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Anand Das
साहित्यिक कलरव

एक दलित : अब मैं कोई जश्न नहीं मनाता हूँ

दलित उपलब्धियों के जश्न और वास्तविक पीड़ा के बीच का अंतर उजागर करती आनंद दास की प्रभावशाली कविता—एक गहरा सामाजिक दस्तावेज़।

भारतीय साहित्य में जातीय सांस्कृतिक चेतना
आपकी नज़र

भारतीय साहित्य में जातीय सांस्कृतिक चेतना

आपकी नज़र | स्तंभ | हस्तक्षेप नवजागरण के प्रभावस्वरूप राष्ट्रवाद और सांस्कृतिक पुनरुस्थानवाद का उदय हुआ, उसे समूचे भारतीय साहित्य में देखा जा सकता है।...

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