असम राज्य में भूमि अधिग्रहण कानून के खिलाफ राज्य के पर्यावरणीय संवेदनशील इलाके में विभिन्न बांधो का निर्माण करने के विरोध में राज्य में वनाधिकार कानून को लागू करने के लिए लम्बे समय से संघर्ष कर रहे कृषक मुक्ति संग्राम समिति के नेता अखिल गोगई को कल देर रात बाद जेल से रिहा कर दिया गया है। ज्ञातव्य हो कि बीती 24 जून 2011 को अखिल गोगई को माओवादी करार कर असम में नवगठित कांग्रेस सरकार द्वारा गिरफतार कर लिया गया था व उनपर रासुका के तहत कार्यवाही करने के पूरी तैयारी थी। पूरे असम में इस गिरफतारी का अभूतपूर्व विरोध किया गया जिसमें सिर्फ ग़रीब तबका ही नहीं शामिल था बल्कि मध्यम वर्ग भी सरकार के इस गैरजनवादी फैसले से आहत थे व सड़कों पर आकर इस गिरफतारी का पुरज़ोर विरोध किया। 22 जून को इसी कांग्रेस सरकार ने 20000 आंदोलनकारी जो प्रदेश में वनाधिकार कानून को लागू करने की मांग कर रहे थे पर गोली चलाई गई थी जिसमें चार आदिवासी मारे गए थे उनमें एक 10 वर्षीय बच्चा था। इस गोलीकांड ने सबको स्तब्ध कर दिया चूंकि इस गोलीकांड से यह संदेश गया कि तीसरी बार भारी मतों से चुनाव जीतने वाली कांग्रेस सरकार कम्पनीयों की सांठगांठ से जनता विरोधी विकास को तेज़ी से आगे बढ़ाने का कार्यक्रम लागू कर रही है। इस गोलीकांड के दोषीयों को सज़ा देने के बजाय सरकार द्वारा जनसंगठन कृषक मुक्ति संग्राम समिति के उपर दमन शुरू कर दिया गया। इस दमन का विरोध 25 जून को असम बंद, 26 जून को रेल रोको अभियान व 27 जून को जेल भरो अभियान से किया गया। व पूरे असम में बड़े पैमाने पर जगह जगह जनसभाओं का आयोजन कर इस दमन का विरोध किया गया। सबसे मज़ेदार बात यह रही कि जो सरकार अभी तीसरी बार चुनाव जीत कर भारी मतों से जीत कर आयी थी वह इस जनसंगठन के सामने हार गई व उसे यह समझ आ गया कि अगर अखिल गोगई को जल्दी रिहा नहीं किया गया तो यह जीती हुई सरकार गिर भी सकती है। स्वामी अग्निवेश, अशोक चैधरी राष्ट्रीय वनजन श्रमजीवी मंच , बौद्धीसत्व राय प्राकृतिक संसाधनों पर आधिकरित श्रमजीवी समुदाय फेडेरेशन व संदीप पांडे का एक जंाच दल द्वारा असम का दौरा कर वहां की गई गोलीकांड व अखिल गोगई की गिरफतरी का विरोध किया गया है। उन्होनें उन परिवारों से भेंट की गई जो इस गोलीकांड में शहीद हुए व कई काकी में जनसभाओं एवं प्रेस वार्ताओं को सम्बोधित किया।

असम में हुई इस गोलीकांड व जननेता की गिरफ्तारी कांग्रेस सरकार की मानसिकता को दर्शाती है जो कि विकास के नाम पर बड़ी बड़ी कम्पनीयों के करार कर प्राकृतिक संसाधन व जनता के आजिवीका को नष्ट करने की कोई कसर नहीं छोड़ना चाहती। जिस मुददे को लेकर इस समय राहुल गांधी उत्तर प्रदेश में पद यात्रा कर रहे हैं वही असम में उन्हीं की सरकार द्वारा किसानों, मज़दूरों की भूमि छीनी जा रही है व उनको गोली से उड़ाया जा रहा है। इस विरोधाभास की राजनीति को जनता अब बाखूबी समझ रही है व इन पार्टीयों के लिए जनता विरोधी विकास करना अब इतना आसान नहीं है यह कृषक मुक्ति संग्राम समिति के आंदोलन ने अपने नेता को रिहा कराकर साबित कर दिया है।