अखिलेशजी, ये अमेठी, जहां 11 लोगों के कत्ल हुए आपके यूपी में ही है #कामबोलताहै
अखिलेशजी, ये अमेठी, जहां 11 लोगों के कत्ल हुए आपके यूपी में ही है #कामबोलताहै
अखिलेशजी, ये अमेठी, जहां 11 लोगों के कत्ल हुए आपके यूपी में ही है #कामबोलताहै
मेहदी हसन ऐनी क़ासमी
अमेठी जो कभी हमारा ज़िला भी था, आज हमारा पड़ोस भी है, वहां 11 लोगों की दर्दनाक मौत का वाक़िया, जो कुछ समझ में आया वह बहुत ही तकलीफ़ देह है।
देश के सबसे बड़े राजघराने के नेता राहुल गांधी के अपने संसदीय क्षेत्र और कपड़ा मंत्री स्मृति ईरानी के चुनावी इलाक़े में कोई ऐसा ग़रीब कुनबा भी रहता था, जिसका मुखिया जमालुद्दीन जो एक मुसलमान भी था, उसे ये भी पता था कि हत्या और खुदकुशी हराम है, लेकिन स्थानीय पुलिस और मीडिया ने इस पूरे प्रकरण का ज़िम्मेदार परिवार के मुखिया जमालुद्दीन को ठहराया है।
इस घटना ने देश-प्रदेश की व्यवस्था, सिस्टम की संवेदनशीलता, नेताओं के अपने क्षेत्रवासियों के प्रति सहानाभूति और उनके प्रति ज़िम्मेदारी के एहसास जैसी चीज़ों को झूठा साबित कर दिया।
आज पूरा अमेठी ही नही पूरा देश शर्मसार और सोगवार है।
हर किसी के मन में सिस्टम की हार का ग़म है।
ऐसे लाखों कुनबे इस देश में हैं जिनको मौत के घाट उतार दिया जाता है, और फिर उसे खुदकुशी बता कर फाईल बंद कर दी जाती है।
उत्तर प्रदेश के अमेठी में दिल दहला देने वाली ये घटना बुधवार को घटी, एक ही परिवार के 11 लोगों की धारदार हथियार से काटकर हत्या कर दी गई। मरने वालों में 6 बच्चे हैं।
घर के मुखिया की लाश फंदे पर लटकी मिली।
इस हादसे से हड़कंप मच गया है। घटना की वजह का अभी तक पता नहीं चल पाया है।
इलाके में इससे बड़ी घटना पहले कभी नहीं हुई। इस घटना के बाद ग्रामीणों में हड़कंप मचा हुआ है।
मीडिया के मुताबिक़ कई ग्रामीणों का मानना है कि परिवार के मुखिया ने सभी को नशीला पदार्थ खिलाकर गला रेत दी और फिर बाद में खुद फांसी लगा ली।
45 वर्षीय जमालुद्दीन बैटरी काम करता था। मरने वालों में उसके दो भाई और बाकी बच्चे हैं।
लेकिन इस पूरे घटनाक्रम में स्थानीय पुलिस और मीडिया के रवैये पर बहुत सारे सवालात जन्म ले रहे हैं, क्योंकि पुलिस पहुंचती है और हत्या के कारणों का पता लगाने का काम शुरु होता है, लेकिन जब पुलिस नाकाम साबित हो रही है तो परिवार के 11 लोगों के क़त्ल का इलज़ाम परिवार के मुख्या जमालुद्दीन पर डाला जा रहा है।
जबकि घटना की तस्वीरें कुछ और ही बयान करती हैं।
ऐसा लगता है कि जमालुद्दीन फंदे पर लटका नहीं उसे मार कर लटकाया गया है।
ऐसा इस लिये लगता है
क्योंकि जमालुद्दीन की लाश के पैर से चप्पल तक नहीं गिरी, हालाकि फाँसी के फंदे पर लटकने वाला छटपटाता है।
सिलेण्डर दूर रखा हुआ है जब कि फंदे पर लटकने वाला कुर्सी/सिलेंडर या अन्य किसी वस्तु का सहारा लेकर गले में फंदा डाल कर पैर की ठोकर से सिलेंडर या कुर्सी को गिराता है, लेकिन यहाँ पर सिलेंडर थोड़ी दूरी पर देखा जाता है और सिलेंडर फर्श पर गिरता भी नहीं?
