आंगनबाड़ी कर्मचारियों की भूख हड़ताल तीसरे दिन भी जारी !
अरविन्द केजरीवाल के घर के आगे बैठे कर्मचारियों की सुध लेने अभी तक प्रशासन से कोई नहीं पंहुचा !
नई दिल्ली, 20 जुलाई। अरविन्द केजरीवाल के घर के आगे भूख हड़ताल पर बैठी आँगनवाड़ी कर्मचारी और सहायिका की भूख हड़ताल का आज तीसरा दिन है। केजरीवाल सरकार ने चुनाव से पहले दिल्ली की जनता से कई वादे किये थे, जिनमें से एक वादा था नियमित प्रकृति के काम से ठेका प्रथा का उन्मूलन किया जाएगा। दिल्ली की आंगनबाड़ियों में काम करने वाले कर्मियों को सरकार सरकारी मुलाजि़म होना का दर्जा नहीं देती जिसके चलते न तो आंगनबाड़ी कर्मचारियों को न्यूनतम वेतन मिलता है और न ही और कोई सुविधा।
ज्ञात हो कि पिछले 13 दिनों से ये कर्मचारी अपने अधिकारों को लेकर केजरीवाल के घर के आगे बैठे हुए हैं। परन्तु अभी तक सरकार की ओर से इन कर्मचारियों को कोई भी आश्वासन नहीं मिला है।
क्रमिक भूख हड़ताल पर बैठी आँगनवाड़ी कर्मचारी सुमन ने बताया कि सरकार ने अभी तक उनकी मांगों की सुनवाई करने की कोई पहल नहीं की है और सुपरवाइजर उन्हें काम से निकालने की धमकी दे रहा है। अपनी सरकार के प्रचार के लिए 526 करोड़ केवल रेडियो विज्ञापनों पर खर्च करने वाली केजरीवाल सरकार के पास दिल्ली के बचपन को संवारने वाली आँगनवाड़ी कामगारों की समस्याओं को सुनने और उनकी मदद करने के लिए समय नहीं है। आम आदमी की सरकार होने का दम भरने वाली सरकार के मुखिया के घर के आगे 13 दिन से हड़ताल पर बैठी आंगनवाड़ी कर्मचारियों की सरकार ने अभी तक कोई सुध भी नहीं ली है। दिल्ली विधान सभा के घेराव और दिल्ली सचिवालय पर विशाल प्रदर्शन के बाद भी दिल्ली सरकार की नींद नहीं टूटी है। न तो सरकार की तरफ से कोई अधिकारी आंगनबाड़ी कर्मचारियों से बात करने पंहुचा है और न ही सरकार ने इनकी मांगों की लेकर कोई ठोस घोषणा की है। मगर इस सब के बावजूद संघर्षशील हड़ताल कर्मी पूरे जोश के साथ अपनी मांगों को लेकर अरविन्द केजरीवाल के आवास के आगे भूख हड़ताल के दूसरे दिन भी डटे हुए है।
सुमन ने आगे बताया कि कल से भूख हड़ताल के साथ ही कर्मचारी सभी आँगनवाड़ी पर ताला लगा देंगी और आँगनवाड़ी के लिए आ रहा सारा खाना गाड़ियों से उतरने नहीं देंगी।
हड़ताली कर्मचारियों के समर्थन में आए बिगुल मजदूर दस्ता के अविनाश ने बताया कि हड़तालकर्मियों की मांग है कि उन्हें स्थायी किया जाए, उनकी आय की श्रेणी सुनिश्चित की जाए और प्रोहत्साहन राशि की बजाए आय दी जाए, और इस आय का भुगतान हर महीने सुनिश्चित समय तक किया जाए साथ ही सभी कर्मचारियों को पेहचान पत्र, ई.एस.आई., पी.एफ कार्ड दिए जाए, ग्रीष्म कालीन और शीत कालीन छुट्टियां दी जाए और रिटायर होने पर पेंशन दी जाए। आंगनवाड़ी कर्मचारी दिल्ली की गरीब आबादी के बच्चों को चिकत्सा, शिक्षा पहुँचाने के साथ साथ गर्भवती औरतों की देख रेख और उन्हें प्रसव के बारे में जानकारी देने और शिक्षित करने का काम करती हैं। हर एक आंगनवाड़ी कर्मचारी पर अपने इलाके के 1000 लोगों की देख रेख की जिम्मेदारी होती है। इतनी बड़ी और महत्वपूर्ण ज्म्मिेदारी का निर्वाह करने के बावजूद इन कर्मचारियों कि खुद की हालत बेहद खस्ता है, इन्हें प्रति माह 4000 रुपए ओनोरेरियम के रूप में मिलता है जिसका भुगतान भी समय पर नहीं किया जाता। आंगनवाड़ी के कर्मचारियों के प्रति सरकार हमेशा से उदासीन रही है मगर दिल्ली में आम आदमी पार्टी की सरकार बनने के साथ कर्मचारियों में यह आशा पैदा हुई थी कि शायद केजरीवाल सरकार आँगनवाड़ी कर्मी की मांगों को पूरा करेगी। मगर केजरीवाल सरकार जहाँ एक तरफ कारखानेदारों को लाइसेन्स राज से मुक्ति दिलाने में एड़ी चोटी का जोर लगा सकती है वही दिल्ली की गरीब आबादी के बच्चों के बचपन को संवारने वाली आँगनवाड़ी कामगारों की मांगों को अनदेखा करते हुए अपनी नींद से नहीं जाग रही है। साफ है कि केजरीवाल सरकार में और कांग्रेस, भाजपा में भी कोई अन्तर नहीं है।