इलेक्ट्रिसिटी(अमेंडमेंट) बिल 2014 का विरोध
इलेक्ट्रिसिटी(अमेंडमेंट) बिल 2014 का विरोध
केंद्र सरकार द्वारा बिजली के निजीकरण हेतु लोकसभा में प्रस्तुत विद्युत अधिनियम में संशोधन बिल का प्रबल विरोध होगा
निजी घरानों को मुनाफे के लिए लाया गया है संशोधन बिल जनवरी में राष्ट्रव्यापी आन्दोलन का फैसला
नई दिल्ली। बिजली आपूर्ति के निजीकरण हेतु केंद्र सरकार द्वारा 19 दिसंबर को लोकसभा में प्रस्तुत इलेक्ट्रिसिटी(अमेंडमेंट) बिल 2014 को निजी घरानों का एजेण्डा बताते हुए बिजली कामगारों और इन्जीनियरों ने इसका प्रबल विरोध करने का ऐलान किया है। इलेक्ट्रिसिटी (अमेंडमेंट) बिल 2014 को जनविरोधी करार देते हुए आल इंडिया पावर इंजीनियर्स फेडरेशन ने कहा है कि बिल का मकसद बिजली आपूर्ति को निजी हाथों में सौंपना है जिससे आम जनता के लिए बिजली की दरों में भारी वृद्धि होना तय है।
आल इंडिया पावर इंजीनियर्स फेडरेशन के चेयरमैन शैलेन्द्र दुबे ने कहा कि केंद्रीय विद्युत मन्त्री द्वारा बिजली कर्मचारियों और इंजीनियरों के विरोध के बावजूद लोकसभा में संशोधन बिल लाने के बाद अब देश भर के 12 लाख बिजली कर्मचारियों, जूनियर इन्जीनियरों व अभियन्ताओं के सामने संघर्ष के अलावा और कोई विकल्प नहीं बचा है। दुबे ने बताया कि यदि केंद्र सरकार ने इस मामले में हठवादिता का रवैय्या अपनाया और ऐक्ट में संशोधन का बिल रख दिया है तो नेशनल कोआर्डिनेशन कमेटी ऑफ इलेक्ट्रिसिटी एम्प्लाइज एण्ड इंजीनियर्स राष्ट्रव्यापी आन्दोलन का फैसला लेने हेतु बाध्य होगी। उन्होंने कहा कि विद्युत मन्त्री द्वारा रखे गए इलेक्ट्रिसिटी (अमेंडमेंट) बिल 2014 में बिजली का वितरण व आपूर्ति अलग कर कई निजी कम्पनियों को आपूर्ति का लाईसेन्स देने का प्राविधान है जिससे मुनाफा तो निजी कंपनियां कमाएंगी जबकि सरकारी बिजली कम्पनियों का घाटा और बढ़ेगा, अव्यवस्था फैलेगी और आम लोगों के लिये बिजली की दरों में भारी इजाफा होगा।
श्री दुबे ने कहा कि सरकारी बिजली कंपनियों के घाटे के नाम पर मुनाफे के क्षेत्र बिजली आपूर्ति का निजीकरण किया जा रहा है और संशोधन बिल में लिखा है कि घाटे वाले इलाकों में सरकारी वितरण कम्पनियाँ ही बिजली देती रहेंगी तो तो केंद्र सरकार को यह बताना चाहिए कि क्या इससे सरकारी कंपनियों का घटा और नहीं बढ़ेगा और यह भी कि इस घाटे की भरपाई क्या अंततः आम जनता से टैरिफ बढाकर नहीं की जाएगी। उन्होंने कहा कि इलेक्ट्रिसिटी (अमेंडमेंट) बिल 2014 निजी घरानों को लाभ देने हेतु लाया गया है। उन्होंने कहा कि बिल में यह स्पष्ट नहीं है कि देश के बिजली उद्योग की सबसे बड़ी समस्या ईंधन की कमी दूर करना, लगभग एक लाख मेगावाट क्षमता के बंद पड़े बिजली घरों को संचालित करना, बिजली वितरण कंपनियों को घाटे से उबारना और 40 करोड़ से अधिक लोग जो आज भी बिजली से वंचित है उन्हें बिजली देने का लक्ष्य इस संशोधन बिल से कैसे पूरा होगा।
उन्होंने कहा कि दिल्ली में निजीकरण के 12 साल हो गये है और दिल्ली में इस दौरान टैरिफ में लगभग 250 प्रतिशत की वृद्धि हुई है जो देश में सर्वाधिक है। शहरी क्षेत्रों के फ्रेन्चाइजीकरण का प्रयोग पूरी तरह विफल रहा है। खरीद से काफी कम दाम पर निजी फ्रन्चाईजी को बिजली बेचने के कारण सरकारी बिजली वितरण कम्पनियों का घाटा लगातार बढ़ रहा है। बिजली बोर्डों के विघटन के समय सकल घाटा 26000 करोड़ रूपये था जो अब बढ़कर 5 लाख करोड़ रूपये तक पहुंच गया है। उन्होंने कहा कि सस्ती बिजली मिल सके इस हेतु कोयला खदानों के मुहाने पर चार अल्ट्रा मेगा पावर प्रोजेक्ट निजी घरानों को दिये गये थे किन्तु अब प्रतिस्पद्र्धात्मक बिडिंग के बाद इनके लिए बिजली दरें बढ़ाने की अनुमति दी जा रही है जो आम जनता के साथ धोखा है।
उन्होंने बताया कि फ़िलहाल इलेक्ट्रिसिटी(अमेंडमेंट) बिल 2014 लोकसभा की स्टैंडिंग कमेटी को भेज दिया गया है । आल इंडिया पावर इंजीनियर्स फेडरेशन स्टैंडिंग कमेटी को भी अपना ज्ञापन देगी , साथ ही राष्ट्रव्यापी आंदोलन की तैयारी की जा रही है ।


