काँग्रेस से ज्यादा सादगी आज भी किसी के पास नहीं है
चंचल
'आप' आ ही गये। स्वागत है। काँग्रेस ने अच्छा किया आपको समर्थन दे कर। आप पर कई पत्रकार दोस्तों और विवेकशील कलाबाजों की टिप्पणी देख रहा था। एक से बढ़कर एक स्वागत गीत सोहर की धुन चीखना मजेदार भी लगा।
सबसे अच्छी बात लगी कि लोग अब एक बार फिर 'सादगी' को पसंद करने लगे हैं। लाल बत्ती और पुलिस की सुरक्षा को नकारने लगे हैं यह शुभ है। आजादी की लड़ाई से ही यह हमारा आत्मबल रहा है। आजादी के बाद भी नेहरू काल तक जारी रहा। डॉ. लोहिया इस सादगी के सबसे बड़े पैरोकार रहे। आज 'आप 'टीम में जो भी बैठे हैं सब डॉ. लोहिया के लोग हैं। इनसे उम्मीद है कि सादगी और फिजूल खर्ची के खिलाफ उदाहरण देते रहें। 'आप' की यह दिशा किसी और को नहीं, खुद काँग्रेस को सचेत कर देगी कि यह सादगी और यह जनमन के साथ संवाद तुम्हारा ( काँग्रेस का ) बनाया हुआ स्थापित ढाँचा रहा है, उसे फिर स्वीकार करो।
काँग्रेस से ज्यादा सादगी आज भी किसी के पास नहीं है। कई लोग इस बात से चौकेंगे, हमें मालूम है। लेकिन यह सच है। गांधी से लेकर इंदिरा गांधी फिर राजीव गांधी, विद्याचरण शुक्ला इसी सियासत के चलते अपनी जान दे चुके हैं। 'आप' इस दिशा में कदम रख रही है उसका स्वागत होना चाहिए। क्यों कि आज जो पीढ़ी जवान हो रही है इसने बीस साल से वही सियासी समाज देखा है जो विलासिता में आकंठ डूबा रहा और उसका भोंडा प्रदर्शन करता रहा। उसने सियासत का वह दौर नहीं देखा है, जब समूचा समाज ही सादगी से चल रहा था। बीस साल में फ़ैली और बढ़ी इस बीमारी के इलाज के लिये जरूरी है कि नयी पहल हो।
अब आइये रोजमर्रा की जरूरी जरूरियात की जद्दोजहद पर जिस पर 'आप' की नींव पड़ी है। पानी, बिजली और महँगाई। सम्भव है 'आप' का यह प्रयोग आमजन से भी कुछ माँगे। पहला- फिजूल खर्ची पर प्रतिबन्ध लगाओ 'यहाँ जनता को भी 'सादगी' का उदाहरण देना पड़ेगा। 'नेता' की सादगी अगर पसंद है तो आओ थोड़ी सादगी तुम भी शुरू कर दो। बिजली का दाम अपने आप गिर जायेगा। ( दिल्ली दुनिया के उन बड़े शहरों में शामिल है जहाँ प्रति व्यक्ति बिजली और पानी का सबसे ज्यादा, सबसे बेजा इस्तेमाल होता है।) क्या जनता इसके लिए तैयार मिलेगी ? अभी नहीं। आदत बदलने में वक्त लगेगा।
काँग्रेस इस जनता के इस सोच का स्वागत करेगी। यह 'आप' को मिलनेवाले समर्थन का एक हिस्सा है। आप की यात्रा मंगलमय हो।
चंचल। लेखक वरिष्ठ पत्रकार, चित्रकार व समाजवादी आंदोलन के कर्णधार हैं। बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय छात्रसंघ के अध्यक्ष रहे चंचल जी रेल मंत्रालय के सलाहकार भी रहे हैं