अनुसूचित जाति आयोग ने भगाना की पीड़ित बच्चियों के न्याय के लिए उठाये कदम
अनुसूचित जाति आयोग ने भगाना की पीड़ित बच्चियों के न्याय के लिए उठाये कदम
नई दिल्ली। 5 जून 2014 को राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग के उपाध्यक्ष डॉ. राजकुमार वेरका ने अपने कार्यालय में भगाना पीड़ितों से मुलाक़ात की और उन्होंने अपनी आयोग की ओर से मामले की गंभीरता को देखते हुए तत्काल दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई और पीड़ितों के पुनर्वास और सरकारी सहायता के आदेश दिए।
लॉर्ड बुद्धा ट्रस्ट ने एक विज्ञप्ति में जानकारी दी है कि पीड़ितों और उनके समर्थकों को अपने कार्यालय में बुलाकार डॉ. वेरका ने सबसे पहले पीड़ित बच्चियों से घटना की सम्पूर्ण जानकारी ली। पीड़ित बच्चियों ने 26 मार्च को उनके साथ हुए दुष्कर्म और उन्हें पांच युवकों द्वारा अगवा कर पंजाब के भटिंडा में बेसुध हालत में छोड़ने और उसके बाद गाँव के सरपंच द्वारा उनसे मारपीट कर अपना मुंह बंद रखने की बात बतायी। साथ ही भगाना की अन्य महिलाओं और युवाओं ने उनके साथ आये दिन गाँव में होने वाले दुर्व्यवहार की बातें उपाध्यक्ष के सामने रखीं। डॉ. वेरका ने पीड़ितों की बात सुनते हुए खेद व्यक्त करते हुआ कहा कि यह शर्मनाक बात है कि समाज आज भी दो चश्मों से देखता है। उन्होंने कहा कि जहाँ निर्भया के केस में सारा देश, सिविल सोसायटी और मीडिया एक साथ उठ खड़ा हुआ था वहीँ इन दलित बच्चियों के इतने वीभत्स शोषण के मामले क्यों चुप्पी साधे रखे हुए हैं।
ट्रस्ट की विज्ञप्ति में कहा गया है कि सोशल एक्टिविस्ट द्वारा उन्हें यह बताने पर कि दिल्ली पुलिस ने बल प्रयोग करते हुए जंतर मन्तर से भगाना प्रदर्शनकारियों का टेंट उखाड़ दिया, को बिलकुल नाजायज़ और निंदनीय बताते हुए डॉ. वेरका ने कहा कि लोकतंत्र में किसी भी व्यक्ति या समुदाय को प्रदर्शन करने से किसी भी कीमत पर रोका नहीं जा सकता। अपनी ओर से पीड़ितों को आश्वासन दिलाते हुए उन्होंने कहा कि वह इस मामले पर ध्यान देंगे कि भविष्य में दिल्ली पुलिस ऐसी कोई कार्रवाई नहीं करें। राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग के उपाध्यक्ष ने कहा कि वे तत्काल निम्न आदेश जारी कर रहे हैं:
1 दोषी सरपंच और उसके साथी नाम ऍफ़ आई आई में शामिल किया जाएगा। 2 प्रत्येक पीड़ित बच्चियों को 20 लाख रुपये की राशि दी जायेगी।
3 पीड़िताओं के परिवार को जिला मुख्यालय में सरकार की तरफ से फ्लैट उपलब्ध कराया जाएगा।
4 पीड़ित बच्चियों की शिक्षा का वहन सरकार करेगी तथा उनकी 18 साल की उम्र पूरी होने के बाद उन्हें नियमित सरकारी नौकरी दी जायेगी।
यह पूछे जाने पर कि उपरोक्त आदेश के पालन में कितना वक्त लगेगा, डॉ. वेरका ने स्पष्ट किया कि वे अपनी तरफ से पूरी कोशिश करेंगे कि इन आदेश का पालन 15 दिनों के भीतर ही हो जाए और इसके लिए वे आज और इसी वक्त से लगातार कार्य करना शुरू कर देंगे। डॉ. वेरका के इन आदेश और समय सीमा के भीतर इनके क्रियान्वयन की घोषणा का पीड़ित बच्चियों, उनके परिवार और वहां मौजूद तमाम एक्टिविस्ट ने भाव विभोर होकर स्वागत किया।


