हस्तक्षेप - Page 86
‘जीते जी इलाहाबाद’ : जहां जमुना के छलिया जल जैसे इलाहाबाद के सत्य से आँखें दो-चार होती हैं !
‘जीते जी इलाहाबाद’ : जहां जमुना के छलिया जल जैसे इलाहाबाद के सत्य से आँखें दो-चार होती हैं !
हर पल चलती फिरती लाशों से टकरा रहे हैं, यह संवादहीनता का दौर है
हर पल चलती फिरती लाशों से टकरा रहे हैं, यह संवादहीनता का दौर है













