अंग्रेजों के चाटुकारों से आज़ादी बचाने के लिये अंतिम सांस तक लड़ाई लड़ी जाएगी

हिंदुस्तान की आज़ादी की लड़ाई हमारे पुरखों ने लड़ी थी, उसी आज़ादी को अंग्रेजों के चाटुकारों से बचाने के लिये जरूरत हुई तो फिर अंतिम सांस तक लड़ाई लड़ी जाएगी।

पीयूष रंजन यादव

2 मई, 1979 The Statesman अखबार के पहले पन्ने पर संजय गांधी की अधंनगी तस्वीर छपी थी जिसमें उनकी पीठ पर और कमर पर लाठियों की चोट के निशान साफ नजर आ रहे थे।

जिस समय दिल्ली पुलिस की कस्टडी में संजय गांधी जी को मारा जा रहा था उस समय तत्कालीन दो सांसद एम. अरुणाचलम और के.रामलिंगम ने दिल्ली पुलिस के डिप्टी कमिश्नर पी.एस. बरार को चीखते हुए सुना था, "देखो मैं तुम्हें कैसे लीडर बनाता हूँ।"

इससे पहले 3 अक्टूबर, 1977 की शाम को सीबीआई के तत्कालीन एसपी एन.के सिंह जब 12 विलिंगटन क्रिसेंट पहुंचे, तो वहां निवास कर रही इंदिरा गांधी जी ने जोर देकर कहा था, "मुझे गिरफ्तार कर हथकड़ी लगाओ"।

इमरजेंसी के बाद जनता पार्टी की मोरारजी भाई देसाई की सरकार ने कांग्रेस और उसके नेतृत्व को मटियामेट करने के लिये जांच के नाम पर फंसाने के लिये शाह कमीशन बैठाया था और विशेष अदालतों के गठन कर इंदिरा गांधी जी को तीन बार तिहाड़ जेल भेजा और संजय गांधी को 12 बार तिहाड़, देहरादून और बरेली की जेलों में बंद किया। यह केवल कांग्रेस और उसके नेतृत्व को खत्म करने का प्रयास था जिसे हिंदुस्तान की जनता ने 1980 में पुनः कांग्रेस को सत्ता सौप कर इंदिरा गांधी जी को प्रधानमंत्री बनाकर विफल कर दिया।

वर्तमान मदान्ध सरकार का फिर से वही मंसूबा नजर आ रहा है। जनता में पोल खुल चुकी है लेकिन सत्ता में बने रहने की ललक अब इन्हें अत्याचारी बनने पर विवश कर रही है।

कमजोर दिल के कांग्रेसियों अभी से अपना ठिकाना खोज लें। कांग्रेस और उसके नेतृत्व पर होने वाले हर हमले का विरोध प्रजातांत्रिक तरीके से खून की आखरी बूंद रहने तक किया जाएगा। हिंदुस्तान की आज़ादी की लड़ाई हमारे पुरखों ने लड़ी थी, उसी आज़ादी को अंग्रेजों के चाटुकारों से बचाने के लिये जरूरत हुई तो फिर अंतिम सांस तक लड़ाई लड़ी जाएगी।

(लेखक उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के पूर्व सदस्य व भीमनगर जिला कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष हैं)

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