झूठ पकड़ने वाली मशीन से हो अखिलेश यादव की जाँच- रिहाई मंच
खालिद के इंसाफ की लड़ाई अल्पसंख्यकों की लड़ाई नहीं है, बल्कि लोकतन्त्र पसन्द लोगों की लड़ाई है।
इक्तीसवें दिन भी विधान सभा लखनऊ पर जारी रहा खालिद मुजाहिद के हत्यारे पुलिस व आईबी अधिकारियों की गिरफ्तारी के लिये रिहाई मंच का अनिश्चितकालीन धरना
लखनऊ, 21 जून। खालिद मुजाहिद के हत्यारे पुलिस व आईबी अधिकारियों की गिरफ्तारी, आरडी निमेष आयोग की रिपोर्ट पर सरकार द्वारा एक्शन टेकन रिपोर्ट जारी कर दोषी पुलिस व आईबी के अधिकारियों को गिरफ्तार करने और आतंकवाद के नाम पर कैद बेगुनाहों को तत्काल रिहा करने की माँग को लेकर रिहाई मंच का अनिश्चितकालीन धरना इक्तीसवें दिन भी जारी रहा। आज क्रमिक उपवास पर रिहाई मंच इलाहाबाद के प्रभरी राघवेन्द्र प्रताप सिंह, मो0 आरिफ और अनिल आजमी बैठे।

धरने को सम्बोधित करते हुये वक्ताओं ने कहा कि इशरत जहां की मां शमीमा कौसर पर जिस तरह पिछले दिनों जान लेवा हमला करने की कोशिश की गयी उससे साफ हो जाता है कि आईबी समेत तमाम सुरक्षा एजेन्सियाँ इंसाफ की इस लड़ाई को रोकने के लिये किसी भी हद तक जा सकती हैं। वक्ताओं ने इशरत की माँ की बहादुरी को सलाम करते हुये कहा कि राज्य मशीनरी एक माँ के न्याय के संघर्ष से किस तरह बौखला गयी हैं इसका नजीर यह हमला है। लेकिन उन्हें यह समझ लेना चाहिये कि इशरत के हत्यारों को सजा दिलाने की लड़ाई सिर्फ उनके परिवार की लड़ाई नहीं है बल्कि देश भर के मुसलमानों और लोकतन्त्र पसन्द अवाम की लड़ाई है और अवाम यह जंग एक दिन जरूर जीतेगी और मोदी समेत इशरत के तमाम हत्यारों को जेल जाना होगा।

वरिष्ठ वामपंथी संस्कृतिकर्मी व पत्रकार आदियोग ने धरने को सम्बोधित करते हुये कहा कि राज्य और केन्द्र सरकार दोनों मिलकर खालिद की हत्या की सीबीआई जाँच इसलिये कराने से भाग रहे हैं कि इसमें खुफिया विभाग का जनविरोधी और कातिलाना चेहरा उजागर हो जायेगा। क्योंकि जब जाँच होगी तो सिर्फ यही साफ नहीं होगा कि किस तरह आईबी ने तारिक और खालिद को फर्जी तरीके से पकड़ा, खालिद की हत्या करवाई बल्कि पिछले दस सालों में यूपी में हुये तमाम आतंकी घटनाओं के पीछे आईबी की भूमिका उजागर हो जायेगी। उन्होंने कहा कि खालिद के इंसाफ की लड़ाई अल्पसंख्यकों की लड़ाई नहीं है, बल्कि लोकतन्त्र पसन्द लोगों की लड़ाई है।

धरने को सम्बोधित करते हुये अखिल भारतीय भिक्षु संघ उत्तर प्रदेश के उपाध्यक्ष भदन्त विजयशील थेरो ने कहा कि भारत में लोकतन्त्र के संवैधानिक संरक्षण की जिम्मेदारी राष्ट्रीय ताज के रूप में अशोक चक्र की है और अशोक चक्र बुद्ध का प्रतीक है जिसका मौलिक अर्थ शांति, मैत्री और करुणा के विचारों का भारत है। पर खालिद की हत्या ने लोकतन्त्र पर प्रश्न चिन्ह लगा दिया है।

