असहिष्णुता पर बुद्धिजीवियों के विरोध का समर्थन किया माकपा ने
असहिष्णुता पर बुद्धिजीवियों के विरोध का समर्थन किया माकपा ने
नई दिल्ली। भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) ने देश में बढ़ रही सांप्रदायिकता और असहिष्णुता पर बुद्धिजीवियों के विरोध का समर्थन करते हुए कहा है कि भाजपा और आरएसएस पूरे देश में सांप्रदायिक नफरत और असहिष्णुता फैला रही है। विशेष रूप से बिहार चुनावों में यह तनाव काफी तेज हो गया।
यहां संपन्न माकपा की केंद्रीय समिति की बैठक में पार्टी की ओर से कहा गया कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के विभिन्न संगठनों द्वारा फैलाए जा रहे तनाव पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कोई भी कार्रवाई नहीं की। भाजपा और संघ परिवार ने सांप्रदायिक उन्माद को फैलाकर देश में ध्रुवीकरण करने की कोशिश की।
बुद्धिवादी विचारकों की हत्या, देश में बढ़ रही अन्य हिंसक घटनाओं औऱ देश भर में असहिष्णुता के प्रसार को को लेकर बुद्धिजीवियों के विरोध का समर्थन करते हुए माकपा ने कहा कि बड़ी संख्या में पुरस्कार जीतने वाले साहित्यकारों ने अपने साहित्य अकादमी और उत्कृष्टता पुरस्कार सरकार को लौटा दिए। इसके अलावा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिष्ठित इतिहासकारों, फिल्म से जुड़े हुए लोग, थिएटर व्यक्तित्व, वैज्ञानिकों और रचनात्मक कलाकारों ने भी विरोध जताया।
पार्टी ने कहा कि भारतीय बुद्धिजीवियों द्वारा इस तरह की कार्रवाई, सभी भारतीयों के संकल्प को मजबूत करने वाली थी।


