धन कटौती और कमजोर होती वैश्विक स्वास्थ्य प्रणाली

  • महामारी, एंटीबायोटिक प्रतिरोध और बढ़ते ख़तरे
  • अरबों लोग अब भी बुनियादी स्वास्थ्य सेवाओं से वंचित
  • स्वास्थ्य कर्मियों की वैश्विक कमी: 2030 की चुनौती
  • WHO का बजट संकट और सदस्य देशों की भूमिका

महामारी समझौता और अंतरराष्ट्रीय सहयोग की ज़रूरत

नई दिल्ली, 3 फरवरी 2026. विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने चेतावनी दी है कि अंतरराष्ट्रीय सहायता में भारी कटौती और वित्तीय समर्थन की निरंतर कमी के कारण वैश्विक स्वास्थ्य प्रणाली गंभीर दबाव में है। यह संकट ऐसे समय में उभर रहा है जब दुनिया महामारी के बाद के दौर, दवाओं के प्रति बढ़ते प्रतिरोधी संक्रमणों और जलवायु परिवर्तन से जुड़े स्वास्थ्य जोखिमों का सामना कर रही है।

WHO के महानिदेशक डॉ. टैड्रॉस ऐडहेनॉम घेबरेयेसस (WHO Director-General Dr. Tedros Adhanom Ghebreyesus) के अनुसार, वर्ष 2025 संगठन के इतिहास के सबसे कठिन वर्षों में से एक रहा है। वित्तीय संकट के चलते WHO को अपने कार्यबल में कटौती करनी पड़ी, जिसका सीधा असर निम्न और मध्यम आय वाले देशों में आवश्यक स्वास्थ्य सेवाओं पर पड़ा है।

संयुक्त राष्ट्र स्वास्थ्य एजेंसी के आँकड़े बताते हैं कि आज भी 4.6 अरब लोग बुनियादी स्वास्थ्य सेवाओं से वंचित हैं और 2.1 अरब लोग स्वास्थ्य पर होने वाले ख़र्चों के कारण वित्तीय संकट में फँस रहे हैं। ऐसे में WHO का कहना है कि यदि वैश्विक एकजुटता और स्थायी वित्त पोषण सुनिश्चित नहीं किया गया, तो दुनिया अगली स्वास्थ्य आपदा के लिए पहले से भी कम तैयार होगी।

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भीषण धन कटौती से लड़खड़ा रही है वैश्विक स्वास्थ्य प्रणाली - WHO

स्वास्थ्य

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने चेतावनी दी है कि अन्तरराष्ट्रीय सहायता में हुई कटौती और वित्तीय समर्थन की निरन्तर क़िल्लत से वैश्विक स्वास्थ्य प्रणाली कमज़ोर होती जा रही है.

WHO के महानिदेशक डॉक्टर टैड्रॉस ऐडहेनॉम घेबरेयेसस ने सोमवार को कहा कि यह स्थिति और भी गम्भीर है, क्योंकि महामारी, दवाओं के प्रति प्रतिरोधी संक्रमण और स्वास्थ्य सेवाओं के नाज़ुक होने का ख़तरा लगातार बढ़ रहा है.

डॉक्टर टैड्रॉस ने जिनीवा में WHO की कार्यकारी बोर्ड की बैठक को सम्बोधित करते हुए बताया कि बीते वर्ष वित्तीय सहायता में भारी कटौती के कारण, स्वास्थ्य संगठन को अपने कार्यबल में कमी करनी पड़ी, जिसके गम्भीर और दूरगामी प्रभाव हुए हैं.

यूएन स्वास्थ्य एजेंसी ने आगाह किया है कि द्विपक्षीय सहायता में अचानक, बड़े पैमाने पर हुई कटौती ने, अनेक देशों में स्वास्थ्य प्रणालियों और सेवाओं के सामने चुनौतियाँ खड़ी कर दी हैं.

डॉक्टर टैड्रॉस ने वर्ष 2025 को विश्व स्वास्थ्य संगठन के इतिहास में “सबसे कठिन वर्षों में से एक” क़रार दिया.

उन्होंने कहा कि WHO का जीवनरक्षक कार्य जारी है, लेकिन वित्तीय संकट ने वैश्विक स्वास्थ्य संचालन में मौजूदा कमज़ोरियों को उजागर किया है, विशेष रूप से उन निम्न और मध्यम आय वाले देशों में, जो आवश्यक स्वास्थ्य सेवाओं को बनाए रखने के लिए संघर्ष कर रहे हैं.

