सिंगरौली, 2 जून 2014। करीब तीन हफ्ते से अधिक जेल में गुजारने के बाद वन सत्याग्रही और महान संघर्ष समिति के कार्यकर्ता बेचनलाल साह को जबलपुर उच्च न्यायालय ने जमानत दे दी।
शाह को तीन और वन सत्याग्रहियों के साथ 8 मई को महान जंगल को बचाने के प्रयास में गिरफ्तार किया गया था। इनमें से तीन सत्याग्रहियों को 40 घंटे बाद ही रिहा कर दिया लेकिन शाह को जमानत देने से इंकार कर दिया गया था। इस गिरफ्तारी के खिलाफ महान क्षेत्र के ग्रामीणों ने सिंगरौली क्षेत्र के दूसरे सामाजिक संगठनों के साथ 19 मई को जिला कलेक्टर के सामने शांतिपूर्ण धरना भी दिया था।
महान संघर्ष समिति के कार्यकर्ता विरेन्द्र सिंह कहते हैं कि, “अपने जंगल को बचाने के लिए बेचनलाल जी को चार हफ्ते जेल में रहना पड़ा। हम उन्हें सलाम करते हैं। उनके उत्साह और जोश ने हमें संकट की घड़ी में लगातार प्रेरित किया है”।
कई सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भी वन सत्याग्रहियों को गिरफ्तार करने के तरीकों को लेकर पुलिस की आलोचना की थी। जहां एक तरफ पुलिस फर्जी ग्राम सभा के खिलाफ एफआईआऱ करने से पीछे हट रही है वहीं दूसरी तरफ उसने 48 घंटे के भीतर ही आधी रात को सामाजिक कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार कर लिया।
ग्रीनपीस की सीनियर कैंपेनर प्रिया पिल्लई कहती हैं कि, “हम लोगों ने जबलपुर हाईकोर्ट में एक याचिका दायर करके मांग किया है कि पुलिस अधिक्षक सिंगरौली फर्जी ग्राम सभा मामले में एफआईआर दर्ज करें”।
महान संघर्ष समिति और ग्रीनपीस ने बेचनलाल जी के उत्साह को सलाम किया है। साथ ही समिति ने अब ज्यादा ताकत से महान जंगल को बचाने की लड़ाई को जारी रखने का ऐलान करते हुए कहा है जब तक फरवरी में महान कोल लिमिटेड (एस्सार व हिंडाल्को का संयुक्त उपक्रम) को मिले दूसरे चरण की मंजूरी को वापस नहीं लिया जाता तब तक वन सत्याग्रह जारी रहेगा।