आप की विचार शून्यता अथवा विचारधारा को गौण करके व्यक्ति केन्द्रित राजनीति के दुष्परिणाम बहुत होंगे। आत्म शुचिता के भयंकर रोग से ग्रस्त आप पार्टी को दिल्ली में समस्त मोदी-कांग्रेस विरोधी राजनीतिक दलों ने समर्थन दिया, अब देखना होगा संसद में चार सदस्यों वाली इस पार्टी का देश के अन्य विपक्षी दलों खासकर वामपंथी दलों के प्रति क्या रुख होगा?
दिल्ली में आप का मत प्रतिशत 30 से उछल कर 54 % और 28 सीटों से बढ़ कर 67 हो गयी हैं। कांग्रेस 25 % से सिमट कर 9.7% पर लुढ़की जबकि भाजपा का कमोबेश 33% वोट बैंक साबित रहा लेकिन सीटें 32 से 3 पर पहुँच गयीं।

भारत में आम आदमी को अब भाजपा के विकल्प के रूप में प्रस्तुत किया जायेगा जिसने पानी और बिजली के मुद्दे पर चुनाव लड़ा है। देश के समक्ष तरो ताजा विकल्प को परोसने वालों से अपील है कि वतर्मान युग में भारत विश्व पूंजी के एक छोटे खिलाड़ी के रूप में अपनी इनिंग खेलने की तैय्यारी कर रहा है जिसका कप्तान मोदी है और वह खूंखार वित्तीय पूंजी के सामने कालीन बिछाये बैठा है। देश के सम्मुख फासीवादी खतरे, साम्प्रदायिकता, जल जंगल जमीन, रोजगार, पर्यावरण प्राकृतिक संपदा, संपत्ति के सामान वितरण, शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाएं, परिवहन ऐसे मुद्दे हैं जिस पर केजरीवाल स्पष्ट नहीं है।

आत्म शुचिता के भयंकर रोग से ग्रस्त आप पार्टी को दिल्ली में समस्त मोदी-कांग्रेस विरोधी राजनीतिक दलों ने समर्थन दिया, अब देखना होगा संसद में चार सदस्यों वाली इस पार्टी का देश के अन्य विपक्षी दलों खासकर वामपंथी दलों के प्रति क्या रुख होगा?

आप की विचार शून्यता अथवा विचारधारा को गौण करके व्यक्ति केन्द्रित राजनीति के दुष्परिणाम बहुत होंगे। शासकवर्गीय दलों का यह सचेतन प्रयास होता है कि जनता विचार से नहीं व्यक्ति से जुड़े। आज जो तत्व इस राजनीति को हवा दे रहे हैं उनसे भविष्य में वही प्रश्न पूछे जायंगे जो आज वी पी सिंह आदि के समर्थकों से पूछे जाते हैं।
शमशाद इलाही शम्स
शमशाद इलाही शम्स। लेखक टोरंटो स्थित टीकाकार हैं।