अयोध्या से काठमांडू- जन संस्कृति यात्रा 2013 एक रिपोर्ट
अयोध्या से काठमांडू- जन संस्कृति यात्रा 2013 एक रिपोर्ट
संस्कृति एक ऐसी विरासत जो कभी खत्म नहीं होती है। प्राचीन काल से लेकर आज तक संस्कृति का अपना खास महत्व रहा है। अतिथि देवो भवः की परंपरा, साधू संतों को भिक्षा देने की परंपरा, न जाने कितनी ऐसीमित संस्कृतियाँ हमारे देश में मौजूद हैं। कुछ इसी प्रकार की संस्कृति की खोज करने, लुप्त होती संस्कृतियों को समाज के बीच लाने के उद्देश्य से हम जन संस्कृति यात्रा लेकर चले जिसकी शुरुआत हमने साथ-साथ की।
यात्रा के सिलसिलेवार अनुभव - कबीर समाधि स्थल मगहर- उत्त्तर प्रदेश के संत कबीर नगर के मगहर में स्थित कबीर ने अपने घुमक्कड़ जीवन को विराम देते हुए समाधि ली थी। इस स्थल जहाँ कबीर ने अपने जीवन को विराम देते हुए समाधि ली थी, संत कबीर जिनने अपना सारा जीवन धर्म और मजहब से चिपकर उक्ति कर मानवियत के लिए सर्पित किया। अपने ज्ञान और वाणी ने सारे जहाँ को एक सूत्र में पिरोने का काम किया। ऐसे स्थलों को करीब से देखना हम सभी के लिए किसी सौभाग्य से कम नहीं। यहाँ हमें इंसानी मूल्यों पर आधारित संस्कृति की झलक देखने को मिली। समाहित स्थल के गद्दीनशीन विचार साहब और उनके सहयोगियों द्वारा हमारे स्वागतम किया गया। भारतीय संस्कृति के अनुरूप मिश्रा और जल के साथ हमें अपने परिचय एक-दूसरे के साथ साझा किए। इसके बाद स्कूलीन छात्रों के साथ एक वार्तालाप कार्यक्रम आयोजित हुआ, जिसमें यात्रा के संगोजक युगल किशोर शरण शास्त्री जी ने


