एक पिता के प्यार, विश्वास और धैर्य की जीत
एक पिता के प्यार, विश्वास और धैर्य की जीत
रश्मि रविजा
"शर्मीला इरोम' के सन्दर्भ में कुछ सज्जनों का कहना था कि अकेला कोई व्यवस्था से नहीं लड़ सकता...एक व्यापक जन-समूह की जरूरत होती है. कानून बहुत चिंतन-मनन के बाद बनाए जाते हैं. उन्हें नहीं बदला जा सकता. अभी हाल में ही देखा...कपिल सिब्बल ने भी बरखा दत्त को दिए अपने इंटरव्यू में कहा, "हमारा संविधान कई महान लोगो ने काफी विचार-विमर्श के बाद बनाए हैं...उसकी धाराएं यूँ ही नहीं बदली जा सकतीं. " (जबकि लगभग ९० बार क़ानून की धाराओं में संशोधन हो चुका है...ये अलग बात है...तब राजनीतिज्ञ इसमें अपना फायदा देखकर इसका समर्थन करते रहे ) ये पोस्ट भी कहीं ना कहीं 'शर्मीला इरोम' से सम्बन्धित मुद्दों {यानि कानून की धाराओ में समय की ,मांग अनुसार परिवर्तन होना चाहिए } की ओर इशारा करती है |
Evelyn
एक सच्ची घटना के ऊपर बनी अंग्रेजी फिल्म है...जिसमे तीन बातें मुख्य रूप से उभर कर आती हैं.
प्रथम, एक पिता का अपने बच्चों को पाने का संघर्ष (अक्सर कहानियाँ, सिर्फ माँ के संघर्ष को लेकर ही लिखी जाती हैं )
द्वितीय, उसका अकेले ही व्यवस्था के खिलाफ लड़ना
तृतीय, अपने जुनून से कानून में परिवर्तन करवाने में सक्षम होना,
Evelyn एक अंग्रेजी फिल्म है...जो Desmond Doyle की सच्ची कहानी पर आधारित है...जिसमे 1954 में उसने अपने बच्चों को वापस अपनी कस्टडी में लेने के लिए Irish court में केस लड़ा था और जीत भी गया था. Irish Children's Act में महत्वपूर्ण परिवर्तन किए गए.
एवलिन एक सुनहरे लम्बे बालों वाली प्यारी सी बच्ची है. उसके पिता डेसमंड डोएल की नौकरी छूट जाती है और उसकी माँ एवलिन और उसके दो छोटे भाइयों को छोड़कर किसी और पुरुष के साथ घर छोड़कर चली जाती है. डेसमंड पैसे और घर पर किसी महिला के अभाव में बच्चों की अच्छी तरह देखभाल नहीं कर पाता और जैसा कि विदेशों में नियम हैं..ऐसे हालात में बच्चों को प्रशासन अपनी देख-रेख में ले लेता है. चर्च द्वारा संरक्षित अनाथालय में गर्ल्स होस्टल में लड़की और बोयज़ हॉस्टल में लडको को भेज दिया जाता है.
स्वाभाविक रूप से बच्चे डरे हुए हैं. एवलिन को हॉस्टल छोड़ने उसके दादा जी आए हैं. वे घबराई हुई एवलिन को पेडों से छन कर आती हुई सूरज की रोशनी की ओर देखने को कहते हैं...और बताते हैं "ये Angel Rays हैं..और हमेशा तुम्हारी रक्षा करेंगी " इसके बाद जब भी एवलिन किसी मुश्किल में पड़ती है...उदास होती है..वो Angel Rays की तरफ देखती है..और उसे संबल मिलता है. किसी भी तरह की आस्था और विश्वास कितनी ही कठनाइयों से लड़ने की हिम्मत पैदा कर देती है.
डेसमंड इसे टेम्पररी व्यवस्था समझता है..और एक पब में गाना गा कर पैसे कमाना शुरू कर देता है..इसके बाद जब वो बच्चों को लाने जाता है...तो उसे बच्चे नहीं सौंपे जाते.वो केस कर देता है...पर जज कहते हैं..."तुम्हारे पास नौकरी नहीं है...रात में अपने पिता के साथ एक पब में गाते हो...(उसके पिता वायलिन बजाते हैं...और डेसमंड गाना गाता है) और शराब पीते हो. ऐसे हालात में बच्चों को तुम्हे नहीं सौंपा जा सकता .
डेसमंड अब शराब छोड़ देता है...और छोटे-मोटे काम..पेंटर-डेकोरेटर का काम शुरू कर देता है.चौबीसों घंटे काम करता है...अब एक अच्छा वकील कर के अपने बच्चों की कस्टडी के लिए याचिका दायर करता है. पर आयरिश क़ानून में बच्चों को पिता की देखभाल में छोड़ने के लिए माँ की सहमति जरूरी होती है. अगर माँ की मृत्यु हो गयी हो...उसी स्थिति में सिर्फ पिता की सहमति चाहिए होती है.पर यहाँ एवलिन की माँ जिंदा है...लेकिन कहाँ है...कोई खबर नहीं. डेसमंड फिर से केस हार जाता है,..और इस बार जज उसे सुप्रीम कोर्ट में अपील करने की अनुमति भी नहीं देते.
