बैरंग लौटे चिकित्सा अधिकारी, अब अगली तैयारी
अब्दुल सलीम खान

टांगिया गांव-बिजुआ लखीमपुर (उत्तर प्रदेश)। पोलियो की दवा पिलाने से इंकार कर चुके वन टांगिया ने अपनी बस्ती तक पहुंचे जिला स्तरीय अधिकारियों के समझाने पर भी नहीं माने। अपने वजूद की लड़ाई लड़ रहे टांगिया समुदाय ने चिकित्सा अफसरों के पहुंचने पर भी बच्चों को पोलियो की खुराक पिलाने से इंकार कर दिया। पोलियो बूथ दिवस के रोज दवा पिलाने पहुंची टीम को पहले ही बस्ती वाले वापस कर चुके थे। अब विशेष टीम को भी बैरंग कर दिया। साथ ही अपने हालात व मांगों को लेकर मुख्यमंत्री के नाम पत्र जरूर तैयार किया है।

टांगिया कुनबे के लोगों ने भीरा जंगल से अनोखा सत्याग्रह शुरू किया है। वनाधिकार कानून २००६ के तहत इन टांगिया कुनबे के लोगों ने अपने हक की आवाज उठाई है। इसी के तहत इन लोगों ने बच्चों को पोलियो खुराक पिलाने से इंकार कर दिया, कहा कि जब हम वन ग्राम में नहीं हैं और न ही राजस्व ग्राम में हैं तो सरकार हमारे बच्चों पर सिर्फ पोलियो की खुराक से मेहरबानी क्यों दिखाए। कुनबे ने कहा कि देश की संसद से पास हुआ वनाधिकार कानून को वन तहकमा ठेंगा दिखा रहा है, इनकी बस्ती को वनाधिकार कानून के तहत वन ग्राम या राजस्व ग्राम घोषित किया जाए।

पहली बार गांव पहुंची कोई सरकारी गाड़ी
यूं तो वन विभाग के अफसर गांव तक कई बार आ चुके हैं, लेकिन इसके अलावा पहला मौका था जब गांव तक कोई बड़े अधिकारी की सरकारी गाड़ी पहुंची थी। बता दें कि पोलियो खुराक पिलाने से इंकार करने के बाद जिले के स्वास्थ्य महकमे के अफसर इस बस्ती में पहुंचे थे। टीम ने लोगों को तीन घंटे तक समझाया लेकिन वह अपने बच्चों को दवा पिलाने से इंकार ही करते रहे। आखिरकार टीम बैरंग वापस लौट आई।