इस बार वोटों की खेती में देशभक्ति की खाद
इस बार वोटों की खेती में देशभक्ति की खाद
गुनगुनाता राष्ट्रवाद ठाठे मार रहा है
हिन्दू वोट अब मंदिर के नाम पर नहीं मिलने वाले
राजीव मित्तल
सुब्रह्मण्यम स्वामी राम मंदिर के नाम पर चाहे जितना कलाबाजियां खा लें, मोहन भागवत राम मंदिर पर सालाना शपथ ले लें, पर नरेंद्र मोदी के दिमाग में मंदिर कहीं नहीं है....... बल्कि मोदी जी तो उस दिन को कोस रहे हैं, जिस दिन कार सेवकों ने बाबरी मस्जिद ढहा दी थी.... आज अगर वो अपनी जगह मौजूद रहती तो भारतवर्ष "आर्यावर्त" तो बन ही जाता, जहां किसी विधर्मी का शासक बनना नामुमकिन होता .... कोई बात नहीं। रोहित वेमुला की आत्महत्या ने सरकार की जो फ़ज़ीहत कराई थी, जेएनयू के "देशद्रोहियों" ने न केवल उसकी भरपाई कर दी बल्कि राम मंदिर से भी बड़ा मुद्दा दे दिया (गुनगुनाता राष्ट्रवाद ठाठे मार रहा है ) ........!
अगले कई साल तक केंद्र की सत्ता पर काबिज़ रहने के लिए अब की बार उत्तर प्रदेश को मुट्ठी में करना बेहद ज़रूरी है .... और ऐसा कर पाना सर्वधर्म समभाव से नहीं बल्कि हिन्दू वोटों को हथिया कर ही संभव है..... करीब पंद्रह दिन पहले एक अखबारी खबर में अमित शाह के इरादे साफ़ नज़र आ रहे थे कि अगले साल होने जा रहे उत्तर प्रदेश विधानसभा के चुनावों में पार्टी की कमान योगी आदित्यनाथ को सौंपी जाए..... कुछ नेताओं ने जब योगी के कट्टरपंथ को लेकर आपत्ति की तो शाह बोले हमें उत्तर प्रदेश को जीतने के लिए ऐसा ही नेता चाहिए.... मंशा साफ़ है कि केवल हिन्दू मतों पर ही दांव खेला जाए..... ...... और हिन्दू वोट अब मंदिर के नाम पर नहीं मिलने वाले ...... मंदिर का सारा रस बीस साल पहले ही निकाल लिया गया था..... अब तो गन्ने की छूछी बची है ..... इमली के पत्ते पर दंड पेलने वालों के लिए ही बचा है मंदिर वहीं बनाएंगे का नारा ......
उत्तरप्रदेश विधानसभा चुनाव की तैयारी में भाजपा ने देशभक्ति को साम्प्रदायिक चाशनी में लपेटने का मन बनाया है ...... और इस देश में साम्प्रदायिकता को सान पे चढ़ाने के लिए इन दिनों अफज़ल गुरु के बाद बीफ से बड़ा कोई मुद्दा नहीं..... मसलन जेएनयू के शोर में अलीगढ़ मेडिकल कॉलेज की कैंटीन में बीफ बिरयानी का मुद्दा उछाल नहीं मार पाया नहीं तो दस-बीस का सिर क़ुर्बान हो जाने में कोई देर नहीं लगती.....
संघ परिवार के नेताओं को इन दिनों सोते जागते "विधर्मियों" की रसोई में बीफ ही बीफ नज़र आ रहा है......
दूसरे, संघ परिवारियों के सिर पर हिटलर का आर्यवाद सवार हो गया है कि हमारी जैसी सोच के हो तो आर्यवर्ती, अपनी कोई सोच रखते हो तो रावण सरीखे...... सो, अमित शाह के इस स्पष्ट एजेंडे ने आगरा में हुई अरुण माहौर की हत्या से उपजे हिंदुत्व विचारों ने तेजी पकड़ी है..... पूर्वी उत्तरप्रदेश के कई बीजेपी विधायक अभी से जुट गए हैं......