अब कौन सा उपाय है.??.पूछने पर वकील कहता है..अगर कानून में ही संशोधन की अपील की जाए तो कुछ संभव है..पर उसके लिए किसी बैरिस्टर को केस सौंपना होगा और बहुत सारे पैसे लगेंगे. डेसमंड फिर से दुगुनी मेहनत कर पैसे जमा करता है...और वकील से समय ले मिलने जाता है. वकील एपोएंट्मेंट कैंसल कर अपने फ़ार्म हाउस में छुट्टियाँ बिता रहा है. डेसमंड कंटीले तारों वाली बाउंड्री फलांग कर...अंदर जाने की कोशिश करता है...वकील के बड़े बड़े कुत्ते उसका पीछा करते हैं. किसी तरह भागते हुए वो नदी के बीच में जाकर वकील से मिलता है..जहाँ वकील अपने एक दोस्त के साथ...एक नाव में फिशिंग कर रहा है .
वकील के कहने पर कि ये केस किसी तरह भी हम नहीं जीत सकते हैं...डेसमंड उसे चैलेन्ज करता है..कि मैं अपने बच्चों को वापस लाने के लिए कुछ भी करूँगा. वकील का मित्र अमेरिका से क़ानून की पढ़ाई करके आया है...वो ये केस लड़ने की पेशकश करता है...क्यूंकि अपने डिवोर्स में वो भी अपने बेटे की कस्टडी हार गया था...और एक पिता के दर्द को समझता है.
सरकार भी अपनी तरफ से केस जीतने की पूरी कोशिश करती है..और जिस जज ने इसके विरुद्ध फैसला दिया था उसे अब हाइ-कोर्ट से प्रमोट कर सुप्रीम कोर्ट में ले आती है. डेसमंड के वकील कानून मंत्री को भी विटनेस बॉक्स में बुलाते हैं...और उन्हें बाइबल से उद्धरण पढ़ने को कहते हैं...(जिसपर, वहाँ का कानून आधारित है) जिसमे लिखा है...कि "बच्चों को अपने घर से बढ़कर खुशियाँ कहीं नहीं मिल सकतीं". माँ की अनुपस्थिति के लिए भी ये लोग तर्क देते हैं कि चर्च में हमेशा प्रार्थना करते वक्त कहते हैं..... ..In The Name of The Father and the Son and the Holy Spirit इसका अर्थ है कि एक पिता भी बच्चों की परवरिश करने में सक्षम है.
केस में कई उतार चढ़ाव आते हैं...एवलिन की एक नन द्वारा पिटाई करने पर डेसमंड का गुस्से में नन का गला पकड़ लेना..डेसमंड के खिलाफ जाता है. फिर फैसले का दिन आ जाता है.
तीन जज में से हाईकोर्ट वाले जज तो इसके विरुद्ध फैसला देते हैं..जबकि बाकी दोनों जज इसके पक्ष में. उनका कहना है..कि "अब तक ऐसा उदाहरण नहीं है...लेकिन उदाहरण नहीं है तो उदाहरण बनाना चाहिए."
इस दौरान पूरे देश की जनता, डेसमंड के साथ रहती ... अखबारों में रेडियो पर उसके इंटरव्यू लिए जाते हैं...उसे Best Man of the Year का अवार्ड भी दिया जाता है. केस की एक एक पल की खबर की कमेंट्री की जाती है... पूरा आयरलैंड रेडिओ से कान लगाए बैठा होता है...एक टीचर के साथ एवलिन और तीन लडकियाँ भी खबरे सुन रही हैं...जैसे ही जीत की खबर आती है...एक लड़की भागती हुई जाती है...और हॉल में इकट्ठे हुए बच्चों से चिल्ला कर कहती है..."Now We All can go Home"
जनमत डेसमंड के साथ था...पर इस से केस प्रभावित नहीं हुआ.पूरी न्यायिक प्रक्रिया के तहत ही डेसमंड डोएल ने ये केस लड़ा और जीता और अगली क्रिसमस में बच्चे उसके पास थे.
शर्मीला इरोम अपने लिए नहीं...दूसरों के लिए लड़ रही हैं...उनके आन्दोलन के सामने ये एक बहुत छोटा सा उदाहरण है..पर हिम्मत करनेवालों की कभी की हार नहीं होती...
किसी शायर ने कितना सही कहा है...
जज़्बा कोई अख़लाक से बेहतर नहीं होता।
कुछ भी यहां इंसान से बढ़कर नहीं होता।
कोशिश से ही इंसान को मिलती है मंजिलें,
मुट्ठी में कभी बंद मुक़द्दर नहीं होता।


