हिन्दुओं की आबादी कम हो जाने के डर से ज़्यादा बच्चे पैदा करने की वकालत-आज भारत में 85 प्रतिशत हिन्दू आबादी के बावजूद संघ के उग्रवादी घटकों को लगता है कि उनकी आबादी कम है। यह मंज़र तब है जब कि संघ के नामचीन स्वयंसेवक नरेन्द्र भाई मोदी की राजग सरकार के सदस्यों की संख्या 543 में 362 है और फिर भी लगता है कि 13 प्रतिशत मुसलमान और दो प्रतिशत इसाई उन्हें खा जायेंगे....
लोक सभा और संघ परिवार के सम्मेलनों जो लोग हिन्दुओं की आबादी कम हो जाने के डर से ज़्यादा बच्चे पैदा करने की वकालत कर रहे हैं ये वे लोग हैं जिन्होंने न खुद बच्चे पैदा करने की जिम्मेवारी निभाई न उन्हें पढ़ा लिखा कर संस्कारयुक्त नागरिक बनने का बीड़ा उठाया लेकिन दूसरों को नसीहत दे रहे हैं कि वे चार बच्चे पैदा करें। किसी को चार से संतुष्टि नहीं हुई और उसने पांच का नारा उछाल दिया। इस पर भी एक महात्मा को लगा कि इससे भी बात नहीं बनेगी तो उसने एक हिन्दू औरत को दस बच्चे पैदा करने का प्रवचन सुनाकर अपनी जाति की सुरक्षा को सुदृढ़ करने का धार्मिक कत्र्तव्य पूरा किया।
किसी ने उनसे पूछने का साहस नहीं किया कि बाबा आपने तो वच्चे पैदा करना दूर किसी औरत को पत्नी होने का गौरव भी प्रदान नहीं किया है तब आप दूसरों को इस नरक में क्यों धकेल रहे हैं? आपको न तो पति की जिम्मेवारियों का एहसास है न पिता होने के संकट का अनुभव।
बाबा लोगों को लगता है बच्चे पैदा करना आसान है लेकिन वे नहीं जाने कि उन्हें पालना शिक्षित करना और अपने पांव पर खड़े होकर रोजी रोटी कमाने लायक बनाने में कितने पापड़ बेलने पड़ते हैं।
ये बाबा लोग लोग ज़्यादा बच्चे पैदा करने की बात करके लोगों को अनपढ़ और कंगाल रखना चाहते हैं ताकि इनके अंधविश्वास का ध्ंाधा बेराकटोक चलता रहे। किसी बाबा या अन्य हिन्दुत्त्ववादी नेता ने गरीब बच्चों की शिक्षा के बारे बात नहीं की न उन्होंने युवाओं में व्याप्त बेरोज़गारी का अहसास है जबकि लव जिहाद और घर वापसी के लिए लम्बी चैड़ी दलीलें दे कर जनता को गुमराह कर रहे है।
किसी ने ठीक सवाल पूछा था कि वापस आये हुए को आप अपने मन्दिरों में भी आने देंगे तो जवाब दिया गया कि उन्हें उनके लिए सीमित स्थान तक ही पंहुच बनाने का हक होगा। फिर धर्म के इन ठेकेदारों से पूछा जाये तो वापस आने पर भी उस आदमी को घर तो मिला नही ंतो घरवापसी कैसी ? आज भारत में 85 प्रतिशत हिन्दू आबादी के बावजूद संघ के उग्रवादी घटकों को लगता है कि उनकी आबादी कम है। यह मंज़र तब है जब कि संघ के नामचीन स्वयंसेवक नरेन्द्र भाई मोदी की राजग सरकार के सदस्यों की संख्या 543 में 362 है और फिर भी लगता है कि 13 प्रतिशत मुसलमान और दो प्रतिशत इसाई उन्हें खा जायेंगे इसलिए लव जिहाद और घरवापसी जैसी तिक्कड़में ज़रुरी है?
सुन्दर लोहिया
सुन्दर लोहिया, लेखक वरिष्ठ साहित्यकार व स्तंभकार हैं। आपने वर्ष 2013 में अपने जीवन के 80 वर्ष पूर्ण किए हैं। इनका न केवल साहित्य और संस्कृति के उत्थान में महत्वपूर्ण योगदान रहा है बल्कि वे सामाजिक जीवन में भी इस उम्र में सक्रिय रहते हुए समाज सेवा के साथ-साथ शिक्षा के क्षेत्र में भी काम कर रहे हैं। अपने जीवन के 80 वर्ष पार करने के उपरान्त भी साहित्य और संस्कृति के साथ सार्वजनिक जीवन में सक्रिय भूमिकाएं निभा रहे हैं। हस्तक्षेप.कॉम के सम्मानित स्तंभकार हैं।