ईरान में राष्ट्रपति का चुनाव के निहितार्थ!
ईरान में राष्ट्रपति का चुनाव के निहितार्थ!
फखरे आलम
ईरान में राष्ट्रपति का चुनाव सम्पन्न हुआ है और चुनाव का परिणाम भी आ गया है। यह परिणाम भारी मतों से हसन रुहानी के पक्ष में रहा। हसन रुहानी के विजय ने सभी राजनीति पंडितों को छका कर रख दिया है। और यूरोपीय ज्योतिषों के सारे आंकड़े यू ही रह गये। खासकर अमेरिकन आकलनकर्ताओं और पत्रकारों के भी अनुमान गलत साबित हुये। ईरान की जनता और वहाँ परिवर्तन की चाह रखने वाले युवाओं ने वह कर दिखाया है कि जिसकी कल्पना किसी को नहीं थी। ईरान सामरिक दृष्टि से बड़ा ही महत्वपूर्ण देश है। जो प्राकृति गैस एवं पेट्रोल का बड़ा उत्पादक और निर्यातकर्ताओं देश में से एक है। मगर पश्चिमी देशों के साथ टकराव उसके विकास का बड़ा काँटा रहा है। ईरान अमेरिकन और इस्रायली प्रभुत्व और हस्तक्षेप को खुली चुनौती देने वाला ईरान एक मात्र इस्लामी राष्ट्र है। ईरान ने अपने आप को लगभग विश्व से अलग कर रखा है। सरकारी नियन्त्रण और प्रतिबन्धों से वहाँ की जनता ऊब चुकी है। नित नए अरब देशों में परिवर्तन के लिये चलाये जा रहे आन्दोलन का प्रभाव भी ईरान पर पड़ा है।
खास कर जब ईरान पश्चिमी मीडिया के निशाने और आलोचनाओं पर बना रहता है तो ईरान में सम्पन्न स्थानिये निकायों का चुनाव और राष्ट्रपति पद के लिये सम्पन्न हुये चुनाव का महत्व और बढ़ जाता है। ईरान में सम्पन्न हुये राष्ट्रपति चुनाव के परिणाम ने विश्व को चौंका दिया है। ईरान को निशाने पर रखने वालों को इस परिणाम ने खूब परेशान किया है। ईरान के धर्मिक नेता खुमेनी पर विश्व की निगाहें टिकी थी कि वह कट्टरवादी और संकीर्ण विचारधाराओं का समर्थक करने वालों को अपना समर्थन देंगे। मगर हुआ इस अनुमान के एकदम विपरित हसन रुहानी को प्राप्त हुये समर्थन को ईरान की बहुसंख्यक जनता के समर्थन के रूप में देखना होगा। जिस में परिवर्तन के संकेत साफ तौर पर देखा जा सकता है। यह ईरान में सम्पन्न हुये शान्तिपूर्वक राष्ट्रपति चुनाव था जो ईरान के राजनीतिक परिवेश का एक उदाहरण और ईरानी जनता का जनतन्त्र और प्रजातन्त्र में विश्वास का नमूना था।
राष्ट्रपति चुने गये हसन रुहानी को पुराने विचार और सुधारवादी नेता दोनों का समर्थन प्राप्त हुआ जिसके अन्तर्गत पूर्व राष्ट्रपति अली अकबर हाशमी रफसंजानी और खातमी का समर्थन मुख्य रूप से हासिल था! ईरानी राष्ट्रपति के चुनावी प्रक्रिया के क्रम में सबसे रोचक राजनीति घटना यह रही कि मतदान से ठीक पूर्व रुहानी के समर्थन में कई अन्य उम्मीदवारों को चुनावी प्रक्रिया से बाहर हो जाने के लिये मना लिया गया था। जिसके कारण रुहानी के जीत का रास्ता साफ हो गया। अभी-अभी सम्पन्न हुये ईरान के राष्ट्रपति चुनाव में चुनाव की निगरानी करने वाली संस्था और ईरानी प्रशासन की भूकिाएं