अयोध्या की आवाज़ बद्रीनाथ तक
अयोध्या की आवाज़ बद्रीनाथ तक
अमन-चैन प्यार मोहब्बत और सर्वधर्म सद्भाव को बढ़ावा देने के लिये अयोध्या की आवाज़ आगामी 15 जून से 24 जून तक अयोध्या से बद्रीनाथ तक उत्तराखण्ड सद्भावना यात्रा 2013 का आयोजन करने जा रहा है। यह यात्रा महाप्रयाण को प्राप्त असगर अली इंजीनियर साहेब के नाम समर्पित होगी। इंजीनियर साहेब का जीवन साम्प्रदायिक सद्भाव के लिये समर्पित था। यात्रा के संयोजक युगल किशोर शरण शास्त्री ने कहा कि उनकी मुहिम को हम जीवन पर्यन्त आगे बढाते रहेंगे।
युगल किशोर शरण शास्त्री ने बताया कि उत्तराखण्ड सद्भावना यात्रा का मुख्य मकसद उत्तराखण्ड की दैवीय, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विरासत को प्रतीक मानकर उत्तराखण्ड की जनता में शांति और सद्भाव के सन्देश का प्रसार करना है। उत्तराखण्ड धार्मिक संस्कृति और विरासत का ऐसा प्रतीक स्थान है जो अपने नैसर्गिक सौंदर्य के लिये दुनिया भर में जाना जाता है जो एक तरफ तो हिमालय की सफ़ेद बर्फीली चोटियों और हिम नदियों से ढँका है तो वहीं दूसरी तरफ जिसकी निम्न तलहटियाँ हरे-हरे सघन वनों से ढँकी हुयी हैं जहाँ मन को प्रफुल्लित करने वाली असंख्य झीले हैं, नैनीताल - अल्मोड़ा जैसे प्राचीन हिल स्टेशन का रोमाँच और बदरीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री, यमुनोत्री जैसे पवित्र धार्मिक स्थल जो दुनिया भर के लाखों पर्यटकों के पर्यटन का एक प्रमुख केन्द्र के रूप में हैं। जहाँ नाना प्रकार के नृत्यों, गढ़वाली स्वर के मधुर संगीत से सजी लोक कलाएँ हों, जहाँ विभिन्न धर्मो और संस्कृति पर आधारित पर्व सर्वधर्म समभाव की भावना का विकास करते हों, जिसकी भूमि बड़े- बड़े ऋषि-मुनियों की तपोस्थली रही हो ऐसा उत्तराखण्ड न सिर्फ प्राकृतिक सौन्दर्य का प्रतीक है बल्कि यह हमारी साझी विरासत और वसुधैव कुटुम्बकम की अवधारणा का भी प्रतीक है जो पूरे राष्ट्र में एकता और शांति का सन्देश भी फैलाता है। श्री शास्त्री ने कहा कि पर यह अत्यन्त अफ़सोस की बात है कि कुछ साम्प्रदायिक ताकतें हमारी इस सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विरासत में नफरत की भावना फ़ैलाने में लगी हुयी हैं वे अपने निहित स्वार्थों के लिये इस साझी विरासत के प्रतीक को साम्प्रदायिक केन्द्र के रूप में बदल देना चाहती हैं जिसके तहत पिछले कुछ वर्षों में घटी घटनायें चाहे वे पवित्र धार्मिक ग्रंथो को जलाने की घटना हो या फिर दो सम्प्रदायों के बीच आपसी झगड़े की घटना, इन सभी के पीछे साम्प्रदायिक और संकीर्ण राजनीति करने वाले लोगों का ही हाथ है, वे धर्म की आढ़ में लोगों के बीच नफ़रत फैलाकर धार्मिक उन्माद पैदा करना चाहते हैं जिससे वे अपने राजनीतिक स्वार्थों को पूरा कर सकें। साम्प्रदायिक हिंसा और तनाव न सिर्फ दो सम्प्रदायों के बीच अलगाव पैदा करती है बल्कि यह हमारी संस्कृति और हमारी विरासत को भी हानि पहुँचाती है जहाँ एक ओर हमारी संस्कृति और मानवीय एकता कमजोर होती है तो वहीं दूसरी ओर हमारा और हमारे समाज का विकास भी अवरुद्ध होता है और हमारी आगे आने वाली पीढ़ियाँ भी इसी नफरत की आग में जलती हैं।
अयोध्या की आवाज़ के संयोजक ने कहा कि हम उत्तराखण्ड सद्भावना यात्रा लेकर निकले जिसका मुख्य मकसद उत्तराखण्ड की जनता के बीच शान्ति एकता और सदभाव का सन्देश फैलाना, उत्तराखण्ड की संस्कृति और विरासत का प्रसार प्रचार करना, शान्ति और समानता के लोक गीतों के माध्यम से लोगों को प्रेरित करना, आपसी भाई चारे की भावना को बढ़ावा देना है जिससे नफरत और अलगाव फ़ैलाने वाले लोगों के मकसद को विफल किया जा सके।
श्री शास्त्री ने का कि वह अपनी यह यात्रा अयोध्या से शुरू कर रहे हैं। इसे अयोध्या से शुरू करने के पीछे भी एक खास मकसद है। अयोध्या के इतिहास और महत्व से हम सभी अच्छी तरह परिचित हैं। जितना ज्यादा प्राचीन अयोध्या का इतिहास है उससे भी ज्यादा शांति और सद्भाव का प्रतीक। अयोध्या एक ऐसा स्थल जिसने विभिन्न साम्प्रदायिक दंगो और झगड़ों के बाद भी अपनी साझी विरासत को खोया नहीं बल्कि पहले से और अधिक समृद्ध बनाया है। बहुत सारे ऐसे मौके आये जब साम्प्रदायिक ताकतों ने अयोध्या की फिजा में नफ़रत का जहर घोलने की कोशिश की है पर आपसी सौहार्द की प्रतीक अयोध्या की जनता ने उन्हें कभी भी अपने मकसद में कामयाब नहीं होने दिया और अयोध्या की साझी विरासत को संजोये रखा हुआ है। और आज भी यह विभिन्न धर्मों एवम् सम्प्रदायों के बीच शांति और सदभाव का सन्देश फैला रहा है। इसलिये हमने अपनी यात्रा अयोध्या से शुरू करने का निश्चय किया जिससे कि हम उत्तराखण्ड की जनता के सामने अयोध्या का उदहारण रख सके और उन्हें सद्भाव के लिये प्रेरित कर सकें। उन्होंने सभी से आग्रह किया कि उनकी इस यात्रा का हिस्सा बनें और शांति एवम् सद्भावना जैसे पवित्र एवम् महान सन्देश फ़ैलाने में अपना सहयोग दें। लोगो के बीच अपने विचार रखें, शांति के गीत गाये, शांति के पर्चे बाँटें और यात्रा के साथियों का मनोबल बढ़ाये।


