अभिजीत दिपके सोनम वांगचुक की जान लेकर ही उसे छोड़ेगा, जस्टिस काटजू की टिप्पणी

  • जंतर-मंतर प्रदर्शन, सोनम वांगचुक और अभिजीत दिपके पर जस्टिस मार्कंडेय काटजू की तीखी टिप्पणी
  • सोनम वांगचुक आंदोलन पर काटजू का बयान
  • अभिजीत दिपके पर जस्टिस मार्कंडेय काटजू का आरोप
  • जंतर-मंतर सोनम वांगचुक प्रदर्शन विवाद

जस्टिस मार्कंडेय काटजू द्वारा

दिल्ली के जंतर-मंतर पर जो कुछ हो रहा है, उसने एक बार फिर मेरी बात को साबित कर दिया है कि 90% भारतीय मूर्ख हैं, वास्तव में इस नौटंकी, स्वांग और दिखावे के बाद मैंने यह आंकड़ा 95% तक बढ़ा दिया है,

और यह साबित हो गया है कि वहां जाने वाले 'प्रख्यात' लोग, जैसे कि अरविंद केजरीवाल, योगेन्द्र यादव, सागरिका घोष, अरुंधति रॉय, संजय सिंह, नसीरुद्दीन शाह, स्वरा भास्कर, डिंपल यादव, राकेश टिकैत, कुणाल कामरा आदि केवल इसलिए ऐसा कर रहे हैं क्योंकि उन्हें सुर्खियों में बने रहने का कोई और रास्ता नहीं मिल रहा है।

जहां तक ​​उस बेचारे सोनम वांगचुक की बात है, अभिजीत दिपके जैसे कुछ लोग अपने आंदोलन को खत्म होने से रोकने के लिए (जैसा कि हो रहा था), या सरकार के खिलाफ फायदा उठाने के लिए उसे शहीद बनाने पर तुले हुए हैं।

अभिजीत दिपके सोनम वांगचुक की जान लेकर और उसे शहीद बनाकर ही छोड़ेगा, वरना उसकी राजनीति कैसे चलेगी? उसे तो प्राइम मिनिस्टर ऑफ इंडिया बनना है।

कॉकरोच जनता पार्टी बनाने के कुछ दिन के ही बाद दिपके के 2 करोड़ से अधिक समर्थक बन गए, जिससे उसका दिमाग खराब हो गया, और वो अपने को प्रधान मंत्री बनने के सपने देखने लगा, और अपने को उसका योग्य समझने लगा।

इससे मुझे एक पुरानी फिल्म याद आती है, 'मुंगेरी लाल के हसीन सपने'


(Justice Markandey Katju is a former Judge of the Supreme Court of India, and former Chairman of the Press Council of India. The views expressed are his own.)