उत्तर प्रदेश के उन्नाव में हो रही खजाने की खुदाई की खिल्ली उड़ाने वाले भारतीय जनता पार्टी के स्वयंभू प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को संत शोभन सरकार की एक छोटी सी चिट्ठी से ही दण्डवत् हो गये हैं।
खबर है कि मोदी ने एक नेता को भेजकर संत शोभन सरकार से सुलह की कोशिश की और ट्वीट कर उनकी तारीफ के पुल भी बाँधे। लेकिन संत शोभन सरकार पसीजे नहीं और न उन्होंने मोदी को माफ किया। समझा जाता है कि मोदी ने शुरू में संत शोभन सरकार को विहिप के कथित साधू-संतों और रामदेव-आसाराम की तरह ही समझा लेकिन मोदी के चेन्नई में दिये बयान के बाद शोभन सरकार की नाराजगी भरी चिठ्ठी ने न केवल मोदी के होश उड़ा दिये बल्कि पूरी भाजपा में हड़कंप मच गया और यह समझा दिया कि असली संत से उलझने का मतलब क्या होता है।
दरअसल संत शोभन सरकार का उन्नाव और उसके आस-पास के इलाकों में तो जबर्दस्त असर है ही साथ ही छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश के आदिवासियों में उनके लाखों शिष्य हैं। मोदी के बयान के बाद छग और मप्र में तीखी प्रतिक्रिया हुयी। सियासी गलियारों में चर्चा है कि छग के मुख्यमंत्री रमन सिंह ने भाजपा नेतृत्व को साफ बोल दिया कि मोदी को वह छत्तीसगढ़ में घुसने नहीं देंगे क्योंकि मोदी ने संत शोभन सरकार का मजाक उड़ाकर उनका (रमन सिंह) का सारा काम खराब कर दिया है। उसके बाद ही मोदी की घिग्घी बँध गयी।

एक निजी समाचार चैनल के मुताबिक शोभन सरकार के शिष्य का कहना है कि मोदी ने प्रणाम किया है और हमने केवल प्रणाम स्वीकार किया है। संत शोभन के प्रवक्ता ओम महाराज के मुताबिक उनके गुरु इस बात से नाराज हैं कि मोदी ने सपने से खुदाई की बात कैसे कही। जबकि खुदाई वैज्ञानिक आधार पर हो रही है। मोदी को भेजी अपनी चिट्ठी में संत शोभन सरकार ने काले धन के मामले पर भाजपा के नेतृत्व वाली पिछली राजग सरकार पर भी उंगली उठायी है।

शोभन सरकार ने अपनी चिट्ठी में लिखा था कि आपकी सरकार अटल जी के नेतृत्व में अपना कार्यकाल पूरा कर चुकी है। तब आपकी सरकार काला धन स्विस बैंक से क्यों नहीं ला पायी, मोदी जी एक सवाल और आपकी पार्टी आपकी ब्रांडिंग करने के लिये जितना धन प्रतिदिन खर्च कर रही है वो काला है या सफेद, क्या आप बताने की कृपा करेंगे। आप मीडिया की नजरों में देश के भावी प्रधानमंत्री के रूप में देखे जा रहे हैं। आम जनता और देश का संत समाज कुछ बिन्दुओं पर आपका नजरिया जानना चाहता है। मैं आपको सार्वजनिक बिन्दुवार चर्चा के लिये सादर आमंत्रित करता हूँ।

अब मोदी की समस्या यह है कि वह संत शोभन सरकार के सवालों का सही उत्तर दे ही नहीं सकते और अगर उनकी खुली चर्चा का प्रस्ताव स्वीकार कर लेते हैं तो भाजपा और मोदी की जनता के सामने पोल पट्टी खुलने का खतरा है।