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जो कहीं भी नहीं छ्प सके, छाप रे ! - अशोक चक्रधर
साहित्यिक कलरव

जो कहीं भी नहीं छ्प सके, छाप रे ! - अशोक चक्रधर

दिल्ली के गुलमोहर सेंटर में 15 दिसम्बर 2023 को आयोजित कवि-सम्मेलन में अशोक चक्रधर सहित कई कवियों ने अपनी रचनाओं से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध किया

Baba Nagarjuna
स्तंभ

नागार्जुन : प्रतिवादी लोकतंत्र की प्राणवायु में जीने वाला हिंदी का लेखक

लोकतंत्र के बिंदास कवि बाबा नागार्जुन ने कविता को राजनीति, समाज और जनसंघर्षों से जोड़कर नया अर्थ दिया। जानिए कैसे नागार्जुन की रचनाएँ नवउदारीकरण,...

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