और तो और क्या ऐसा हो सकता है 11 लोगों का बेरहमी के साथ तेज़ धार से गला रेत दिया जाए और क़ातिल के कपड़े और हाथ पर खून का एक भी छींट ना मिले??
मारे जाने वालों में जमालुद्दीन के दो भाई भी हैं, जमालुद्दीन की सेहत देख कर ये बिल्कुल भी नहीं लगता कि उसने अपने भाईयों पर हमला किया होगा, और उन्होंने बचाव की कोशिश ना की होगी.?
घटनास्थल पर कोई भी ऐसा तथ्य नहीं दिख रहा है जिससे ये लगे कि जमाल ने इतने लोगों की हत्या की है.और उन 11 में से किसी ने भी खुद को बचाने की कोशिश की हो?
घटनाक्रम में गंभीर रूप से घायल होकर बेहोश होने वाली जमालुद्दीन की बीवी ज़ाहिदा ने भी अपने पति पर ही इल्ज़ाम लगाया है. लेकिन सवाल ये है कि जिस वक्त जमाल 10 लोगों का गला रेत रहा था तो क्या ज़ाहिदा को इतना भी होश ना था कि वो अपने पड़ोसियों को ख़बरदार करतीं, ?
जमालुद्दीन का घर घनी आबादी में था, क्या 11 लोगों की चीख़ें भी पड़ोसियों के कानों तक नहीं पहुंची.
अगर गांव वालों ने क़ातिल जमालुद्दीन को ही बताया था तो फिर मीडिया वालों की गाड़ी को क्यों जलाया गया?
इस तरह के बहुत सारे सवाल हैं जो इस वाक़ये को खुदकुशी के बजाये निर्मम व पूर्ण रूप से साज़िश करके हत्या की घटना साबित करते हैं।
पुलिस प्रशाशन तो पूरी तरह खून का इल्जाम जमालुद्दीन के सर पर डाल कर फाईल को बंद करने की कोशिश में है, मीडिया भी वही दिखा रहा है जो उन्हें प्रशासन बता रहा है..
इस निर्मम व झकझोर देने वाले वाक़ये का सच क्या है?
वो कौन लोग हैं जो अपनी सियासत चमकाने के लिये ग़रीबों की लाशों पर खेल सजा रहे हैं।
ये सब तो जांच के बाद ही सामने आयेगा।
मुख्यमंत्री अखिलेश यादव इस घटना को किस नज़र से देखते हैं?
जिस लॉ एंड आर्डर को सामने रख कर वो अपने बाप से लड़ जाते हैं, क्या वही लॉ एंड आर्डर का एहसास उन्हें इस पूरे हत्याकांड की जांच सी.बी.आई से कराने पर उभारेगा?
अमेठी सासंद राहुल गांधी अपने क्षेत्र में हुये इस शर्मनाक व दर्दनाक वाक़ये पर क्या कुछ करेंगें?
स्मृति ईरानी जिन्हें अमेठी वासियों से बड़ा प्यार है, और वो हारने के बावजूद बार-बार यहां आती हैं, और कहती हैं कि वो यहां के लोगों का दर्द साझा करने आती हैं, वो क्या इस दर्द का एहसास कर पायेंगी?
ये तो वक़्त ही बतायेगा लेकिन आज 11 लोगों के जनाज़ों को एक साथ कांधा देने वालों के दिल से इस दर्द की टीसें कभी ख़त्म नहीं होंगी.
✍?मेहदी हसन ऐनी के क़लम से✍?


