'आग के राग'-अँधेरे दौर में उजाले, उम्‍मीद और संकल्‍पों के गीत
'आग के राग' - 'विहान' द्वारा क्रान्तिकारी गीतों और कविताओं की प्रस्‍तुति
लखनऊ, 22 फरवरी। अनुराग पुस्‍तकालय में आज 'विहान' संगीत टोली ने 'आग के राग' कार्यक्रम के तहत अनेक क्रान्तिकारी और जनपक्षधर गीतों और कविताओं की प्रस्‍तुति की।
कार्यक्रम की शुरुआत में सत्‍यम ने क‍हा कि आज हम एक अँधेरे दौर से गुज़र रहे हैं जब अभिव्‍यक्ति की आज़ादी पर सत्ता और कट्टरपंथी ताक़तों के हमले बढ़ रहे हैं और समाज में जनवादी स्‍पेस सिकुड़ता जा रहा है। ऐसे में उम्‍मीदों, स्‍वप्‍नों और संघर्ष के संकल्‍पों से भरे गीत और कविताओं को लोगों के बीच लेकर जाने की कोशिश 'विहान' की टोली कर रही है। महाराष्‍ट्र में कट्टरपंथी ताक़तों के हमले में गत दिवस दिवंगत हुए गोविन्‍द पानसरे की शहादत ने एक बार हमें याद दिलाया है कि धार्मिक जुनूनी शक्तियों का समय रहते प्रतिरोध नहीं किया गया तो वे हर स्‍वतंत्र आवाज़ को कुचल डालेंगी।
कार्यक्रम में 'विहान' ने फ़ैज़ की प्रसिद्ध नज़्मों 'दरबारे वतन में जब इक दिन सब जाने वाले जायेंगे, कुछ अपनी कज़ां को पहुंचेंगे, कुछ अपनी जज़ा ले जायेंगे', 'चलो फिर से मुस्‍कुरायें' और 'सिपाही का मर्सिया' की ख़ूबसूरत प्रस्‍तुति की। इसके बाद उन्‍होंने चिली के लोकप्रिय जनकवि और गायक विक्‍टर खारा की बर्बर हत्‍या के बारे में एक बेहद मार्मिक गीत प्रस्‍तुत किया। चिली के तानाशाह पिनोशे के सैनिक अफसरों ने 1973 में विक्‍टर खारा की एक स्‍टेडियम में नृशंस हत्‍या कर दी थी। प्रत्‍यक्षदर्शियों के मुताबिक मरते दम तक विक्‍टर गाता रहा था।
विहान ने ब्रेख्‍त का गीत 'वो सबकुछ करने को तैयार, सभी अफसर उनके', शशिप्रकाश का गीत 'जिन्‍दगी ने एक दिन कहा कि तुम लड़ो', जॉन लेनन का गीत 'इमैजिन' और पॉल रॉब्‍सन के प्रसिद्ध गीत 'ओल्‍ड मैन रिवर' पर आधारित और भूपेन हज़ारिका द्वारा गाया लोकप्रिय गीत 'विस्‍तार है अपार प्रजा दोनों पार... ओ गंगा बहती हो क्‍यों' भी प्रस्‍तुत किये और समापन किया नील यंग के गाये गीत 'ओल्‍ड मैन' से जो एक मेहनतकश व्‍यक्ति की कहानी कहता है। बाद में श्रोताओं की माँग पर 'विहान' ने मनबहकी लाल रचित व्‍यंग्य गीत 'आलू-प्‍याज के इतने दाम, जै श्रीराम-जै श्रीराम' प्रस्‍तुत किया।
सत्‍यम ने बर्टोल्‍ट ब्रेख़्ट की कविता 'अगली पीढ़ी के नाम' और पाश की कविता 'धर्मदीक्षा के लिए विनयपत्र' का पाठ किया।
कार्यक्रम के बाद युवा संगीतकारों, संस्‍कृतिकर्मियों और श्रोताओं के बीच काफी दिलचस्‍प बातचीत का दौर चला जिसमें बदलाव और बेहतर समाज बनाने के संघर्ष में संगीत, साहित्‍य और संस्‍कृति की भूमिका पर खुलकर चर्चा की गई। बातचीत में विहान के अभिनव, कवयित्री कात्‍यायनी, रिहाई मंच से जुड़े फिल्‍मकार शाहनवाज़ आलम और राजीव यादव, नाट्यकर्मी सुब्रत और नितिन, कवि अनिल श्रीवास्‍तव, सत्‍यम, पत्रकार संजय श्रीवास्‍तव, युवा सामाजिक कर्मी प्रत्‍यूष, अमेन्‍द्र कुमार, शाकम्‍भरी, शिप्रा, गीतिका, उड़ीसा के धर्मवीर आदि ने प्रमुख रूप से हिस्‍सेदारी की।
- गीतिका