धरने को सम्बोधित करते हुये रिहाई मंच इलाहाबाद के प्रभारी राघवेन्द्र प्रताप सिंह ने कहा कि उत्तर प्रदेश की सपा हुकूमत पूरे प्रदेश में बैनर पोस्टर लगाकर 26 जून को 1975 में इंदिरा सरकार द्वारा इमरजेंसी लगाने के खिलाफ लोकतन्त्र रक्षक सेनानियों को सम्मानित करने की बात कर रही है। जबकि पूरे सूबे में एक साल में 27 दंगे, मुसलमानों को बीमारी और गर्दन काटने की धमकी देने वाले वरुण गांधी को न्यायालय से क्लीनचिट दिलवाकर, तीन निर्दोषों मुसिल्म नौजवानों की आतंकवाद के नाम पर गिरफ्तारी, खालिद की हत्या, निमेष कमीशन की रिपोर्ट पर अमल न करके आतंकी वारदातों में संलिप्त पुलिस व आईबी के अधिकारियों को बचाकर देश की सुरक्षा को संकट में डालकर और औरैया से लेकर बलिया तक कब्रिस्तानों की जमीन को कब्जा करके मुस्लिम समाज के लिये एक तरह से आपातकाल की स्थिति पैदा कर दी गयी है, जिससे सरकार का लोकतन्त्र विरोधी चेहरा उजागर हो गया है। उन्होंने कहा कि जो सरकार अपनी अभिरक्षा में बेगुनाह कैदियों की हत्या करवाती हो उसे लोकतन्त्र में बने रहने का कोई अधिकार नहीं है।

धरने के समर्थन में इलाहाबाद विश्वविद्यालय से आये अनिल आजमी और मोहम्मद आरिफ ने कहा कि जिया उल हक की हत्या के बाद एसओ आरपी द्विवेदी की हत्या से साफ हो गया है कि सूबे में कानून व्यवस्था का नहीं बल्कि गुण्डों का राज चल रहा है। जिस तरह जिया उल हक की हत्या में झूठ पकड़ने वाली मशीन से रघुराज प्रताप सिंह का टेस्ट हुआ है वैसी ही जाँच अखिलेश यादव की भी होनी चाहिये, क्योंकि उन्होंने झूठ बोला है कि खालिद की मौत प्राकृतिक कारणों से हुयी है।

धरने को सम्बोधित करते हुये सोशलिस्ट फ्रंट के मोहम्मद आफाक ने कहा कि आजम खान जैसे मिल्लतफरोश मन्त्रियों को शहर की किसी इमारत के ग्रल टूट जाने और अपने फेसबुक की बहुत चिन्ता है। लेकिन खालिद के हत्यारों की गिरफ्तारी के लिये चल रहे आन्दोलन की माँगों पर उनके पास एक लफ्ज कहने के लिये नहीं है। आफाक ने कहा कि खालिद के इंसाफ की लड़ाई तो हम जीतेंगे ही 2014 में सपा का वजूद भी मिटा देंगे।

भारतीय एकता पार्टी (एम) के नेता सैयद मोईद अहमद ने कहा कि यह धरना मुस्लिम विरोधी सपा सरकार के ताबूत में आखिरी कील का काम करेगा। क्योंकि अब मुसलमान मुलायम के असली सांप्रदायिक चेहरे से वाकिफ हो गया है।

रिहाई मंच के प्रवक्ताओं ने बताया कि 25 जून 2013 को लखनऊ विश्वविद्यालय की पूर्व कुलपति व सामाजिक कार्यकर्ता रुपरेखा वर्मा के नेतृत्व में महिला संगठन धरने के समर्थन में आयेंगे।

धरने का संचालन रिहाई मंच के नेता हरे राम मिश्र ने किया। धरने को रिहाई मंच के अध्यक्ष मो0 शुएब, रिहाई मंच इलाहाबाद के प्रभारी राघवेन्द्र प्रताप सिंह, इलाहाबाद से मो0 आरिफ, अनिल आजमी, अवामी काउंसिल के महासचिव एडवोकेट असद हयात, सोशलिस्ट फ्रंट के मो0 आफाक, शुएब, जैद अहमद फारुकी, शमीम वारसी, पीछड़ा महासभा के एहसानुल हक मलिक, भारतीय एकता पार्टी के सैयद मोइद अहमद, पीस पार्टी के शम्स तबरेज खान, इशहाक, आदियोग, फैज, अमित मिश्रा, इंडियन जस्टिस पार्टी के इसराउल्ला सिद्दीकी आदि शामिल हुये।