आज के समय में साम्राज्यवाद : उद्भव, कार्यप्रणाली और गतिकी
आज के समय में साम्राज्यवाद : उद्भव, कार्यप्रणाली और गतिकी
साम्राज्यवाद व भूमंडलीकरण के विषय पर पर 24 नवम्बर से लखनऊ में पाँच दिवसीय अन्तरराष्ट्रीय संगोष्ठी
छठी अरविन्द स्मृति अन्तरराष्ट्रीय संगोष्ठी में देशभर से आये विद्वानों और सामाजिक कार्यकर्ताओं के अलावा विदेशों से भी भागीदारी होगी
लखनऊ, 21 नवम्बर। ‘आज के समय में साम्राज्यवाद : उद्भव, कार्यप्रणाली और गतिकी’ विषय पर 24 नवम्बर से लखनऊ में शुरू हो रही पाँच दिवसीय संगोष्ठी में साम्राज्यवाद, भूमंडलीकरण और वैश्विक आर्थिक संकट से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर गहन चर्चा होगी। संगोष्ठी में देश के विभिन्न राज्यों के विद्वानों, लेखकों, सामाजिक कार्यकर्ताओं के साथ ही विदेशों से भी इस विषय से जुड़े कई अध्येता भागीदारी करेंगे।
अन्तरराष्ट्रीय बौद्ध अध्ययन संस्थान, गोमतीनगर के सभागार में 24 से 28 नवम्बर तक चलने वाली संगोष्ठी के आयोजक ‘अरविन्द स्मृति न्यास’ की मुख्य न्यासी मीनाक्षी ने बताया कि आज साम्राज्यवाद के शोषण से एशिया, अफ़्रीका और लातिन अमेरिका के देशों की जनता तबाह है और कर्ज़ों के बोझ से दबी हुई है। खासकर मध्य-पूर्व व पश्चिम एशिया का क्षेत्र अमेरिका की साम्राज्यवादी आक्रामकता का केन्द्र और विभिन्न साम्राज्यवादी शक्तियों की होड़ का अखाड़ा बना हुआ है। इन देशों की जनता पिछले कई दशकों से युद्ध की विभीषिका झेल रही है। दुनिया के कई अन्य देशों में साम्राज्यवादी हस्तक्षेप और दबाव ने वहाँ की अर्थव्यवस्था को तबाह कर दिया है। लगातार जारी वैश्विक आर्थिक संकट ने इस समस्या को और गंभीर बना दिया है। साम्राज्यवाद के विभिन्न पहलुओं को समझने तथा इसके प्रतिरोध की रणनीतियों पर आज विश्वभर में विचार-मन्थन जारी है।
संगोष्ठी में इस विषय के विभिन्न आयामों पर कई महत्वपूर्ण आलेख प्रस्तुत किये जायेंगे। साम्राज्यवाद के मार्क्सवादी सिद्धान्तों पर 'आह्वान' पत्रिका के सम्पादक अभिनव सिन्हा, अन्तर-साम्राज्यवादी प्रतिस्पर्धा और भविष्य की सम्भावनाओं पर पंजाबी पत्रिका 'प्रतिबद्ध' के सम्पादक सुखविन्दर, भूमण्डलीकरण पर आनन्द सिंह, साम्राज्यवाद के उत्तर-मार्क्सवादी सिद्धान्तों पर शिवानी, प्रभात पटनायक के साम्राज्यवाद के सिद्धान्त की आलोचना पर प्रो. बिपिन बालाराम, विश्व पूँजीवाद के वर्तमान संकट पर अभिनव सिन्हा, साम्राज्यवाद के बुनियादी अंतरविरोधों पर तपीश मैन्दोला, लातिन अमेरिका में साम्राज्यवाद पर लता कुमारी, आज के दौर में साम्राज्यवाद पर विजय कुमार एवं अक्षय के आलेखों के अलावा विश्वभारती विश्वविद्यालय, शान्तिनिकेतन के डॉ. एम.पी. टेरेंस सैमुअल, प्रशान्त बनर्जी, मो. नज़मुल हसन, गार्गी मुखर्जी, अनूप कुमार मन्ना भी अपने आलेख प्रस्तुत करेंगे।
न्यूयॉर्क से आये एरिक श्मिट वर्तमान अन्तरराष्ट्रीय परिस्थिति पर अपना आलेख प्रस्तुत करेंगे तथा न्यूयॉर्क युनिवर्सिटी के प्रो. इमैनुएल नेस और वेन स्टेट युनिवर्सिटी, मिशिगन की प्रो. सारिका चन्द्रा स्काइप के ज़रिए प्रस्तुतिकरण देंगी। नेपाल के प्रमुख मार्क्सवादी विद्वान एवं साहित्यकार निनु चपागाईं तथा मुम्बई से आये हर्ष ठाकोर भी अपने विचार व्यक्त करेंगे।
संगोष्ठी के विभिन्न सत्रों में होने वाली चर्चा में लखनऊ शहर के लेखकों एवं बुद्धिजीवियों के अलावा उत्तर प्रदेश, दिल्ली, उत्तराखंड, बिहार, पंजाब, हरियाणा, महाराष्ट्र, राजस्थान, केरल, गुजरात, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, नेपाल आदि से आये अध्येता एवं सामाजिक कार्यकर्ता हिस्सा लेंगे। नेपाल से संगोष्ठी के लिए विशेष रूप से आने वाले दल में नेपाल प्रगतिशील लेखक संघ के राष्ट्रीय परिषद सदस्य प्रमोद धिताल, लेखिका सरिता तिवारी, अवाया श्रेष्ठ, गणेश मैनाली, भीम ओली आदि प्रमुख हैं।
‘दायित्वबोध’ पत्रिका के सम्पादक तथा प्रखर वामपन्थी कार्यकर्ता एवं बुद्धिजीवी दिवंगत का. अरविन्द सिंह की स्मृति में अरविन्द स्मृति न्यास की ओर से हर वर्ष सामाजिक बदलाव के आन्दोलन से जुड़े किसी अहम सवाल पर संगोष्ठी का आयोजन किया जाता है। पहली दो संगोष्ठियाँ दिल्ली व गोरखपुर में मज़दूर आंदोलन के विभिन्न पहलुओं पर हुई थीं जबकि तीसरी संगोष्ठी भारत में जनवादी अधिकार आंदोलन के सवाल पर लखनऊ में आयोजित की गई थी। चौथी संगोष्ठी जाति प्रश्न एवं मार्क्सवाद विषय पर चंडीगढ़ में तथा पांचवी संगोष्ठी समाजवाद की समस्याएँ विषय पर इलाहाबाद में आयोजित हुई थी।
सुश्री मीनाक्षी ने कहा कि लखनऊ में बौद्धिक सरगर्मियाँ लगातार बनी हुई हैं और हमें विश्वास है कि यहाँ के सामाजिक-राजनीतिक कार्यकर्ता तथा बुद्धिजीवी इस संगोष्ठी में होने वाले विचार-विमर्श में खुलकर हिस्सा लेंगे और विचारोत्तेजक बहस-मुबाहसे की पहले की संगोष्ठियों की परम्परा को यहाँ एक नया आयाम मिलेगा।
उन्होंने बताया कि पहले दिन संगोष्ठी का उद्घाटन 11 बजे होगा। इसके अलावा प्रतिदिन दो सत्रों में सुबह 10 बजे से रात के आठ बजे तक संगोष्ठी चलेगी तथा अंतिम दिन 28 नवम्बर को शाम 7 बजे सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किया गया है।


