सूडान युद्ध में यौन हिंसा बनी ‘युद्ध का हथियार’: संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में 546 मामलों का खुलासा
संयुक्त राष्ट्र की नई रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि सूडान युद्ध में यौन हिंसा का व्यापक इस्तेमाल किया गया। 546 मामलों की पुष्टि, महिलाएं और बच्चियां सबसे अधिक प्रभावित

सूडान क्राइसिस (Sudan crisis)
UN रिपोर्ट: सूडान युद्ध में महिलाओं और बच्चियों के खिलाफ यौन हिंसा का भयावह विस्तार
- सूडान संकट: सामूहिक बलात्कार और यौन दासता के मामलों पर संयुक्त राष्ट्र की गंभीर चेतावनी
- दारफ़ूर से खौफनाक गवाही: सूडान युद्ध में यौन हिंसा को हथियार की तरह इस्तेमाल किया गया
- सूडान में युद्ध अपराधों का नया चेहरा, UN ने यौन हिंसा पर जारी की चिंताजनक रिपोर्ट
सूडान में जारी गृहयुद्ध के बीच संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट ने भयावह तस्वीर पेश की है। रिपोर्ट के अनुसार महिलाओं और बच्चियों के खिलाफ यौन हिंसा का इस्तेमाल युद्ध के हथियार के रूप में किया गया। संयुक्त राष्ट्र समाचार की इस ख़बर से जानिए दारफ़ूर से लेकर अन्य प्रांतों तक फैले इस मानवाधिकार संकट की पूरी कहानी...
खबर से जानिए-
- संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में क्या सामने आया?
- सूडान युद्ध में यौन हिंसा का हथियार के रूप में इस्तेमाल
- 546 पुष्ट मामलों से कहीं अधिक गंभीर हो सकती है वास्तविक स्थिति
- सामूहिक बलात्कार, यौन दासता और जबरन विवाह के भयावह मामले
- बच्चियां भी बनीं शिकार, सबसे कम उम्र की पीड़िता सिर्फ 9 वर्ष
- दारफ़ूर में जातीय पहचान के आधार पर हिंसा के आरोप
- RSF और अन्य सशस्त्र समूहों पर लगे गंभीर आरोप
- UN मानवाधिकार प्रमुख ने जवाबदेही और स्वतंत्र जांच की मांग की
- दंडमुक्ति का माहौल क्यों बढ़ा रहा है मानवाधिकार संकट?
सूडान युद्ध में यौन हिंसा के क्रूर और बड़े पैमाने पर प्रयोग को लेकर चेतावनी
23 जून 2026 शान्ति और सुरक्षा
संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार कार्यालय (OHCHR) ने कहा है कि सूडान में अप्रैल 2023 में युद्ध शुरू होने के बाद से, युद्ध से जुड़ी यौन हिंसा व्यापक और बेहद क्रूर रूप धारण कर चुकी है, जिसके पीड़ितों, उनके परिवारों और समुदायों पर गहरे व दीर्घकालिक प्रभाव पड़ रहे हैं.
रिपोर्ट के अनुसार, सूडान में युद्ध की शुरुआत से इस वर्ष अप्रैल मध्य तक 18 में से 16 प्रान्तों में यौन हिंसा की 546 घटनाओं की पुष्टि की गई है. इनमें कम से कम 838 लोग प्रभावित हुए, जिनमें 15 को छोड़कर सभी महिलाएँ और लड़कियाँ थीं.
हालाँकि, रिपोर्ट में कहा गया है कि ये आँकड़े वास्तविक स्थिति का केवल एक छोटा हिस्सा हैं.
रिपोर्ट में पाया गया कि यौन हिंसा, युद्ध और विस्थापन के साथ-साथ फैली है और नागरिकों को भयभीत व मानसिक रूप से आहत करने के लिए लगातार इसका इस्तेमाल किया गया है.
यौन हिंसा का हथियार के रूप में इस्तेमाल
यूएन मानवाधिकार उच्चायुक्त वोल्कर टर्क ने मंगलवार को जारी एक रिपोर्ट में कहा है कि निष्कर्ष उनकी उस चेतावनी की पुष्टि करते हैं कि सूडान में यौन हिंसा का उपयोग युद्ध के हथियार के रूप में किया जा रहा है.
उन्होंने कहा कि यह एक युद्ध अपराध है और यदि इसे व्यापक या व्यवस्थित हमलों के हिस्से के रूप में अंजाम दिया गया हो, तो यह मानवता के विरुद्ध अपराध की श्रेणी में भी आ सकता है.
