नई दिल्ली। अहमदाबाद विस्फोटों में महाराष्ट्र से नौजवानों के बरी हो जाने के बाद खुफिया एजेंसियां व सुरक्षा अधिकारी सवालों के घेरे में आ गए हैं, अब आरोप लग रहे हैं कि खुफिया और सुरक्षा एजेंसियां खुलकर सांप्रदायिक मानसिकता के तहत काम करती हैं। मांग उठ रही है कि इन नौजवानों को फर्जी फंसाने वाले पुलिस अधिकारियों व खुफिया एजेंसियों के अधिकारियों के विरुद्ध दंडात्मक कार्रवाई की जाए।
आतंकवाक के नाम पर कैद बेगुनाहों के रिहाई के लिए के काम करने वाले रिहाई मंच ने कहा है कि 2008 में अहमदाबाद में हुए बम धमाकों के बाद मीडिया को मेल भेजकर विस्फोट की जिम्मेदारी लेने के आरोप में महाराष्ट्र से जिन 23 युवकों को मकोका के तहत पकड़ा गया था, के निर्दोष साबित हो जाने के बाद दोषी खुफिया और सुरक्षा अधिकारियों पर कठोर कारवाई की जाए।
रिहाई मंच आजमगढ़ प्रभारी मसीहुद्दीन संजरी और तारिक शफीक ने कहा है कि कथित तौर पर इंडियन मुजाहिदीन द्वारा 2008 में अहमदाबाद में किए गए बम विस्फोटों की जिम्मेदारी लेने वाले मीडिया को भेजे गए ईमेल के आरोप में महाराष्ट्र के जिन 23 लड़कों को पकड़ा गया था, का मकोका केस से बरी हो जाना इस बात का सबूत है कि खुफिया और सुरक्षा एजेंसियां खुलकर सांप्रदायिक मानसिकता के तहत काम करती हैं। ऐसे में इन बेगुनाहों का जीवन बर्बाद करने वाले पुलिस और खुफिया अधिकारियों को राज्य सरकार द्वारा दंडित करते हुए निर्दोषों के पुनर्वास का पुख्ता इंतजाम किया जाए।