भागीरथी नदी के उग्र रूप लेने और हिमखण्ड के पिघलने से बढ़े जलस्तर से सैलाब के खौफ के चलते प्रशासन ने आसपास के इलाके खाली कराये हैं वहीं आपदा प्रबन्धन को लेकर मौसम विभाग और राज्य सरकार के बीच तू-तू मैं-मैं जारी है। खराब मौसम की वजह से भारतीय पुरातत्व (एएसआई) की टीम केदारनाथ नहीं पहुँच पा रही है तो मृतकों की जानकारी को लेकर मतभेद जारी है। मुख्यमन्त्री विजय बहुगुणा ने विधानसभा अध्यक्ष के आँकड़ों को गलत बताते हुये कहा है कि, पता नहीं यह जानकारी कहाँ से मिली।

मौसम विभाग ने दावा किया है कि बीती 15 जून को उसने चार धाम यात्रा रोकने की चेतावनी देते हुये राज्य सरकार को चिट्ठी लिखी थी। जबकि मुख्यमन्त्री विजय बहुगुणा ने लापरवाही से इंकार किया है।

उत्तराखण्ड में आयी तबाही के लिये मौसम विभाग ने उत्तराखण्ड सरकार को दोषी ठहराया है। मौसम विभाग ने उत्तराखण्ड सरकार पर ये आरोप लगाया है कि सरकार को मौसम विभाग ने चिट्टी लिखकर पहले ही उत्तराखण्ड में भारी बारिश होने की चेतावनी दी थी। मौसम विभाग की माने तो विभाग ने उत्तराखण्ड सरकार को 15 जून को चिट्टी लिखकर इलाके में भारी बारिश होने की चेतावनी दी थी और साथ ही केदारनाथ, बद्रीनाथ धामों की यात्रा को रोकने के लिये भी कहा था। लेकिन चेतावनी मिलने के बाद भी उत्तराखण्ड सरकार नहीं संभली, और आपदा से बचने के लिये कोई प्रबन्ध नहीं किये।

उत्तराखण्ड के आपदा प्रबन्धन के मन्त्री यशपाल आर्या ने माना है कि आपदा प्रबन्धन में कमी थी। जबकि काँग्रेस प्रवक्ता भक्तदास चरणदास ने कहा है कि उत्तराखण्ड में बहुगुणा से पहले भी कई सरकारें थी। अब त्रासदी के लिये कौन जिम्मेदार है ये बाद में पता चलेगा।

उधर भाजपा ने उत्तराखण्ड त्रासदी के लिये केन्द्र और राज्य सरकार को जिम्मेदार ठहराया है।

उत्तराखण्ड में हुये कुदरत के कहर पर मुख्यमन्त्री बहुगुणा का कहना है कि त्रासदी के कारण अब भी तीन हजार से ज्यादा लोगों का कुछ पता नहीं है।