सीबीआई जाँच में फँसे बेटे को बचाने के लिए शकुनि बन गए रामगोपाल!
लखनऊ, 23 अक्टूबर। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में रविवार को सियासी घटनाक्रम पल-पल बदल रहा है। मंत्रिमंडल से कई मंत्रियों को बर्खास्त करने के बाद सख्त तेवर में दिख रहे मुख्यमंत्री अखिलेश की कुर्सी अब खतरे में है।
यह दावा सरकार के एक पुराने नौकरशाह का है।
उनका कहना है कि 24 अक्टूबर को मुलायम ने समाजवादी पार्टी (सपा) के पुराने वफादारों की बैठक बुलाई है। इस बैठक में मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को हटाने पर फैसला लिया जा सकता है।
पूर्व आईएएस सूर्य प्रताप सिंह ने 21 अक्टूबर को लिखी एक फेसबुक पोस्ट में दावा किया है कि अखिलेश यादव को 24 अक्टूबर को पार्टी से बाहर निकाला जा सकता है।
उन्होंने अपने फेसबुक पोस्ट में लिखा, "मुख्यमंत्री अखिलेश की 24 अक्टूबर को पार्टी से बर्खास्तगी हो सकती है। मुलायम ने 24 तारीख को सभी विधायकों और एमएलसी की बैठक बुलाई है। इस बैठक में विधायकों और एमएलसी के दबाव में यादव परिवार को एक होने के लिए बाध्य होना पड़ेगा या फिर सपा के विघटन का रास्ता तय हो जाएगा।"
उन्होंने लिखा कि बैठक में समझौता नहीं हो पाया तो विधानमंडल दल की बैठक में अखिलेश की बर्खास्तगी भी संभव है। उन्होंने कहा कि 23 तारीख सपा के भविष्य के लिए 'कत्ल की रात' और 24 तारीख 'विघटन का दिन' हो सकता है।

एक अन्य पोस्ट में सूर्य प्रताप सिंह ने लिखा-
“टीपू बन गया 'असली सपा' का नया 'सुल्तान' !
अब अखिलेश को मुलायम धमका नहीं सकते ... मुलायम की हैसियत ख़त्म होने का दौर शुरू। हालाँकि अखिलेश जन सहानुभूति लूटने के उद्देश्य से यही कहेंगे कि उन्होंने हमेशा नेता जी की बात मानी और मानेंगे, जबकि 'सुल्तान बना टीपूँ' अब पिता के सामने 'बाग़ी' सलीम के रूप में खड़ा है... शकुनि चाचा रामगोपाल कौरवी फ़ौज में मामा का रोल निभा रहा है।

अमर सिंह के क़रीबी लोगों के बहाने अखिलेश ने चाचा शिवपाल व उनके समर्थक मंत्रियों को बर्खास्त कर ठिकाने लगा दिया है।
अब क्या सम्भव है?

कल की बैठक में मुलायम अखिलेश को बर्खास्त कर शिवपाल को मुख्यमंत्री बनाए। और/या
ऐसा होने पर राज्यपाल floor of the house पर अखिलेश को majority सिध्द करने का मौक़ा देंगे। और अखिलेश यह कर भी देंगे इसमें कोई शक अब नहीं है। अखिलेश मुख्यमंत्री बने रहेंगे।
चूँकि पार्टी चुनाव चिन्ह 'साइकिल' रामगोपाल यादव के नाम से महासचिव के रूप में आवंटित है। अतः अखिलेश को प्रदेश अध्यक्ष घोषित होने पर मुलायम को किनारे कर सपा पर रामगोपाल व अखिलेश पूर्ण क़ब्ज़ा हो जाएगा। नयी पार्टी बनाने की आवश्यकता अखिलेश को नहीं पड़ेगी।
रामगोपाल यादव की बर्ख़ास्तगी या निलम्बन आज हो सकता है। रामगोपाल नयी सपा के मुलायम के स्थान पर राष्ट्रीय अध्यक्ष बन सकते हैं। जो नयी सपा व अखिलेश के लिए आत्मघाती होगा। रामगोपाल व उनका बेटा/बहु यादव सिंह प्रकरण में भ्रष्टाचार प्रकरण में CBI के नेट में हैं।

अब यह निश्चित है कि शकुनि चाचा रामगोपाल की छत्रछाया में टीपूँ अब पापा मुलायम के नियंत्रण से बाहर है लेकिन अखिलेश का यह कहना उनकी मजबूरी है कि 'वह नेता जी की बात मानते रहे है और मानते रहे हैं', सब जानते हैं कि अखिलेश का कथन अब वर्तमान में सत्य नहीं है.....अब बाग़ी सलीम, अपने पिता की पूर्ण नाफ़रमानी पर आमादा है.... एक तरफ़ अमर सिंह और दूसरी तरफ़ रामगोपाल खलनायक की भूमिका में हैं ...रामगोपाल ने अपने बड़े भाई मुलायम (व शिवपाल) को बेटे अखिलेश से बग़ावत कराके नीचा दिखाकर पता नहीं कौन से पुराने स्कोर settle किए हैं... यह आने वाला समय ही बताएगा।

शकुनि रामगोपाल की CBI से अपने बेटे व बहू को बचाने के लिए ये सब करना शायद मजबूरी भी हो !!!!!!”
सोशल मीडिया पर एक मैसेज भी वायरल हो रहा है, जिसमें उप्र में राष्ट्रपति शासन लगाने की बात चल रही है।
एक अन्य फेसबुक पोस्ट में सूर्य प्रताप सिंह ने लिखा –

रामगोपाल ने एक बार को छोड़कर ख़ुद कभी चुनाव नहीं लड़ा और जनता में उनकी कोई पहचान नहीं है... उनकी क्रियाशीलता केवल जेल में बंद नॉएडा के भ्रष्ट इंजीनियर यादव सिंह की बचाने व उनके द्वारा नॉएडा की लूट खसोट तक सीमित रही है। CBI जाँच में उनके सांसद बेटे का नाम फँसा है...यदि मोदी जी ने नहीं बचाया तो जेल जाना तय है। रामगोपाल का अखिलेश का साथ अपने को साफ़ सुथरा दिखाने की कवायत हो सकती है। अखिलेश को यदि अपनी छवि बचाना है तो रामगोपाल जैसे नॉएडा को लूटने वाले स्वार्थी भ्रष्ट लोगों से दूरी बनानी चाहिए।