आई वुड लाइक टू सैल्यूट यू डैड
बर्खास्त आईपीएस संजीव भट्ट के बेटे का पापा के नाम मार्मिक पत्र
यह सरकार ऐसी है जो अपने खिलाफ बोलने वाले हर इंसान को तोड़ना चाहती है
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए मुसीबत का सबब बनने वाले आईपीएस अधिकारी संजीव भट्ट को गुजरात सरकार द्वारा नौकरी से बर्खास्त किए जाने के एक दिन बाद उनके बेटे शांतनु भट्ट ने लंदन से अपने पिता के समर्थन में एक चिट्ठी भेजी है। संजीव ने इस चिट्ठी को अपने फेसबुक पेज पर यह लिखते हुए साझा किया है, ‘श्वेता और मैं इतने प्यार करने वाले बेटे के होने पर बेहद गर्व महसूस करते हैं।’ चिट्ठी में लिखा है-
इस दुखद दिन पर जब भारतीय गणतंत्र अपने सबसे होनहार, कुशाग्र, ईमानदार और निडर अधिकारी को खो रहा है, मैं आपको सलाम करता हूँ डैड। मैं आपको सलाम करना चाहता हूँ और आपका शुक्रिया करना चाहता हूँ। मैं आपके बेटे के तौर पर और इस दुनिया के एक शिक्षित, जागरूक और जिम्मेदार नागरिक के तौर पर आपका शुक्रिया अदा करना चाहता हूँ, क्योंकि आपने बिना यह सोचे कि आप पर और भारतीय पुलिस सेवा के आपके करियर पर क्या असर पड़ेगा, वह किया जो करना सही था।
मैं आपका शुक्रिया अदा करना चाहता हूँ क्योंकि आप उन लोगों के लिए खड़े हुए जिनकी मदद माँगती चीख-पुकार और जिनका विरोध लोगों ने अनसुना कर दिया था। मैं आज आपसे यह कहना चाहता हूँ कि मैं आपके ऊपर कितना गर्व महसूस करता हूँ। ऐसा इसलिए क्योंकि आपने एक बेहद सुविधा संपन्न और खतरनाक व्यवस्था के खिलाफ अपनी पूरी ताकत और सामर्थ्य लगाकर बहुत मुश्किल लड़ाई लड़ने का जोखिम उठाया।
पर मैं आपको याद दिलाना चाहता हूँ कि यह लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई है, बल्कि यह लड़ाई तो और भी खतरनाक और गंदे स्तर पर पहुंच गई है। पर आप आज भी वही खड़े हैं जहां आप आज से 14 साल पहले साल 2002 में खड़े थे। आज भी आपके अंदर वही हिम्मत, वही निडरता है जो आज से 27 साल पहले उस समय थी जब आपने भारतीय पुलिस सेवा में एक अधिकारी के तौर पर कदम रखा था। आप तब भी भारतीय गणतंत्र पर हावी होने की कोशिश करने वाले सबसे घातक सरकार से भी टकराने को तैयार थे।
एक परिवार के तौर पर हम हमेशा आपके साथ खड़े रहे। आपका समर्थन करते रहे और हम आगे भी हमेशा ऐसा करते रहेंगे। अपने रास्ते से भटक चुके वह लोग जो मौजूदा सरकार को चला रहे हैं अब और भी मजबूती से हमारे परिवार को तोड़ने की कोशिश करेंगे।
पर मैं उन लोगों से कहना चाहता हूँ कि हमारा परिवार ऐसा परिवार है जो एक-दूसरे के साथ प्यार, भरोसे और एक-दूसरे के लिए बेपनाह इज्जत जैसी मजबूत कड़ी से जुड़े हैं। आपको और हमें तोड़ने की लगातार कोशिशें बेशक बेकार जाएँगी। ऐसी कोशिशें बल्कि हमें और भी मजबूत बनाएँगी और आपके प्रति हमारे समर्थन का जज्बा और भी ज्यादा मजबूत करेंगी। इसीलिए आप जिन कारणों से लड़ रहे हैं, उनके प्रति हमारा समर्थन भी बढ़ता जाएगा।
और आखिर में, मैं दुश्मनों की तरह बर्ताव करने वाली इस सरकार से आजाद होने के लिए आपको बधाई देना चाहता हूँ। यह सरकार ऐसी है जो अपने खिलाफ बोलने वाले हर इंसान को तोड़ना चाहती है। जो भी सच के लिए खड़ा होता है, उससे यह सरकार दुश्मनी निकालने की कोशिश करती है। आपकी जिंदगी के इस नए अध्याय में मैं आपको बहुत सारी शुभकामनाएँ देता हूँ।
आप वह सब कुछ कर सकें, हर वह चीज हासिल कर सकें जो आपको खुश और संतुष्ट करती हो। हम एक परिवार के तौर पर हमेशा आपके साथ-आपके पीछे खड़े होंगे। आपके हर फैसले में हम आपके साथ होंगे।
आपको बहुत सारा प्यार और सम्मान
शांतनु भट्ट
(एक ऐसा बेटा जिसे आपसे बेहद प्यार है और जिसे आप पर बहुत गर्व है।)
बुधवार को एक ट्वीट कर संजीव भट्ट ने लिखा, ‘भारतीय पुलिस सेवा में 27 साल तक काम करने के बाद आज निर्णायक तौर पर मुझे निकाल दिया गया। एक बार फिर नौकरी के योग्य हूँ। 🙂 कोई है मुझे नौकरी देने वाला?’
भट्ट साल 2011 में उस समय से ही निलंबित चल रहे थे जब उन्होंने उस समय की नरेंद्र मोदी सरकार को 2002 के दंगों के लिए घेरा था। 1988 बैच के आईपीएस अधिकारी भट्ट ने सुप्रीम कोर्ट में एक हलफनामा दायर कर कहा था कि 27 फरवरी 2002 को गांधीनगर स्थित मोदी के निवास स्थान पर हुई एक बैठक में वह भी मौजूद थे। भट्ट का दावा है कि उक्त बैठक में सीएम मोदी ने अधिकारियों से कहा, ‘हिंदुओं को अपना गुस्सा निकालने दें।’

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