राजनीतिज्ञों का काम धर्म के मामले में हस्तक्षेप करना नहीं है। इसके जवाब में ट्रंप ने मेलोनी के ऊपर भद्दी टिप्पणियां कीं।

एली शाइनी ने संसद में कहा कि एक बेहद गंभीर घटना घटी है और वह अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी पर पोप लियो के प्रति कर्तव्य निष्ठा से एकजुटता व्यक्त करने के लिए किए गए हमले की कड़ी निंदा करती हैं। उन्होंने कहा कि इटली एक स्वतंत्र और संप्रभु देश है और उनका संविधान स्पष्ट है कि इटली युद्ध का विरोध करता है। कोई भी विदेशी राष्ट्राध्यक्ष उनके देश और सरकार पर हमला करने, धमकी देने या उसका अपमान करने का अधिकार नहीं रखता। उन्होंने कहा कि वे सदन में एक दूसरे के विरोधी हैं, लेकिन सभी इटालवी नागरिक हैं और इटलीवासियों के प्रतिनिधि हैं। वे सरकार और अपने देश के खिलाफ हमलों या धमकियों को बर्दाश्त नहीं करेंगे।

डोनाल्ड ट्रंप अपनी जुबान, भाषा और गतिविधियों से पूरी दुनिया में एक खलनायक बनते जा रहे हैं। अपने देश में भी उन्हें लोगों के विरोध का सामना करना पड़ रहा है।

सीनेटर क्रिस वैन होलेन ने कहा कि लड़ाई की तैयारी करने के बजाय ट्रंप पोप से लड़ने में लगे हैं और खुद को ईसा मसीह के रूप में पोस्ट कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह मानसिक रूप से अस्थिर व्यक्ति कमांडर इन चीफ बनने के लायक नहीं है। उन्होंने प्रस्ताव लाया है कि ट्रंप के पास जो युद्ध से संबंधित शक्तियां हैं, वे वापस ली जाएं।

क्रिस वैन होलेन ने कहा कि ईरान में अपने गैर-कानूनी युद्ध को खत्म करने के बजाय ट्रंप ने अपना वीकेंड पोप लियो पर हमला करने और खुद की तस्वीरें ईसा मसीह के रूप में पोस्ट करने में बिताया। उन्होंने कहा कि यह मानसिक रूप से अस्थिर व्यक्ति कमांडर इन चीफ बनने के लायक नहीं है और वह अमेरिकियों और पूरी दुनिया को खतरे में डाल रहा है। उन्होंने कहा कि इस युद्ध को अभी खत्म करना होगा।

अमेरिका की जनता और विपक्षी नेता सीधे तौर पर कह रहे हैं कि अमेरिका ईरान के खिलाफ जो लड़ाई लड़ रहा है, वह गैर-कानूनी है। इटली का विपक्ष वहां के प्रधानमंत्री के साथ खड़ा हो गया ट्रंप के खिलाफ, और ट्रंप का विपक्ष ट्रंप के खिलाफ है। ट्रंप की पार्टी भी ट्रंप के खिलाफ है। सेना भी खिलाफ है, और सेना इतनी खिलाफ है कि वहां के जवान और सर्विंग कमांडर्स जल्दी रिटायरमेंट ले रहे हैं, यानी जंग के बीच में अमेरिकी सैनिक सेना छोड़कर भाग रहे हैं। एनपीआर ने इस पर एक विस्तृत रिपोर्ट जारी की है।

नीदरलैंड में ईरान के दूतावास ने एक एआई वीडियो जारी किया है, जिसमें ट्रंप की स्थिति का मजाक उड़ाया गया है और कहा गया है कि "मागा की नई टॉय स्टोरी अभी-अभी आई है।" मागा (मेक अमेरिका ग्रेट अगेन) डोनाल्ड ट्रंप का नारा था, जिसका मजाक उड़ाया गया है।

(अमलेन्दु उपाध्याय hastakshep.com के संपादक और वरिष्ठ पत्रकार हैं।)