अपनी अपनी इज्जत है जी !
अपनी अपनी इज्जत है जी !
हम हिंदी सिनेमा देखा हूं जी । बहुत तीसमार खान नहीं हूं जी । पर बहुतसिनेमा देखा हूं जी । मुन्नी आज न बदनाम हुई है जी । उसके पहले कोई पूरायूपी – लूट ले गई थी जी । शीला की जवानी की बात करते हो जी । दिल्ली मेंजवानी लूट जाती है जी । पहले कहा जाता था कि इज्जत लूट ली जी । अब इज्जत एक ऐसी चीज है कि हर की अलग अलग होती है जी । स्पेक्ट्रम सस्ती कीमत पर पाना भी बहुत इज्जत वाली बात थी जी । चुनाव हारना भी इज्जत का खत्म होना होता था जी । बेईमानी और भ्रष्टाचार की भी इज्जत होती है जी । लेकिन क्या जमाना आया है जी कि प्रधानमंत्री की भी इज्जत नहीं रही जी । यह तो अच्छी बात नहीं हुई जी ।
हम बहुत सरकार देखा हूं जी । 1967 का गैरकांग्रेस वाद भी देखा हूं जी ।
1971 का गरीबी हटाओ भी देखा हूं जी । 1977 का संपूर्ण क्रांति भी देखा हूं जी । तरह तरह की भ्रांति भी देखा हूं जी । 1984 का इंदिरा गांधी की शव पर वोट की बौछार भी देखा हूं जी । राजीव गांधी का अपना देश महान देखा हूं जी । बोफोर्स के नाम पर भ्रष्टाचार भी देखा हूं जी । ताला खुलते और कांग्रेस की किस्मत बंद होते भी देखा हूं जी । क्या क्या नहीं देखा , इन बूढ़ी आंखों ने हिंदुत्व के नाम पर धरोहर को मिटते देखा हूं जी । दंगा – फसाद भी देखा हूं जी । सामाजिक न्याय की सरकार भी देखा हूं जी । संत चंद्रशेखर को सत्ता के लिए सामान्य होता भी देखा हूं जी । नरसिंह राव की कुछ न करते करते देश को अमेरिका उर्फ वर्ल्ड बैंक के हाथों भारत को गिरवी रखते भी देखा जी ।
भारत को इंडिया बनते भी देखा जी । देवगौड़ा को भी लाल किला से हिंदी बोलते देखा जी । इंद्रकुमार गुजराल को प्रधानमंत्री बनते देखा जी ।
अटलबिहारी वाजपेयी की छे साला सरकार का भारत उदय भी देखा हूं जी । देखते देखते कांग्रेस की किस्मत खुलते देखा हूं जी । राष्ट्रमाता सोनिया गांधी का त्याग भी देखा हूं जी । इस त्याग में छिपा सत्ता का भोग भी देखा हूं जी । रामराज्य की कहानी वाली चरण पादुका सरकार भी देखा हूं जी । देखते देखते किरानी बाबू को प्रधानमंत्री बनते देखा हूं जी । लालू जी का रेलम पेल देखा हूं जी । हर बात पर सेवा कर लगते देखा हूं जी । देखते देखते अंबानी परिवार की अमीरी देखा हूं जी । परिवार का भाइ भाइ का झगड़ा भी देखा जी । सरकार पर गैरसरकार का कब्जा भी देखा हूं जी ।
क्या क्या नहीं देखा जी । देश में ऐसा सिनेमा कभी नहीं देखा जी । देश
चलाते मोबाइल फोन को भी देखा जी । मोबाइल फोन को बंटते देखा जी । फोन को टेप होते देखा जी । टेप की कहानी के साथ सुबह का अखबार देखा जी । एक मरियल सा प्रधानमंत्री देखा जी । हर कोई भ्रष्टाचार के खिलाफ खड़ा देखा जी । फि र भी भ्रष्टाचार को बढ़ते देखा जी । 21 वीं सदी का पहला दशक खत्म होते देखा जी । पहले भी बहुत रुलाया है प्याज ने , पर ऐसा घड़ियाली आंसू नहीं देखा जी । अब देखने को क्या बचा जी । सिनेमा का तीसमार खां सिनेमा तक होता है जी । पर देश में एक से बढ़ कर एक तीसमार खां देखा जी । थ्री इडियट भी देखा जी । बूढ़ों का बचपना देखा जी । ऐसा जमाना आया है कि प्रधानमंत्री की भी इज्जत नहीं रही जी । अब किसी की अपनी अपनी इज्जत नहीं रही जी !


