भारत हमारा देश है। इसे बेचने वालों को पहचानिये
संध्या नवोदिता
आप जहाँ भी हैं अपने देश के लिए बोलिये ! इस देश की धरती, इसके नमक के लिए बोलिये! इस धरती का नमक हमारे लहू में बहता है। इस भारत देश के लिये बोलिये जिसने हमें दर्शन और मानवीयता की उच्च विरासत दी है।
इस देश के सिपाही के लिए बोलिये, हिफाज़त में पर्वत की तरह डटे जवान के लिए बोलिये, इस देश की मिट्टी को अपने खून पसीने से सींच रहे किसान के लिए बोलिये, चट्टानों को हिलाने का हौसला रखने वाले नौजवान के लिए बोलिये!
बोलिये, क्योंकि ये हैं तो देश है, ये हैं तो हम हैं, इन्हीं से हमारी नींदें सुरक्षित हैं।
तो इनकी रोजी रोटी, इनकी सेहत, इनकी पढ़ाई, इनके रोजगार के लिए बोलिये।
सोचिये और इनकी तकलीफों को दूर करने के लिए अपनी आवाज़ का साथ दीजिये। भारत देश जिसके लिए हमारा जीवन ही कर्जदार है, उसकी धरती, उसकी नदियों, उसका लोहा, खनिज इस देश की 125 करोड़ जनता का है। भारत हमारा देश है। इसे बेचने वालों को पहचानिये।
ज़बरदस्त वक्तव्य !! जवान, किसान और नौजवान की तकलीफ एक ही है। आज तमाम उत्पीड़ित जनता का साथ आना ज़रूरी है । मुट्ठी भर कारपोरेट के हाथ देश को नीलाम करने वालों के खिलाफ बोलना होगा। भारत की जनता ज़िंदाबाद !! ज़िंदाबाद मेरे प्यारे देश !! तुम्हारी तार्किक विरासत ज़िंदाबाद ! तुम्हारे सिपाही और जवान ज़िंदाबाद! तुम्हारे किसान ज़िंदाबाद! तुम्हारे छात्र और नौजवान ज़िंदाबाद !