रिपोर्ट में विशेष रूप से दारफ़ूर क्षेत्र का उल्लेख करते हुए कहा गया है कि वहाँ नागरिक आबादी के विरुद्ध व्यापक और व्यवस्थित हमलों के दौरान किए गए कुछ यौन हिंसा के कृत्य मानवता के विरुद्ध अपराध माने जा सकते हैं.
यौन हिंसा की अधिकांश पुष्टि की गई घटनाओं के लिए त्वरित सहयोग बल (RSF), उससे जुड़े लड़ाके और अरब मिलिशिया ज़िम्मेदार पाए गए.
कुछ मामलों में सूडानी सशस्त्र बलों और अन्य सशस्त्र समूहों का भी नाम सामने आया है.
सामूहिक बलात्कार के मामले
रिपोर्ट में बलात्कार, सामूहिक बलात्कार, यौन दासता, जबरन विवाह, जबरन वेश्यावृत्ति, यौन यातना और यौन शोषण के लिए मानव तस्करी जैसी गम्भीर घटनाओं को दर्ज की गई है. लगभग एक-चौथाई मामलों में सामूहिक बलात्कार शामिल था.
इसके अलावा, नागरिकों की आवाजाही नियंत्रित करने, अपहरण, हिरासत और यौन दासता के लिए यौन हिंसा के इस्तेमाल का लगातार चलन भी दर्ज किया गया है.
यूएन मानवाधिकार कार्यालय ने कम से कम 85 महिलाओं और लड़कियों के ऐसे मामले दर्ज किए हैं, जिन्हें यौन दासता में रखकर घरेलू काम करने या आय अर्जित करने के लिए मजबूर किया गया.
बच्चों के साथ यौन हिंसा का मामला
रिपोर्ट के अनुसार, यौन हिंसा के पीड़ितों में बच्चे भी शामिल हैं और सबसे कम उम्र की पीड़िता केवल 9 वर्ष की थी.
साथ ही, कम से कम 13 पीड़ितों की मृत्यु हुई, जिनमें अधिकांश सामूहिक बलात्कार की घटनाओं के बाद जान से हाथ धो बैठे.
अनेक पीड़ितों को, स्वास्थ्य सेवाओं के अभाव के कारण, गम्भीर चिकित्सीय जटिलताओं का सामना करना पड़ा, जबकि कम से कम 59 महिलाएँ और लड़कियाँ बलात्कार के बाद गर्भवती हुईं या उन्होंने बच्चों को जन्म दिया.
रिपोर्ट में यह भी पाया गया कि यौन हिंसा का इस्तेमाल कथित राजनैतिक या जातीय पहचान के आधार पर प्रतिशोध लेने के लिए किया गया.
पश्चिमी दारफ़ूर के मसालित समुदाय के अनेक पीड़ितों ने बताया कि हमलावर, बलात्कार करने से पहले उनकी जातीय पहचान पूछते थे.
मानवाधिकार प्रमुख ने इन घटनाओं की स्वतंत्र और निष्पक्ष जाँच कराने तथा सभी दोषियों को जवाबदेह ठहराने की अपील की है.
उन्होंने कहा कि दंडमुक्ति का माहौल हिंसा और मानवाधिकार उल्लंघनों के चक्र को और गहरा कर रहा है.
FAQs
सूडान में यौन हिंसा पर संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट क्या कहती है?
संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार कार्यालय के अनुसार अप्रैल 2023 से अप्रैल 2026 तक सूडान के 16 प्रांतों में यौन हिंसा की 546 घटनाओं की पुष्टि हुई है।
सूडान युद्ध में यौन हिंसा के लिए किसे जिम्मेदार ठहराया गया है?
रिपोर्ट के अनुसार अधिकांश मामलों के लिए त्वरित सहयोग बल (RSF), उससे जुड़े लड़ाके और अरब मिलिशिया जिम्मेदार पाए गए हैं।
क्या संयुक्त राष्ट्र ने इसे युद्ध अपराध माना है?
हाँ। संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त वोल्कर टर्क ने कहा है कि यौन हिंसा का हथियार के रूप में इस्तेमाल युद्ध अपराध है और कुछ मामलों में यह मानवता के विरुद्ध अपराध भी हो सकता है।
क्या बच्चों को भी निशाना बनाया गया?
हाँ। रिपोर्ट में सबसे कम उम्र की पीड़िता 9 वर्ष की बच्ची बताई गई है।
दारफ़ूर क्षेत्र का उल्लेख क्यों महत्वपूर्ण है?
रिपोर्ट के अनुसार दारफ़ूर में नागरिक आबादी पर व्यापक और व्यवस्थित हमलों के दौरान यौन हिंसा के कई मामले सामने आए हैं, जिन्हें मानवता के विरुद्ध अपराध माना जा सकता है।


