नई दिल्ली, 22 अगस्त। सेक्स वर्कर्स की सामूहिक शक्ति को महसूस करते हुये योजना आयोग की सदस्या डॉ. सैयदा हमीद ने कहा कि 12वीं पंचवर्षीय योजना में कई तरीकों को शामिल किया गया है जिससे उपेक्षित लोगों की आवाज को भी सुना जायेगा।

ऑल इंडिया नेटवर्क ऑफ़ सेक्स वर्कर्स (एआईएनएसडब्ल्यू) के बैनर तले तेरह राज्यों के सेक्स वर्कर्स के प्रतिनिधि राष्ट्रीय राजधानी में सेक्स वर्कर्स के सम्मान और अधिकार को सुनिश्चित करने के लिये 21-22 अगस्त को हो रहे राष्ट्रीय सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिये जमा हुये। तीन साल पहले सेक्स वर्कर्स के अधिकार और उनके लिये सुविधाओं की मांग के लिये एआईएनएसडब्ल्यू का गठन हुआ था।

सेक्स वर्कर्स के सम्मान और अधिकार की सुरक्षा के लिये दो दिनों तक चली राष्ट्रीय बैठक में अपने समापन भाषण में डॉ. सैयदा हमीद ने कहा कि सेक्स वर्कर्स का समुदाय समाज के विकास से कटा हुआ है। हमीद के साथ इस सत्र में केन्द्रीय भूतल परिवहन मंत्री आस्कर फर्नांडीस और एड्स नियंत्रण विभाग की अतिरिक्त सचिव आराधना जौहरी भी शामिल हुयीं।

केन्द्रीय भूतल परिवहन मंत्री और एड्स के मुद्दे पर बने संसदीय फोरम के संस्थापक सदस्य और सेक्स वर्कर्स के आंदोलन से लम्बे समय से जुड़े हुये आस्कर फर्नांडीज़ ने कहा, “एचआईवी की रोकथाम की दिशा में आप लोगों की कोशिशों और प्रयासों की मैं प्रशंसा करता हूँ।” उन्होंने इस मौके पर यह भी बताया कि एड्स के मुद्दे पर बना संसदीय फोरम देश भर में वर्कशॉप्स का आयोजन कर रहा है। उन्होंने ऑल इण्डिया नेटवर्क ऑफ़ सेक्स वर्कर (एआईएनएसडब्ल्यू) को इन वर्कशॉप्स में शामिल होने का आमन्त्रण भी दिया।

जंतर- मंतर पर पेंशन परिषद की बैठक में शामिल सामाजिक कार्यकर्ता अरुणा राय भी इस बैठक में हिस्सा लेने के लिये पहुँची। उन्होंने सेक्स वर्कर्स को अपना समर्थन देने की घोषणा करते हुये कहा, “हम सेक्स वर्कर्स को असंगठित क्षेत्र में काम कर रहे दूसरे वर्कर्स की तरह ही देखते हैं।”

उन्होंने सेक्स वर्कर्स के पेशे को काम के तौर पर मान्यता दिये जाने की माँग का समर्थन करते हुये कहा कि इसे अपराध के दायरे से हटाना होगा। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि सेक्स वर्कर्स से सम्बंधित कानून और नीतियाँ बनाने में सेक्स वर्कर्स से सलाह मशविरा किया जाना चाहिए।

आईटीपीए में प्रस्तावित कानूनी संशोधनों पर बोलते हुये स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय की पूर्व सचिव के सुजाता राव ने कहा, “सेक्स वर्कर भी इंसान हैं, उनकी अपनी इच्छाएं होती हैं। उन्हें केवल नैतिक आधार पर नहीं परखा जाना चाहिए। मैं नहीं समझती हूँ कि सेक्स वर्कर्स के ग्राहकों को अपराध के दायरे में लाने से कोई मदद मिलने वाली है। इससे सेक्स वर्कर्स के साथ हिंसा के मामले बढ़ेंगे। इसलिये सार्वजनिक नीतियों के लिहाज से यह बेहतर कदम नहीं है।”

दो दिनों के राष्ट्रीय बैठक की थीम थी- केवल सही कदमों के जरिए ग़लतियों को रोका जा सकता है। बैठक के दूसरे दिन सेक्स वर्कर्स के प्रतिनिधियों के बीच स्वास्थ्य और उनके ख़िलाफ़ होने वाली हिंसा पर चर्चा हुयी। इसमें सरकार, न्यायपालिका, मीडिया और सामाजिक क्षेत्र से जुड़ी शख्सियतों ने हिस्सा लिया।

इस सत्र में बोलने वाले विशिष्ट लोगों में भारत के ग्रामीण विकास और पंचायती राज मंत्रालय की पूर्व सचिव मीनाक्षी दत्ता घोष, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय की पूर्व सचिव के सुजाता राव, सुषमा मेहरोत्रा, यूएनएड्स के ओसामा तावेल, एनडीटीवी की वरिष्ठ पत्रकार सुतापा देब, मानवाधिकार कार्यकर्ता कामायनी बाली महाबल, यूनाइटेड नेशंस डेवलपमेंट प्रोग्राम की अलका नारंग, राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविकाय आयोग की निदेशक शारदा मुरलीधरन, एमकेएसएस की निखिल डे, राष्ट्रीय स्त्री सशक्तिकरण आयोग की मिशन डायरेक्टर रश्मि सिंह, सीपीआईएम की सांसद सैयदुल हक शामिल थे।

इनके लोगों के अलावा सेक्स वर्कर्स कलेक्टिव के प्रतिनिधियों में पीडब्ल्यूएन प्लस की अध्यक्ष पी कौशल्या, आशोदया की भाग्या और कुसुम ने अपने विचार रखे।