अखिलेन्द्र के उपवास को भारत सरकार के पूर्व वित्त सचिव का समर्थन
अखिलेन्द्र के उपवास को भारत सरकार के पूर्व वित्त सचिव का समर्थन
उपवास जनता के मुद्दों को राजनीति के केन्द्र में लायेगा- एसपी शुक्ला
नई दिल्ली, 4 फरवरी 2014, भारत सरकार के पूर्व वित्त व वाणिज्य सचिव और योजना आयोग के पूर्व सदस्य एस पी शुक्ला और आल इण्डिया पीपुल्स फ्रंट (आइपीएफ) की राष्ट्रीय अध्यक्ष डा0 सुलभ ब्रहमे ने आज प्रेस बयान जारी करके 07 फरवरी 2014 से आइपीएफ के राष्ट्रीय संयोजक अखिलेन्द्र प्रताप सिंह द्वारा जंतर-मंतर पर किए जा रहे दस दिवसीय उपवास का समर्थन किया है।
अपने एकजुटता पत्र में उन्होंने कहा है कि देश की राजनीति आज जैसी कीचड़भरी कभी नहीं थी। सत्ताधारी गठबंधन एक ऐसी चीज की रक्षा करने में लगा है जिसकी रक्षा करना सम्भव ही नहीं है। मुख्य विपक्ष एक ऐसे आदमी के प्रचारतंत्र में पतित हो गया है जिसका रक्तरंजित अतीत कभी उसका पीछा नहीं छोड़ेगा। दोनों एक दूसरे पर घोटालों और साम्प्रदायिक दंगों का आरोप लगा रहे है। लेकिन दोनों नवउदारवादी नीतियों पर एकमत है। क्षेत्रीय दल अवसरवादी राजनीति में लिप्त हैं। हाल फिलहाल जिस परिघटना को लेकर मीडिया में जबर्दस्त चर्चा है और जिसने विशेषकर समाज के उर्ध्वगामी गतिशील तबके में भारी आकर्षण पैदा किया है, उसके पास न कोई विचारधारा है न ही सिद्धांत है और वह प्रतीकों और लक्षणों की सस्ती राजनीति करने में लगी है। कुल मिलाकर, राजनीतिक शून्य हर तरह के बहते और फेंके माल के कचरे को आकर्षित कर रहा है।
आज समय की मांग है कि जनता के मुद्दों को केन्द्र में लाया जाए तथा राजनीति के नाम पर आज जो हो रहा है उसके खोखलेपन को बेनकाब किया जाए। आइपीएफ ने बिलकुल सही तौर पर जमीन व किसान, अल्पसंख्यकों में बढ़ती असुरक्षा व अलग-थलग पड़ने की भावना, युवाओं की बढ़ती बेरोजगारी और हताशा, महंगाई का असहनीय बोझ, महिलाओं के खिलाफ बढ़ते अपराध तथा कानून के राज के आमतौर पर ध्वंस जैसे मुद्दों पर केन्द्रित किया है। जन-राजनीति को इन मुद्दों पर केन्द्रित करना होगा तथा एक रैडिकल और समावेशी एजेंडा के आधार पर सभी प्रगतिशील एवं लोकतांत्रिक ताकतों को एक मंच पर लाना होगा। ऐसी रैडिकल राजनीति से कम कोई चीज नव उदारवाद, अवसरवाद तथा अल्पकालिकतावाद की राजनीति का न तो मुकाबला कर सकती है न ही उसे शिकस्त दे सकती है।
उपवास की सफलता के लिए हार्दिक शुभकमानाएं देते हुए उन्होंने उम्मीद जतायी कि यह आंदोलन सामान विचार वाले राजनीतिक दलों, संगठनों तथा कार्यकर्ताओं के साथ सलाह-मशविरे के आधार पर राजनीतिक रणनीति पर विचार- विमर्श एवं उसे सूत्रबद्ध करने का मंच मुहैया कराएगा।


