अजीत दुबे भोजपुरी समाज के पुनः अध्यक्ष निर्वाचित
अजीत दुबे भोजपुरी समाज के पुनः अध्यक्ष निर्वाचित
नई दिल्ली, 31 जुलाई 2011 को आयोजित एक बैठक में भोजपुरी समाज दिल्ली के केन्द्रीय नेतृत्व की कार्यकारिणी एवं 51 शाखाओं के अध्यक्षों की उपस्थिति में संगठन का चुनाव सर्वसम्मति से सम्पन्न हुआ । श्री अजीत दुबे को पुनः सर्वसम्मति से समाज का अध्यक्ष चुना गया । सर्वश्री प्रभुनाथ पाण्डेय, गरीब दास एवं के0 राम को समाज का वरिष्ठ उपाध्यक्ष तथा श्री एल0 एस0 प्रसाद को महामंत्री चुना गया ।
इस सभा में कांग्रेस के पूर्वांचल प्रकोष्ठ के अध्यक्ष श्री शिवाराम पाण्डेय तथा एल्डरमैन, एम सी डी श्री गोस्वामी पुरी एवं पूर्वांचल प्रकोष्ठ, भाजपा के अध्यक्ष श्री अभय वर्मा को भी आमंत्रित किया गया और उनसे निवेदन किया गया कि आने वाले एम सी डी चुनावों में पूर्वांचल को भी समुचित प्रतिनिधित्व दिया जाए ।
समाज के बैठक में सर्वसम्मति से निम्नलिखित प्रस्ताव पास किए गए:
1. भोजपुरी को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल किया जाए:
यू0पी0ए0 कैबिनेट द्वारा भोजपुरी को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल किए जाने का सैद्धांतिक रूप से मन बना लेने के आशय की प्रतिबद्धता संसद के पटल पर रखने तथा भारत सरकार द्वारा गठित सीताकांत महापात्र समिति की रिपोर्ट में भी भोजपुरी को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल किए जाने की सिफारिेश किए जाने तथा 14 जून 2011 को मारिशस में भोजपुरी को संवैधानिक दर्जा प्रदान कर दिए जाने के बावजूद भी भोजपुरी को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल किए जाने को लेकर सरकार ढुलमुल रवैया अपनाए हुए है। अभी हाल ही में संघ लोक सेवा आयोग ;यू0पी0एस0सी0द्ध ने यह फैसला किया है कि सिविल सेवा की लिखित परीक्षा में उम्मीदवार किसी भी मान्यताप्राप्त भारतीय भाषा में साक्षात्कार दे सकते हंै। भारतीय भाषाओं और उनके बोलने वालों के लिए यह अत्यंत गौरव की बात है। परन्तु भोजपुरी को संवैधानिक दर्जा प्राप्त न होने की वजह से इस परीक्षा में बडी तादाद में बैठने वाले भोजपुरी भाषी उम्मीदवारों को अपनी भाषा में साक्षात्कार दे पाने का यह अवसर प्राप्त नहीं हो पाएगा। यह उनके साथ एक प्रकार का अन्याय है । अतः भोजपुरी को संवैैधानिक मान्यता देने हेतु यू0पी0ए0 सरकार को गंभीरता पूर्वक विचार करते हुए भोजपुरी को आठवीं अनुसूची में अविलम्ब शामिल करना चाहिए।
2. भोजपुरी लोक गायकों को पद्म पुरस्कारः-
भोजपुरी लोकगायिका श्रीमती शारदा सिन्हा को वर्ष 1991 में भारत सरकार द्वारा पद्मश्री सम्मान से सम्मानित किया गया। परन्तु उसके बाद सेे 20 वर्ष बीत जाने के उपरांत आज तक किसी भी अन्य भोजपुरी लोककलाकार को पद्म पुरस्कार नही प्रदान किया गया जबकि कला के क्षेत्र में तबसे हजारों की संख्या में पद्म पुरस्कार वितरित किए गए हैं। मनोज तिवारी नेे पिछले दो दशकों में भोजपुरी लोकगायकी को एक नया आयाम प्रदान किया है और वे इस प्रकार के राष्ट्रीय सम्मानों से नवाजे जाने की काबिलियत रखते हैं । अतः उन्हें ऐसे राष्ट्रीय सम्मान प्रदान किए जाने चाहिए। यदि ऐसा होता है तो यह 20 करोड भोजपुरी भाषियों और खुद भोजपुरी भाषा के लिए अत्यंत सम्मान की बात होगी ।
3. बिहार को विशेष राज्य का दर्जा:
बिहार की विशेष परिस्थितियों को देखते हुए इसे विशेष राज्य का दर्जा दिया जाए ।
4. उत्तर प्रदेश के पूर्वांचल क्षे़त्र के विकास के लिए विशेष आर्थिक पैकेजः
अभी हाल ही में अपनी आजमगढ यात्रा के दौरान कांग्रेस महासचिव राहुल गांधी ने पूर्वांचल क्षे़त्र के बुनकरों के लिए 3000 करोड रू के विशेष आर्थिक पैकेज का प्रस्ताव किया। यह पूर्वांचल के लिए अत्यंत हर्ष की बात है पर केवल इतने भर से ही सम्पूर्ण पूर्वांचल का भला नहीं होगा । इस साल सरकार द्वारा बुंदेलखंड के लिए 7266 करोड रू के विशेष आर्थिक पैकेज की घोषणा की गई है। उत्तर प्रदेश के ये दोनांे ही क्षेत्र पूर्वांचल व बुंदेलखंड आर्थिक पिछडेपन के शिकार हैं परन्तु जिस प्रकार का विशेष आर्थिक पैकेज हर साल सरकार द्वारा बुंदेलखंड को दिया जाता है उस प्रकार का पैकेज पूर्वांचल क्षे़त्र को प्राप्त नहीं होता जबकि दोनों ही क्षे़त्रों की स्थिति कमोबेश एक जैसी ही है । अतः पूर्वांचल क्षे़त्र को भी बुंदेलखंड की ही तरह विशेष आर्थिक पैकेज दिए जाने की आवश्यकता है ताकि इस क्षे़त्र का भी समग्र विकास हो सके ।
उपरोक्त प्रस्तावों को पारित करने के बाद बैठक की कार्यवाही समाप्त हुई ।