अरबों लोगों का जीवन प्रभावित

डॉक्टर टैड्रॉस के मुताबिक़, WHO में वित्तीय संकट अन्तरराष्ट्रीय स्वास्थ्य के लिए वित्तीय समर्थन में व्यापक कमी का हिस्सा है, जिससे देशों को कठिन निर्णय लेने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है.

उन्होंने बताया कि वित्तीय कटौतियों की प्रतिक्रिया में WHO, अनेक देशों को आवश्यक स्वास्थ्य सेवाओं को बनाए रखने और सहायता पर निर्भरता से आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ने में सहयोग दे रहा है.

इसके लिए तम्बाकू, शराब और शुगरयुक्त पेय पदार्थों पर स्वास्थ्य ‘कर’ बढ़ाने समेत घरेलू संसाधन जुटाने पर ज़ोर दिया जा रहा है. हालाँकि, विशाल ज़रूरतें अब भी पूरी होती हुई नहीं दिखाई दे रही हैं.

यूएन स्वास्थ्य एजेंसी के अनुसार, आज भी 4.6 अरब लोग आवश्यक स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुँच से वंचित हैं, जबकि 2.1 अरब लोग स्वास्थ्य पर होने वाले ख़र्चों के कारण वित्तीय कठिनाइयों का सामना कर रहे हैं. इसके साथ ही दुनिया भर में, 2030 तक 1.1 करोड़ स्वास्थ्य कर्मियों की कमी का भी अनुमान है, जिसमें से आधी से अधिक संख्या केवल नर्स की हैं.

गम्भीर संकट टला, मगर…

WHO महानिदेशक ने कहा कि यूएन एजेंसी एक और गहरे वित्तीय झटके से केवल इसलिए बच पाई है क्योंकि सदस्य देशों ने अनिवार्य योगदान बढ़ाने पर सहमति दी थी, जिससे WHO की स्वैच्छिक और लक्षित वित्तीय निर्भरता कम हुई.

उन्होंने बोर्ड को बताया, “यदि आपने अनिवार्य योगदान बढ़ाने को मंज़ूरी नहीं दी होती, तो हमारी स्थिति वर्तमान से कहीं अधिक गम्भीर होती.” इन सुधारों के परिणामस्वरूप, WHO ने वर्ष 2026-27 में अपने मूल बजट के लिए आवश्यक संसाधनों का लगभग 85 प्रतिशत जुटा लिया है.

लेकिन, उन्होंने चेतावनी दी कि शेष वित्त पोषण जुटाना मुश्किल होगा, ख़ासकर वैश्विक वित्तीय परिस्थितियों को देखते हुए.

उन्होंने चेतावनी दी कि आपात तैयारी, दवाओं के प्रति प्रतिरोध और जलवायु परिवर्तन के प्रति सुदृढ़ता जैसे क्षेत्रों में गम्भीर कमी बनी हुई है, जिससे ये प्राथमिकताएँ जोखिम में हैं और आवश्यक संसाधन उपलब्ध नहीं हो पा रहे हैं.

एकता में बल

WHO के अनुसार, वित्तीय चुनौतियों के बावजूद हाल के महीनों में महत्वपूर्ण प्रगति हुई है. महानिदेशक टैड्रॉस ने पिछले वर्ष अपनाई गई महामारी समझौते और संशोधित अन्तरराष्ट्रीय स्वास्थ्य नियमों (IHR) का ज़िक्र किया, जिनका उद्देश्य कोविड‑19 के बाद तैयारी को मज़बूत करना है.

WHO ने, रोग निगरानी का दायरा बढ़ाया है, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) आधारित महामारी बुद्धिमत्ता प्रणालियाँ लागू कीं हैं, और 2025 में सैकड़ों स्वास्थ्य आपात स्थितियों का समर्थन किया है.

हालाँकि, डॉक्टर टैड्रॉस ने चेतावनी दी कि विश्व भर में हर 6 में से 1 बैक्टीरियल संक्रमण अब एंटीबायोटिक्स के प्रति प्रतिरोधी हो गया है, और यह प्रवृत्ति कुछ क्षेत्रों में तेज़ी से बढ़ रही है.

उन्होंने कहा, “महामारी ने हमें अनेक सबक सिखाए…ख़ासकर यह कि वैश्विक ख़तरे से निपटने के लिए वैश्विक प्रतिक्रियाकी आवश्यकता होती है. एकता ही सबसे अच्छी सुरक्षा है.”

उन्होंने चेतावनी दी कि यदि वित्तीय संसाधन पूर्वानुमानित और पर्याप्त नहीं रहे, तो दुनिया अगले स्वास्थ्य संकट के लिए कम तैयार हो सकती है. “यह आपका WHO है. इसकी शक्ति आपकी एकता में है. इसका भविष्य आपका चुनाव है.”