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सुलह की कोशिशों में रात भर इक चाँद भटकता है.....
सुलह की कोशिशों में रात भर इक चाँद भटकता है.....
मेरे शहर की/ तरक़्क़ी का यह मंज़र/ किसके हिस्से में आता है
मेरे शहर की/ तरक़्क़ी का यह मंज़र/ किसके हिस्से में आता है
सुलह की कोशिशों में रात भर इक चाँद भटकता है.....
मेरे शहर की/ तरक़्क़ी का यह मंज़र/ किसके हिस्से में आता है