इस राष्ट्रवाद का परदा बहुत महंगा पड़ने वाला है, याद रखा जाए...!

अरविंद शेष

लिख के रख लीजिए। ये जो चारों तरफ युद्ध का उन्माद, दुश्मन पाकिस्तान की मूर्ति रख कर राष्ट्रवाद का नशा परोसना, देशभक्ति, लोगों को सिर्फ हिंदू या मुसलमान के पाले में खड़ा करने के लिए जानबूझ कर नफरत फैलाने की सियासत जो है न- ये सब सिर्फ परदा हैं। ये फर्जी मुद्दे हैं, जिनके जरिए सिर्फ समूचे देश और यहां तक कि इस देश में नफरत के पैदल सिपाहियों के साथ-साथ कथित बुद्धिजीवियों को भी उलझा कर रखा गया है और सारे इन्हीं बेमानी मुद्दों पर अपने लिए तमगा हासिल करने में जुटे हैं।

असली खेल परदे के पीछे उन तमाम मसलों पर चल रहा है शायद, जहां देश की तकदीर तय हो रही है।

शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार के अलावा सारे जन-कल्याण कार्यक्रमों को निजी क्षेत्र के लुटेरे महाजनों के हाथों में गिरवी रखने की ओर के सफर से देश का क्या भला किया जाएगा, यह समझने के लिए अलग से दिमाग लगाने की जरूरत नहीं है।
किसी को पांच या छह लाख करोड़ रुपए की देनदारी से सीधे बख्श देने के पीछे कोई साधारण सौदेबाजी नहीं होगी।
समझ में नहीं आता कि जब यह देश भुखमरी सूचकांक में एक शर्मनाक पायदान पर है तो हजारों करोड़ रुपए के राफेल या दूसरे विनाशक हथियार खरीद कर किसे नष्ट किया जा रहा है।

दुश्मन की शक्ल में पाकिस्तान को खड़ा कर दिया गया है, लेकिन देश के भीतर सामाजिक-धार्मिक और आर्थिक मोर्चे पर गुपचुप जो भी हो रहा है, वह भारत को ही खोखला कर रहा है, जिसका खमियाजा इस देश को लंबे समय तक उठाना पड़ेगा।

इस राष्ट्रवाद का परदा बहुत महंगा पड़ने वाला है, याद रखा जाए...!