अवध है मेरा दागिस्तान-संजीव
अवध है मेरा दागिस्तान-संजीव
संजीव का हिन्दू कालेज में रचना पाठ
दिल्ली। हर लेखक का अपना दागिस्तान होता है और मेरा वह दागिस्तान अवध है जिसके किशनगढ़ को मैंने अपने उपन्यास 'अहेर' में गढ़ा। मनुष्य मनुष्य का शिकार कर रहा है और इस आखेट को देखना सबसे अधिक त्रासद है जिसे मैंने 'अहेर' में महीन हिंसा में लिपटी साम्प्रदायिकता में खोजने की की कोशिश की है।
यह कहना है विख्यात उपन्यासकार संजीव का। हिन्दू कालेज में अपने सद्य प्रकाशित उपन्यास 'अहेर' पर आयोजित एक कार्यक्रम में संजीव ने कहा कि हर व्यक्ति को अपने अस्तित्व की रक्षा का अधिकार है और किसी भी तरह की एकांगिकता मनुष्य के हित में नहीं है। संजीव ने कहा कि 'अहेर' में उन्होंने तर्कों के आधार पर एकांगिकता का निषेध किया है।
आयोजन की अध्यक्षता कर रहे विभाग के वरिष्ठ सदस्य डॉ. रामेश्वर राय ने कहा कि प्रतिपक्ष के रचनाकार संजीव इस उपन्यास में हमें विस्मय की पवित्र दुनिया में ले जाते हैं जो यथार्थ से भरी है। उन्होंने कहा कि भूमण्डलीकरण के व्यापक बदलाव के बावजूद संजीव इस उपन्यास में बताते हैं कि हिंसा और जड़ता अभी भी वैसी पसरी हुई है। डॉ राय ने कहा कि श्रमजीवी जनता का ऐसा सहज चित्रण दुर्लभ है। उन्होंने उपन्यास में आए एक पात्र राधा का उदाहरण देते हुए कहा कि स्त्री धर्म का सबसे बड़ा अहेर है जिसकी पीड़ा और निरुपायता को संजीव खूब बताते हैं। इससे पहले संजीव ने उपन्यास के रोचक अंश का पाठ किया और विद्यार्थियों के अनेक सवालों के जवाब दिए। एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि तथ्यों का हवाला देते हुए हम चाहे किसी को पहला कवि या कथाकार कहते रहें लेकिन सच्चाई यह है मनुष्य सभ्यता का आदिम कथावाचक और आदिम गीतकार कोई पुरुष नहीं स्त्री ही रही होगी।
हिंदी साहित्य सभा द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में सभा के संयोजक डॉ पल्लव ने प्रारम्भ में स्वागत उद्बोधन में कहा कि संजीव अस्सी के दौर में आए उन कथाकारों में अग्रणी हैं जिन्होंने नयी कहानी के बाद छाये धूल और धुएं को साफ़ कर कथा साहित्य को प्रेमचंद प्रवर्तित यथार्थवादी रास्ते पर लाने का काम किया।
विभाग के प्रभारी डॉ बिमलेंदु तीर्थंकर ने संजीव के एक अन्य उपन्यास 'सूत्रधार' से जुड़े अपने संस्मरण सुनाए और कहा कि संजीव हमारे दौर के ऐसे लेखक हैं जिनके यहाँ बहुत व्यापकता और गहराई को एक सकता है। इससे पहले संजीव ने विभाग की भित्ति पत्रिका 'अभिव्यक्ति' के लोकार्पण भी किया। संयोजन कर रहे विभाग के अध्यापक डॉ अरविन्द सम्बल ने लेखक परिचय दिया। आयोजन में बड़ी संख्या में युवा विद्यार्थियों और शोधार्थियों के साथ डॉ अभय रंजन,डॉ हरीन्द्र कुमार, डॉ रचना सिंह,डॉ नीलम सिंह सहित विभाग के सभी अध्यापकों ने भी भाग लिया। आयोजन स्थल पर ज्योतिपर्व प्रकाशन द्वारा संजीव की पुस्तकों की प्रदर्शनी भी लगाईं गई।
(डॉ. राजीव कुमार, अतिथि अध्यापक-हिंदी विभाग, हिन्दू कालेज, दिल्ली की रिपोर्ट)


