संजय शर्मा
एक और जासूसी कांड ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की मुसीबतें बढ़ा दी हैं। नितिन गड़करी के घर जासूसी उपकरण लगा था या नहीं यह तो अब जांच का विषय है मगर इस उपकरण के लगे होने की सूचना ने पूरी सरकार के माथे पर दाग लगा दिया है। इस जासूसी कांड की छींटें सुषमा स्वराज और राजनाथ सिंह के दामन तक पहुंचने के बाद भाजपा में चल रहे शीतयुद्ध की चर्चाएं भी आम हो गयीं हैं। सबसे खतरनाक बात यह है कि गुजरात की जिस महिला जासूसी कांड की बात अब लोग भूलने लगे थे वही जासूसी कांड अब लोगों की जुबान पर फिर आ गया है। लोकसभा और राज्य सभा में भारी हंगामे के बाद अब यह चर्चा जोरों पर है कि मोदी मंत्रिमण्डल में शामिल कुछ बड़े मंत्रियों की जासूसी प्रधानमंत्री कार्यालय से करवाई जा रही है।
दरअसल भाजपा के बड़े लोगों के बीच यह घमासान कोई नई बात नहीं है। इससे पहले भी भाजपा नेताओं के आपसी मनमुटाव की खबरें लगातार चर्चा का विषय बनी रही हैं। इस बार परिदृश्य में अंतर सिर्फ इस बात का आया है कि इस बार केन्द्रीय नेतृत्व मजबूत स्थिति में है।
भाजपा का एक बड़ा खेमा लंबे समय से नरेन्द्र मोदी का विरोधी रहा है। चुनाव से पहले भी यह बातें कई बार चर्चा का विषय बनी रही हैं। मगर भाजपा कार्यकर्ताओं के उत्साह के चलते यह बातें नेपथ्य में चली गयीं और नरेन्द्र मोदी न सिर्फ भाजपा के स्टार प्रचारक साबित हुए बल्कि उन्होंने भाजपा को उस स्थान तक पहुंचा दिया जहां पहुंचने की कभी भाजपा ने कल्पना भी नहीं की थी।
प्रधानमंत्री बनने के बाद नरेन्द्र मोदी जानते थे कि एक गुट भीतर ही भीतर उन्हें परेशान कर सकता है। वह यह भी जानते थे कि आज की तारीख में इन नेताओं की हैसियत इतनी बड़ी नहीं है कि वह उनको नुकसान पहुंचाने की कल्पना कर सकें। मगर नरेन्द्र मोदी को भली भांति पता है कि राजनीति में अपने विरोधी को मौका देने का क्या मतलब होता है। लिहाजा वह चाहते थे कि पार्टी की पूरी कमान उनके हाथ में रहे। लिहाजा मंत्रिमण्डल गठन से लेकर सरकार में अफसरों की तैनाती तक उन्होंने अपने स्तर से कराई और किसी का भी कोई दखल चलने नहीं दिया।
नरेन्द्र मोदी जानते है कि राजनीति में खुद को मजबूत करने से भी ज्यादा यह जानना आवश्यक है कि विरोधी किस सीमा तक क्या रणनीति बना सकता है।
नरेन्द्र मोदी ने गुजरात में भी लंबे समय से इसी रणनीति पर काम किया है। न सिर्फ विपक्षी दलों का बल्कि अपनी पार्टी के भी सभी नेताओं का पूरा लेखा-जोखा नरेन्द्र मोदी अपने पास रखते थे और इससे उन्हें कामयाबी भी मिली। वह जानते थे कि यह ऐसा हथियार है जिसका उपयोग कभी भी किया जा सकता है।
नितिन गडकरी के घर जासूसी उपकरण लगे होने के बाद मचे हंगामे के पीछे यही सब बातें थी। सूत्रों का कहना है कि ऐसे ही जासूसी उपकरण सुषमा स्वराज और राजनाथ सिंह के घर पर भी लगे थे। मजे की बात यह है कि तत्काल खुद गडकरी सहित पार्टी के सभी नेताओं को इस बात का खंडन करना पड़ गया कि उनके यहां किसी भी किस्म की कोई जासूसी कराई गयी है। मगर इस वाक्ये ने भाजपा को भारी नुकसान पहुंचाया है। गुजरात में नरेन्द्र मोदी के इशारे पर एक महिला की जासूसी कराये जाने की खबर ने पहले ही नरेन्द्र मोदी की छवि को तार-तार किया है। इस लड़की और एक आईएएस अफसर के फोन लगातार टेप किए गये और खुफिया तौर पर उसका पीछा कराया गया। गुजरात का यह जासूसी कांड लगातार भाजपा को नुकसान पहुंचाता रहा। यह बात दीगर है कि पूरे देश में नरेन्द्र मोदी की छवि जननायक के तौर पर बन गयी। इसलिए भाजपा को इसका बहुत ज्यादा नुकसान नहीं हुआ। दिल्ली के गलियारों में इस बार भी नेताओं की जासूसी के इस मामले को गुजरात की महिला से जोड़कर देखा गया और इस तरह की चर्चा की गयी कि गुजरात का जासूसी मॉडल अब दिल्ली आ गया है। जाहिर है नयी-नयी सरकार के लिए यह मुसीबत भरी बात साबित हो सकती है।
बिजनेस स्टैंडर्ड के ब्यूरोचीफ सिद्धार्थ कलहंस का मानना है कि इस मुद्दे के उभरने से यह संदेश जायेगा कि नरेन्द्र मोदी एक तानाशाह की तरह काम कर रहे हैं। जिससे उनकी छवि पर असर पड़ेगा। आईबीएन-7 के स्टेट हेड शलभमणि त्रिपाठी का कहना है कि जब सभी नेताओं ने मना कर दिया कि उनके यहां से कोई उपकरण नहीं मिला तब सभी समझ जायेंगे कि यह एक राजनैतिक स्टंट है। सपा नेता और राज्य महिला आयोग की सदस्य डॉ. रोली मिश्रा का कहना है कि पूरा देश जानता है कि किस तरह गुजरात में एक महिला का शोषण किया गया और उसकी निजता का उल्लघंन किया गया जो काम उस महिला के साथ किया गया वही काम अब मोदी अपनी सरकार के मंत्रियों के लिए करा रहे हैं। जाहिर है ऐसी बातें किसी भी सरकार के लिए शुभ संकेत नहीं हैं।
संजय शर्मा, लेखक वीक एंड टाइम्स के सम्पादक हैं