अब न्यायमूर्ति लोकुर ने उठाए सवाल, कहा कॉलेजियम का फैसला सार्वजनिक न करना निराशाजनक
अब न्यायमूर्ति लोकुर ने उठाए सवाल, कहा कॉलेजियम का फैसला सार्वजनिक न करना निराशाजनक
नई दिल्ली, 23 जनवरी (एजेंसी)| न्यायमूर्ति प्रदीप नंदराजोग Justice Pradeep Nandrajog और न्यायमूर्ति राजेंद्र मेनन Justice Rajendra Menon को पदोन्नत किए जाने के संबंध में सर्वोच्च न्यायालय के कॉलेजियम Collegium of the Supreme Court द्वारा 12 दिसंबर पारित प्रस्ताव को सार्वजनिक न किए जाने के प्रति निराशा जाहिर करते हुए सर्वोच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश मदन लोकुर retired Judge Madan Lokur ने बुधवार को कॉलेजियम प्रणाली Collegium System में 'सुधार' की वकालत की। यहां आयोजित एक संवाद सत्र में न्यायमूर्ति लोकुर ने कहा, "इससे मुझे निराशा हुई कि 12 दिसंबर, 2018 को पारित प्रस्ताव को सार्वजनिक नहीं किया गया। लेकिन ऐसा क्यों नहीं किया गया , मैं नहीं जानता।"
कॉलेजियम के 12 दिसंबर के निर्णय के उलट कॉलेजियम ने 10 जनवरी को 32 अन्य न्यायाधीशों को दरकिनार कर न्यायमूर्ति दिनेश माहेश्वरी और न्यायमूर्ति संजीव खन्ना को सर्वोच्च न्यायालय में पदोन्नत किया था।
उल्लेखनीय है कि 12 दिसंबर को जिस कॉलेजियम की बैठक हुई थी, उसमें न्यायमूर्ति लोकुर भी शामिल थे।
यह पूछे जाने पर कि किस वजह से कॉलेजियम ने यह निर्णय लिया? न्यायमूर्ति लोकुर ने कहा कि उन्हें 'अतिरिक्त सामग्री' की जानकारी नहीं है, जिस वजह से कॉलेजियम का दिसंबर का निर्णय बदला गया।
उन्होंने कहा कि मौजूदा माहौल में हालांकि कॉलेजियम प्रणाली महत्वपूर्ण है और प्रणाली को सुधारने और इसमें बेहतरी लाने की जरूरत है।
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