पूरी तरह निष्पक्ष और तटस्थ रहीं जिसके अन्तर्गत प्रिंट ओर इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवारों को अपनी बात रखने का समान अवसर प्रदान किये गये थे। मतदान में करीब तीन करोड़ 60 लाख अर्थात् 72 प्रतिशत रजिस्टर्ड ईरानी नागरिकों ने अपने मतों का प्रयोग किया, जिसमें से करीब 50.7 प्रतिशत मत रुहानी को प्राप्त हुये। ईरान में राष्ट्रपति चुनाव के संविधान के अनुसार 50 प्रतिशत से कम मत प्राप्त होने पर पुनः प्रथम और दूसरे नम्बर पर आने वाले उम्मीदवारों में मतदान कराया जाता है। राष्ट्रपति चुनाव होने से पूर्व करीब दो लाख से अधिक स्थानों पर स्थानीय निकायों के लिये चुनाव शान्तिपूर्वक सम्मन्न कराये गये थे जो ईरान में पनपते मजबूत लोकतंत्र का प्रतीक है।
हसन रुहानी नवगगित राष्ट्रपति का राजनीति पृष्ठभूमि ईरान में काफी लोकप्रिय और महत्व का रहा है। हसन 2003-5 तक ईरान के साथ वार्ता करने वाली अन्तर्राष्ट्रीय टीम में थे, जो ईरान के परमाणु कार्यक्रम को दो वर्षों के लिये टाल दिया था और चुनाव के क्रम में हसन को इस मुद्दे पर अपने पक्ष को बड़ी मजबूती से रखना पड़ा। हसन रुहानी ने ईरानी जनता को अपने पक्ष में किया के दो वर्ष ईरान की सरकार को अन्तर्राष्ट्रीय प्रतिबंध से दो-चार नहीं होना पड़ा। और इन्हीं दो वर्ष की अवधी ईरान के लिये बड़ा अहम रहा। रुहानी ने ईरानी मतदाताओं और जनता को अपने पक्ष में करते हुये बताया था कि अहमदीनेजाद के राष्ट्रपति रहते ईरान अन्तर्राष्ट्रीय प्रतिबंध अन्तर्राष्ट्रीय प्रतिबंध एवं दवाब के कारण अत्यधिक आर्थिक और सामाजिक चुनौतीयों का सामना करते हुये कमजोर पड़ा है। ईरानी जनता की घटती आय, घटते ईरानी रियाल का भाव, बेरोजगारी का बढ़ता अनुपात यह सब हसन रुहानी के विजय का प्रमुख कारण बने।
हसन रुहानी को राष्ट्रपति चुन लिये जाने के पश्चात न केवल ईरान की जनता बल्कि अन्तर्राष्ट्रीय समुदायों की भी यही इच्छा होगी कि ईरान अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर अन्य देशों के साथ मित्रता और सहयोग का हाथ बढ़ायेगा, परमाणु मुद्दों पर वार्ता करेगा। ईरान पर लगे कठोर अन्तरराष्ट्रीय प्रतिबंध पर से इनकी अगुवायी में राहत मिले। ईरान की जनता को अपने देश में और देश से बाहर और अधिक स्वतन्त्रता और राहत मिले। हसन को मिले जनसमर्थन का ईरान के धर्मिक नेता अलातुल्लाह खुमेनी ने सहृदय स्वागत किया है और चुने गये राष्ट्रपति से बेहतर ईरान की कामना की है। हसन ने विजय प्राप्ति के अवसर पर स्पष्ट कर दिया है कि ईरान का परमाणु कार्यक्रन अन्तर्राष्ट्रीय नियमों के अधीन होगा, मगर कार्यक्रम को बन्द नहीं किया जायेगा। मगर ईरान की जनता ने हसन रुहानी में जिस प्रकार से अपना विश्वास व्यक्त किया है उसमें राष्ट्रपति कितना खरा उतरते हैं वह तो भविष्य ही बतायेगा।


