ईएसआई कटौती से पहले बने अस्पताल - वर्कर्स फ्रंट ईएसआई कटौती से पहले बने अस्पताल - वर्कर्स फ्रंट
ईएसआई कटौती से पहले बने अस्पताल - वर्कर्स फ्रंट
ईएसआई कटौती से पहले बने अस्पताल - वर्कर्स फ्रंट
भारत सरकार को भेजा पत्र, मजदूरों में चलेगा हस्ताक्षर अभियान
अनपरा, सोनभद्र, 11 अप्रैल 2017। अनपरा व ओबरा जैसे औद्योगिक केन्द्रों में पहले कर्मचारी राज्य बीमा योजना (ईएसआई) के अस्पताल का निर्माण किया जाए, तब ईएसआई में मजदूरों को शामिल कर उनके वेतन से अशंदान की कटौती की जाए और जब तक यह न हो तब तक रेनूसागर समेत अन्य परियोजनाओं में मजदूरों के वेतन से कटौती पर रोक लगायी जाए व उन्हें परियाजना अस्पतालों में निःशुल्क इलाज की व्यवस्था दी जाए।
यह मांग भारत सरकार को पत्र भेजकर यू0 पी0 वर्कर्स फ्रंट के प्रदेश अध्यक्ष दिनकर कपूर ने की।
गौरतलब हो कि भारत सरकार ने जनवरी माह से सोनभद्र जनपद के 21 हजार रूपए से कम वेतन वाले सभी श्रमिकों को ईएसआई के दायरे में लाने का निर्णय किया है।
भारत सरकार के इस निर्णय के तहत उप क्षेत्रीय कार्यालय कर्मचारी राज्य बीमा निगम वाराणसी द्वारा दिनांक 6 मार्च 2017 के आदेश में सोनभद्र जनपद के समस्त श्रमिकों को ईएसआई के दायरे में लाने और श्रमिक और नियोजक का अंशदान भी ईएसआई में 1 जनवरी 2017 से जमा करने को कहा गया है।
भारत सरकार के इस निर्णय पर आपत्ति करते हुए वर्कर्स फ्रंट के अध्यक्ष ने कहा कि इस निर्णय को लागू करने से पहले भारत सरकार को अनपरा और ओबरा जैसे औद्योगिक क्षेत्रों में ईएसआई अस्पताल का निर्माण कराना चाहिए था। इस सम्बंध में पूर्ववर्ती प्रदेश सरकार ने ठेका मजदूर यूनियन के पत्रक पर भारत सरकार को अनुरोध भी भेजा था। पर केन्द्र सरकार ने इस पर ध्यान नहीं दिया। आज हालत यह है कि जनपद में मात्र एक रेनूकूट में ईएसआई अस्पताल है जिसकी रेनूसागर, शक्तिनगर, अनपरा, ओबरा, डाला आदि में स्थित औद्योगिक प्रतिष्ठानों से करीब चालीस से पचास किलोमीटर की दूरी है। ऐसे में इस अस्पताल में इलाज कराना मजदूरों और उनके परिवारजनों के लिए बेहद महंगा और असुविधाजनक है।
यही नहीं इस अस्पताल में भी बेहद र्दुव्यवस्था है।
उन्होंने कहा कि भारत सरकार का यह निर्णय बिना व्यवस्था दिए मजदूरों के वेतन से अंशदान के नाम पर लूट का ही एक और उदाहरण है। बिना अस्पताल बनवाएं कर्मचारी राज्य बीमा योजना (ईएसआई) में पूरे सोनभद्र जनपद के सभी श्रमिकों को शामिल करना और इसके लिए उनके वेतन से पैसा काटना अवैधानिक है। इसके खिलाफ भारत सरकार को भेजें पत्र पर मजदूरों में हस्ताक्षर अभियान चलाया जायेगा।


