नई दिल्ली। जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) छात्र संघ के अध्यक्ष कन्हैया कुमार ने कहा है कि हैदराबाद विश्वविद्यालय का शोध छात्र रोहित वेमुला उनके आदर्श हैं, संसद हमले का दोषी अफजल गुरु नहीं।
मीडिया रिपोर्ट्स में कहा गया है कि एक सवाल के जवाब में कन्हैया ने कहा,

"यदि आप हमसे पूछें तो अफजल गुरु मेरा आदर्श नहीं है। रोहित वेमुला मेरा आदर्श है।"

कन्हैया से सवाल किया गया था, "आप वर्ष 2001 के दिसंबर में संसद पर हुए हमले के दोषी अफजल गुरु के बारे में क्या सोचते हैं?"

कन्हैया ने जोर देते हुए कहा कि जेएनयू के छात्र कभी भी राष्ट्र विरोधी नहीं हो सकते।
उन्होंने कहा, "मैं इस देश के लोगों से कहना चाहता हूं कि हम लोग जेएनयू में आप लोगों के कर से जो आर्थिक सहायता दी जाती है, उससे पढ़ते हैं। मैं इस देश के करदाताओं को आश्वस्त करना चाहता हूं कि जेएनयू के छात्र कभी भी राष्ट्र-विरोधी नहीं हो सकते। जेएनयू में आपके कर के पैसे का इस्तेमाल किसी राष्ट्र विरोधी गतिविधियों को चलाने में नहीं हो रहा है।"
कन्हैया कुमार ने एक बार फिर केंद्र सरकार पर निशाना साधा है। आज जेएनयू कैम्पस में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कन्हैया ने कहा,
"मेरे लिए भारत का एक नागरिक था, जम्मू-कश्मीर का निवासी था, कानून ने सजा दी और वही कानून सजा पर बोलने की इजाजत देता है। पर मेरा आइकॉन अफजल नहीं, रोहित वेमुला है।"
इस बीच, सीताराम येचुरी ने कहा कि कन्हैया प.बंगाल में वाम मोर्चा के लिए कैंम्पेन करेंगे।
और क्या कहा कन्हैया ने
- जेएनयू लोकतंत्र के लिए खड़ा होने वाला संस्थान।
- "जेएनयू में पढ़ने वाला कोई देशद्रोही नहीं हो सकता।
- "मेरे अंदर जो सबसे आशावादी चीज आई, ये काले बादल लाल सूरज को छिपा नहीं पाए। हम संविधान की हर बात को सच में उतारेंगे।"
- "संविधान कहता है- समानता, भाईचारा, लोकतंत्र, समाजवाद। सीमा पर जो जवान लड़ रहा है, जो किसान मर रहा है, रोहित वेमुला की शहादत बेकार नहीं जाएगी।"
- "राजद्रोह और देशद्रोह में फर्क होता है। जो चेले-चपाटे संविधान के खिलाफ काम कर रहे हैं, हम उनके खिलाफ हैं। संविधान वीडियो नहीं दस्तावेज है। जिसे विद्वानों, किसानों, मजदूरों ने बनाया है। इसे मॉर्फ नहीं किया जा सकता।"
- "जेएनयू में सब्सिडी का पैसा सही जगह खर्च होता है। यहां पढ़ने वाले कई छात्रों की पारिवारिक पृष्ठभूमि काफी कमजोर है। हमारा किसी से वैचारिक मतभेद हो सकता है, मनभेद नहीं।"
- "एक चिंता जो है वो जब समाज में जाएंगे। कुछ लोग राजद्रोह-देशद्रोह में फर्क नहीं समझे। आरोपी और आरोपसिद्ध में अंतर नहीं समझे। जिस तरह से हमारे साथियों के साथ व्यवहार हो रहा है। जिस तरह से वीडियो लाए गए, कुछ कंडोम गणना अधिकारी बन गए। "
- "जेएनयू में 145 देशों के छात्र पढ़ते हैं। ये सभी समाज में अपना योगदान देते हैं। ये बाबा साहब के सपनों को सच करने का संस्थान है। हम स्पीच के दायरे को समझते हैं। हम फ्रीडम ऑफ स्पीच को भी समझते हैं।"
- "मेरा काम पढ़ाई करना है। मेरी तरह कई लोग पढ़ाई कर सकें, इसके लिए लड़ाई लड़ना है।"