श्री रामतिवारी
केंद्रीय सत्ता की खातिर आप-'विकास पुरुष' क्या खाक हो गए ?

जो कल तक थे उन्मादियों के -

श्रीमान 'हिन्दू युवा ह्रदय सम्राट' .

केंद्रीय सत्ता की खातिर आज-

'विकास पुरुष' क्या खाक हो गए ?

जिनके इर्द-गिर्द किया करते थे -

कभी विनम्र गणेश परिक्रमा,

उन आडवाणी-जोशी -जशवंत जैसे,

वरिष्ठों के आप- क्यों जबरन 'बॉस' हो गए ?

जिन बीमार -वयोबृद्ध की तबियत -

पूछने तक कभी नहीं गए निकट,

मोदी जी आप- क्यों इस चुनाव के मौसम में

उन अटलजी के पोस्टर खाक हो गए ?

श्रीराम तिवारी , लेखक जनवादी कवि और चिन्तक हैं. जनता के सवालों पर धारदार लेखन करते हैं