आईआरसीटीसी मुम्बई कैटरिंग के 300 कर्मचारी हड़ताल पर, मुम्बई राजधानी, अगस्त क्रांति एक्सप्रेस बिना पेंट्री स्टाफ रवाना
आईआरसीटीसी मुम्बई कैटरिंग के 300 कर्मचारी हड़ताल पर, मुम्बई राजधानी, अगस्त क्रांति एक्सप्रेस बिना पेंट्री स्टाफ रवाना
मुम्बई: रेल बजट में रेलमंत्री द्वारा आईआरसीटीसी को कैटरिंग वापस करने पर वर्कर ख़ुशी से झूम उठे थे। कैटरिंग में ज्यादातर कर्मचारीगण 3 से 12 साल से लगातार काम कर रहे हैं और कार्यकुशल होने के कारण उन्हें उम्मीद थी कि उनकी सेवा परमानेंट की जायेगी। मगर यह क्या दुबारा कैटरिंग की सेवा मिलते ही ट्रेन से पैंट्रीकार को हटाने की कवायदाशुरू हो गयी। आज हद तो तब हो गयी जब मुम्बई राजधानी (12951) और अगस्त क्रांति (12953) ट्रेन के खुलने से पहले उसमें से एक पेंट्रीकार हटाकर स्टाफ शार्ट किया गया. कैटरिंग के कर्मचारीगण इस पर भड़क गये और इसका विरोध किया।
अपने बाकी साथियों की जीविका पर होते हमले से भाँप गये कि कल उनकी नौकरी पर भी हमला हो सकता है। इस परिस्थिति को देखते हुए आईआरसीटीसी डिपार्टमेंटल कैटरिंग कॉन्ट्रैक्ट एम्प्लाइज एसोसियेशन मुम्बई के बैनर तले लगभग 300 कर्मचारी हड़ताल पर चले गए।
हड़ताली कर्मचारियों से जुड़े सूत्रों ने बताया कि खतरे को भांपते हुए मौके पर प्रबंधन ने जीआईपी और आईपीएफ को बुला लिया। मगर कर्मचारियों ने शांतिपूर्ण और अपनी यूनियन के अनुशासनात्मक तरीके से प्रदर्शन करते हुए अपनी एकता का परिचय दिया। आईआरसीटीसी के प्रबंधकों के नौकरी से निकालने के धमकी से भी कर्मचारीगण टस से मस नही हुए और एक स्वर में सारे वर्कर्स ने ट्रेन में चढ़ने से मना कर दिया।
आख़िरकार मजबूरन आईआरसीटीसी के ऑफिसर को खुद से भाग-भाग कर खाने का समान ट्रेन में चढ़ाना पड़ा और तो और ऑफिस स्टाफ को ट्रेन में चढ़ाकर किसी तरह उन्होंने मुम्बई राजधानी(12951) में स्टाफ पूरा कर दिया। मगर अगस्त क्रांति एक्सप्रेस(12953) को स्टेशन के बिना किसी पेंट्री स्टाफ के खोलना पड़ा।
हड़ताली कर्मचारियों के सहयोगी सुरजीत श्यामल का दावा है कि कल विभिन्न राज्यों से ट्रेन लौटने पर हड़ताली कर्मचारियों की संख्या कल तक 800 तक पहुँचने की उम्मीद है। उन्होंने कहा कि आईआरसीटीसी में कैटरिंग के कर्मचारियों को मात्र 8 से 10 हजार में बिना किसी अन्य सुविधा के लगातार काम करवाया जाता है।
विदित हो कि आईटी सेंटर, आईआरसीटीसी, दिल्ली के कर्मचारीगण 92 कर्मचारियों को गैर कानूनी नौकरी से निकालने व् अन्य मांगों के लिए पिछले 65 दिन से भी अधिक से धरना पर बैठे हैं। मगर प्रबंधकों ने कोई सुध नही ली है और तो केंद्र सरकार का मजदूर विरोधी होने के कारण और तेजी से मजदूरों के अधिकारों के ऊपर लगातार हमला किया जा रहा है।


