आईएसआईएस के नाम पर मुस्लिमों को फंसाने और मारने की साजिश रच रही हैं खुफिया एजेंसियां- रिहाई मंच
आईएसआईएस के नाम पर मुस्लिमों को फंसाने और मारने की साजिश रच रही हैं खुफिया एजेंसियां- रिहाई मंच
संयुक्त राष्ट्र संघ में इजराइल के खिलाफ मतदान में भारत की गैर हाजिरी ने पूरी दुनिया में देश को शर्मसार किया
एक ही आदमी हर चार-पांच महीने पर कैसे मारा जा सकता है?
लखनऊ, 5 जुलाई 2015। रिहाई मंच ने आतंकवाद के आरोपी संजरपुर आजमगढ़ के बड़ा साजिद के सीरिया में आईएसआईएस की तरफ से लड़ते हुए मारे जाने की खबरों को खुफिया और सुरक्षा एजेंसियों की फिर से मुस्लिम युवकों को आतंकवाद के नाम पर फंसाने और मारने की बड़ी योजना का हिस्सा बताया है। मंच ने कहा खुफिया एजेंसियां अब आईएम, सिमी के बाद आईएसआईएस के नाम पर मुस्लिम युवकों को फंसाने के लिए माहौल बना रही हैं।
रिहाई मंच के अध्यक्ष मोहम्मद शुऐब ने कहा कि संजरपुर के जिस युवक बड़ा साजिद के सीरिया में मारे जाने की खबरें खुफिया विभाग फैला रहा है, उसके बारे में पहले भी एक बार अफगानिस्तान में तालिबान की तरफ से लड़ते हुए मारे जाने और दूसरी बार एक और विदेशी जमीन पर मारे जाने की खबर इसी तरह सुर्खिर्यों में खुफिया विभाग फैला चुका है। उन्होंने सवाल किया कि एक ही आदमी हर चार-पांच महीने पर कैसे मारा जा सकता है, इसे खुफिया एजेंसियों को जरूर बताना चाहिए।
मंच के अध्यक्ष ने कहा कि देश के अंदर फर्जी एंकाउंटरों पर उठने वाले सवालों के कारण खुफिया एजेंसियां ऐसे कथित तौर पर फरार बताए जाने वाले युवकों, जो दरअसल इन्हीं एजेंसियों के पास हैं, को आईएसआईएस के नाम पर किसी दूसरे देश में मारे जाने की खबर फैलाकर सवालों से बचना चाहती हैं। उन्होंने कहा कि इस पूरी योजना का एक पहलू बिहार और उत्तर प्रदेश में होने वाले चुनावों से पहले फिर से खुफिया विभाग के जरिए आईएसआईएस के नाम पर धर पकड़ करना भी है क्योंकि इंडियन मुजाहिदीन के नाम पर अब कार्रवाई मुश्किल हो गई है। क्योंकि समाज जान चुका है कि यह भारतीय खुफिया विभागों का ही कागजी संगठन हैं।
रिहाई मंच अध्यक्ष ने कहा कि अजमेर दरगाह विस्फोट और समझौता एक्सप्रेस विस्फोट के आरोपियों का अपने बयानों से पलटने की खबर आना आश्चर्यजनक नहीं है। यह साबित करता है कि मुम्बई में इन मामलों में पब्लिक प्रोसिक्यूटर रहीं रोहिनी सैलियन का आरोप बिल्कुल सही है कि एनआईए हिंदुत्ववादी आतंकियों के बरी होने का खाका बना चुका है। उन्होंने कहा कि अजमेर दरगाह विस्फोट के 15 मुख्य गवाहों में से 14 का पलट जाना, जिनमें से कि सभी संघ परिवार से जुड़े हैं और जिनमें से एक झारखंड सरकार में मंत्री भी है और समझौता एक्सप्रेस के संघ परिवार से जुड़े तीन आरोपियों का अपने पूर्व बयानों से मुकर जाना, साबित करता है कि इन सभी मामलों में एनआईए हिंदुत्ववादी आरोपियों को छुड़ा ले जाने की योजना में काफी हद तक सफल हो चुका है। उन्होंने कहा कि इंसाफ के इस कत्ल पर सुप्रीम कोर्ट को स्वतः संज्ञान लेना चाहिए ताकि न्याय व्यवस्था में लोगों का बचा खुचा यकीन बच सके।
मैग्सेसे पुरस्कार से सम्मानित समाजसेवी संदीप पांडेय ने भारत द्वारा संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद में इजराइल के खिलाफ आए प्रस्ताव पर भारत द्वारा गैर हाजिर रहने पर इसे भारतीय विदेश नीति की स्थापित मूल्यों पर हमला बताया है जो अब तक इजराइल के मानवता विरोधी कृत्यों के खिलाफ खड़ा रहा है। उन्होंने कहा कि महात्मा गांधी ने हमेशा फिलीस्तीन का पक्ष लिया और इजराइल के अवैध निर्माण का विरोध किया था और इस मूल्य को अब तक भारत की विभिन्न सरकारें मानती रही हैं। लेकिन संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद में भारत की गैरहाजिरी ने पूरी दुनिया में भारत को शर्मशार कर दिया है।


