फिलिस्तीन पर शोध और पुस्तक लेखन के लिए विनीत तिवारी को प्रतिष्ठित 'शंकर ब्रह्मे समाज विज्ञान ग्रंथालय' फेलोशिप

तीन महीने की रिसर्च फेलोशिप के तहत फिलिस्तीन पर हिंदी, अंग्रेजी और मराठी में प्रकाशित होगी शोधपरक पुस्तक

पुणे / दिल्ली, 26 जून 2026. पुणे के प्रतिष्ठित संस्थान 'शंकर ब्रह्मे समाज विज्ञान ग्रंथालय' ने वर्ष 2026 के लिए अपनी विशेष रिसर्च एवं बुक-राइटिंग फेलोशिप की घोषणा की है। इस वर्ष यह फेलोशिप लेखक, कवि और सामाजिक कार्यकर्ता विनीत तिवारी को प्रदान की जा रही है। इस फेलोशिप के तहत वे फिलिस्तीन के समकालीन विषयों पर एक विस्तृत शोधपरक पुस्तक का लेखन करेंगे।

न्यायपूर्ण विश्व के लिए प्रतिबद्धता का सम्मान

ग्रंथालय द्वारा जारी आधिकारिक पत्र में विनीत तिवारी के योगदान की सराहना करते हुए कहा गया है, "एक न्यायपूर्ण और शांतिपूर्ण विश्व व्यवस्था के प्रति आपकी अटूट प्रतिबद्धता ने फिलिस्तीन पर सार्वजनिक विमर्श को समृद्ध करने में महत्त्वपूर्ण योगदान दिया है। आपके कार्यों ने भारत के समकालीन लेखकों और कार्यकर्ताओं को गहराई से प्रेरित किया है।"

यह फेलोशिप 01 अगस्त 2026 से शुरू होकर तीन महीने की अवधि के लिए होगी। इस फेलोशिप के अंतर्गत लिखी जाने वाली पुस्तक को ग्रंथालय द्वारा हिंदी, अंग्रेजी और मराठी—तीन भाषाओं में प्रकाशित किया जाएगा।

विनीत तिवारी का सक्रिय योगदान

मूल रूप से शिवपुरी (मध्य प्रदेश) के रहने वाले, और वर्तमान में दिल्ली व इंदौर को आधार बनाकर कार्य करने वाले विनीत तिवारी पिछले तीन दशकों से जन आंदोलनों और मानवाधिकारों के मुद्दों पर, और दो दशकों से देश में फिलिस्तीन एकजुटता अभियान में लगातार सक्रिय हैं। पेशे से सिविल इंजीनियर रह चुके विनीत तिवारी ने बाद में पत्रकारिता, कविता और नाट्य-लेखन को अपना माध्यम बनाया।

वे इंदौर स्थित संदर्भ केन्द्र के संस्थापक सदस्य हैं और फिलहाल दिल्ली के 'जोशी-अधिकारी इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल स्टडीज' से संबद्ध हैं। वे 'प्रगतिशील लेखक संघ' और अखिल भारतीय शांति एवं एकजुटता संगठन (एप्सो) के राष्ट्रीय सचिव मण्डल के सदस्य भी हैं। वे 'इंडो-फिलिस्तीन सॉलिडैरिटी नेटवर्क' से केन्द्रीय स्तर पर जुड़े हैं और भारतीय जन नाट्य संघ (इप्टा) की राष्ट्रीय कोर टीम के सदस्य हैं। विनीत तिवारी ने नवंबर 2025 में फिलिस्तीन के वेस्ट बैंक क्षेत्र का जमीनी दौरा भी किया था।

संस्थान की पृष्ठभूमि

पुणे स्थित 'शंकर ब्रह्मे समाज विज्ञान ग्रंथालय' देश का एक अत्यंत प्रतिष्ठित और प्रगतिशील संस्थान है। इसकी स्थापना देश के विख्यात प्रगतिशील विचारक और वास्तुकार (आर्किटेक्ट) शंकर ब्रह्मे की स्मृति में की गई थी, जिन्होंने पुणे विश्वविद्यालय का ऐतिहासिक डिज़ाइन तैयार किया था। वर्ष 1969 में उनके असामयिक निधन के बाद, उनकी पत्नी और प्रख्यात मार्क्सवादी अर्थशास्त्री डॉ. सुलभा ब्रह्मे ने इस वैचारिक व शोध संस्थान की नींव रखी थी।

यह संस्थान केवल एक पुस्तकालय तक सीमित न रहकर जनसरोकारों, मानवाधिकारों और सामाजिक चेतना के मुद्दों पर लगातार व्याख्यानों का आयोजन, शोध दस्तावेजों का प्रकाशन और जागरूकता अभियान चलाता है। संस्थान अब तक परमाणु ऊर्जा, कश्मीर, गुजरात, सांप्रदायिकता, युद्ध और साम्राज्यवाद जैसे गंभीर विषयों पर 70 से अधिक महत्त्वपूर्ण पुस्तकें प्रकाशित कर चुका है।