क्या भारत सचमुच ‘नरक का गड्ढा’ है? ट्रंप के बयान पर बवाल और जस्टिस काटजू की कड़वी सच्चाई
डोनाल्ड ट्रंप के भारत पर “‘नरक का गड्ढा’” कमेंट से तीखी राजनीतिक प्रतिक्रिया हुई है, लेकिन गहरा सवाल बना हुआ है: क्या इस गुस्से के पीछे भारत के प्रदूषण, गरीबी, भ्रष्टाचार और शहरी संकटों को नज़रअंदाज़ किया जा रहा है?

भारत पर ट्रंप का कमेंट और उससे शुरू हुआ राजनीतिक घमासान
- भारत को ‘‘नरक का गड्ढा’’ कहने से क्यों आहत हुई लोगों की भावना
- शहरी अव्यवस्था, प्रदूषण और गरीबी: इस कमेंट के पीछे की कड़वी सच्चाई
- राष्ट्रीय गौरव बनाम आज का संकट: क्या हम साफ़ बातों को नज़रअंदाज़ कर रहे हैं?
- क्या आलोचना ट्रंप के शब्दों पर होनी चाहिए या भारत की ज़मीनी हकीकत पर?
- गुस्से से आगे देखें: भारत में स्ट्रक्चरल समस्याओं का सामना करना
डोनाल्ड ट्रंप के भारत को ‘Hell Hole’ कहने वाले बयान पर देशभर में राजनीतिक घमासान मचा है। सरकार और विपक्ष ने इसे अपमानजनक बताया, लेकिन जस्टिस मार्कंडेय काटजू ने सवाल उठाया—क्या प्रदूषण, गरीबी, भ्रष्टाचार और बदहाल शहरों की सच्चाई से मुंह मोड़ा जा सकता है? गुस्से से आगे बढ़कर भारत की ज़मीनी हकीकत को समझने की जरूरत है।
ट्रंप के कमेंट में क्या गलत था?
जस्टिस मार्कंडेय काटजू
US प्रेसिडेंट ट्रंप के इस बयान पर भारत में बहुत हंगामा हो रहा है कि "यहां एक बच्चा तुरंत नागरिक बन जाता है, और फिर वे पूरे परिवार को चीन या भारत या दुनिया की किसी दूसरी नरक जैसी जगह से ले आते हैं।"
भारत सरकार ने ट्रंप के बयान की आलोचना करते हुए इसे 'बिना जानकारी वाला, गलत और खराब टेस्ट वाला' बताया है।
भारत में मुख्य विपक्षी पार्टी, कांग्रेस ने ट्रंप के बयान को "बहुत अपमानजनक और भारत विरोधी, और हर किसी को दुख पहुंचाने वाला" कहा है।"
ज़ाहिर है, भारत को '‘नरक का गड्ढा’' कहने पर एतराज़ है।
लेकिन इस बात में गलत क्या है?
मैं अभी बैंगलोर नाम के एक ‘नरक का गड्ढा’ में हूँ, दिल्ली नाम के एक और ‘नरक का गड्ढा’ से कुछ दिनों के लिए यहाँ आया हूँ। मैं मुंबई, कोलकाता, लखनऊ वगैरह जैसे दूसरे ‘नरक का गड्ढा’ में भी गया हूँ।
एयर पॉल्यूशन, भयानक ट्रैफिक जाम, शहरों में भीड़, सड़कों पर हर जगह पड़े कचरे के ढेर, गंदी नदियाँ, गंदा खाना और पानी (जिससे कई बीमारियाँ होती हैं), मानसून की बारिश में सड़कों पर पानी जमा होना, हर लेवल पर फैला भ्रष्टाचार वगैरह, जो आम आदमी और औरत के लिए ज़िंदगी को मुश्किल बना देते हैं, ये सब मिलकर भारत को ‘नरक का गड्ढा’ कहने को सही ठहराते हैं। और यह भारत में बहुत ज़्यादा गरीबी और बेरोज़गारी, बच्चों में कुपोषण का बहुत बुरा लेवल (ग्लोबल हंगर इंडेक्स के मुताबिक, भारत में हर दूसरा बच्चा कुपोषित है, और हालात और खराब होते जा रहे हैं), हमारे लोगों के लिए सही हेल्थकेयर और अच्छी शिक्षा की लगभग पूरी कमी, वगैरह के अलावा है।
इसमें कोई शक नहीं कि भारतीय अपने पुरखों की बड़ी कामयाबियों पर गर्व महसूस कर सकते हैं।
लेकिन हमें आज अपने हालात देखने होंगे, और बीते हुए कल पर घमंड नहीं करना चाहिए।
और सच तो यह है कि आज भारत सच में एक नरक है।
तो सच बोलने के लिए ट्रंप की बुराई क्यों करें? कोई दूसरे मुद्दों पर उनकी बुराई कर सकता है, लेकिन यहां वह एकदम सही हैं।
(जस्टिस मार्कंडेय काटजू भारत के सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज और प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया के पूर्व चेयरमैन हैं। बताए गए विचार उनके अपने हैं।)


